सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (तस्वीर क्रेडिट@psuconnect)

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 296 करोड़ का इनकम टैक्स नोटिस,बैंक ने आकलन को चुनौती देने का किया फैसला

नई दिल्ली,1 अप्रैल (युआईटीवी)- सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को आयकर विभाग की ओर से 296.08 करोड़ रुपये का डिमांड नोटिस मिला है,जिससे वित्तीय जगत में हलचल मच गई है। बैंक ने इस संबंध में मंगलवार को एक्सचेंज को जानकारी देते हुए बताया कि यह नोटिस वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कथित रूप से कम टैक्स भुगतान के आरोपों के आधार पर जारी किया गया है। हालाँकि,बैंक ने इस आकलन से असहमति जताते हुए इसे चुनौती देने का फैसला किया है।

एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार,बैंक को 28 मार्च 2026 को जारी मूल्यांकन आदेश के तहत यह माँग नोटिस मिला,जिसे बैंक ने 30 मार्च को इनकम टैक्स पोर्टल पर देखा। इस आदेश में आयकर अधिकारियों द्वारा की गई कुछ कटौतियों को अस्वीकार करने और कुछ अतिरिक्त राशियों को जोड़ने का जिक्र किया गया है,जिसके चलते कुल 296.08 करोड़ रुपये की माँग उत्पन्न हुई है। यह मामला अब कानूनी प्रक्रिया की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।

बैंक ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि वह इस माँग से सहमत नहीं है और इसके खिलाफ उचित मंच पर अपील दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बैंक का कहना है कि वह निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित प्राधिकरण के समक्ष अपनी अपील दाखिल करेगा और इस मामले में अपनी स्थिति को मजबूती से रखेगा। बैंक प्रबंधन का मानना है कि उसके पास इस माँग को चुनौती देने के लिए पर्याप्त तथ्यात्मक और कानूनी आधार मौजूद हैं।

आयकर विभाग की ओर से जारी इस नोटिस में जिन बिंदुओं पर आपत्ति जताई गई है,उनमें कुछ टैक्स कटौतियों को अस्वीकार करना और आय के कुछ हिस्सों को अतिरिक्त रूप से जोड़ना शामिल है। हालाँकि,बैंक का कहना है कि ये सभी बिंदु विवादित हैं और इन पर पहले भी समान मामलों में अपीलीय अधिकारियों द्वारा बैंक के पक्ष में फैसले दिए जा चुके हैं। इसी आधार पर बैंक को उम्मीद है कि इस बार भी उसे राहत मिलेगी।

बैंक ने अपने बयान में यह भी कहा कि इस माँग नोटिस का उसके वित्तीय या परिचालन गतिविधियों पर कोई प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। बैंक का मानना है कि यह एक नियमित कर विवाद है,जिसे अपील प्रक्रिया के माध्यम से सुलझा लिया जाएगा। बैंक ने निवेशकों और हितधारकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत है और इस तरह के नोटिस से उसके संचालन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े संस्थानों के लिए इस तरह के कर विवाद असामान्य नहीं हैं। अक्सर आयकर विभाग और कंपनियों के बीच टैक्स देनदारियों को लेकर अलग-अलग व्याख्याएँ सामने आती हैं,जिसके चलते ऐसे विवाद उत्पन्न होते हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय आमतौर पर अपीलीय मंचों पर ही होता है,जहाँ दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं।

इस मामले में भी बैंक ने पहले से ही स्पष्ट कर दिया है कि वह पूरी मजबूती के साथ अपनी बात रखेगा और उसे भरोसा है कि उसे न्याय मिलेगा। बैंक का यह भी कहना है कि उसने सभी कर नियमों का पालन किया है और उसके द्वारा दाखिल किए गए रिटर्न पूरी तरह से पारदर्शी और नियमों के अनुरूप हैं।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है,जब बैंकिंग क्षेत्र पहले से ही कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में इस तरह के नोटिस निवेशकों के बीच चिंता पैदा कर सकते हैं,लेकिन बैंक का आत्मविश्वास इस बात का संकेत है कि वह इस स्थिति को सँभालने के लिए तैयार है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता और समय पर जानकारी देना बेहद महत्वपूर्ण होता है,ताकि निवेशकों का भरोसा बना रहे। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने एक्सचेंज को समय पर जानकारी देकर यह सुनिश्चित किया है कि बाजार में किसी तरह की अफवाह या भ्रम की स्थिति न बने।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि बैंक की अपील पर क्या निर्णय आता है और क्या उसे इस माँग से पूरी या आंशिक राहत मिलती है। फिलहाल,बैंक ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए यह संकेत दे दिया है कि वह इस मामले को कानूनी रूप से आगे बढ़ाएगा और अपने हितों की रक्षा करेगा।

यह मामला एक सामान्य कर विवाद के रूप में सामने आया है,जिसमें बैंक और आयकर विभाग के बीच मतभेद हैं। हालाँकि,बैंक का आत्मविश्वास और पिछले मामलों में मिले सकारात्मक फैसलों का हवाला इस बात की ओर इशारा करता है कि उसे इस विवाद के समाधान में सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।