चंडीगढ़ पीजीआई की ओर से पहली बार रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांटेशन

चंडीगढ़, 21 अप्रैल (युआईटीवी/आईएएनएस)| यहां पीजीआई के यूरोलॉजी विभाग ने अब तक का पहला रोबोटिकली असिस्टेड किडनी ट्रांसप्लांट किया है। डॉक्टरों का कहना है कि गुर्दा प्रत्यारोपण (किडनी ट्रांसप्लांट) में न्यूनतम इनवेसिव वाली रोबोटिक सर्जरी में ओपन सर्जरी की तुलना में जटिलता की संभावना कम होने जैसे लाभ हैं। यह मोटापे से पीड़ित मरीजों के लिए अधिक प्रभावी है। विभाग 2015 से रोबोटिक सर्जरी कर रहा है।

यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. उत्तम एम. ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी के अनुभव ने विभाग को रोबोट-सहायता प्राप्त गुर्दा प्रत्यारोपण शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

डॉ. उत्तम ने आगे कहा, स्थापित डायलिसिस विधियों की तुलना में गुर्दा प्रत्यारोपण एक बेहतर गुर्दे की प्रतिस्थापन चिकित्सा के रूप में विकसित हुआ है क्योंकि यह गुर्दे की विफलता वाले मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में ज्यादा सुधार करता है।

परंपरागत रूप से ओपन सर्जरी (बड़े चीरा लगाकर)गुर्दा प्रत्यारोपण किया जाता है। चीरे की लंबाई सर्जन और मरीज की आदतों के आधार पर भिन्न होती है। सामान्य तौर पर मोटापे से ग्रस्त मरीजों को बड़े चीरों की जरूरत होती है।

उन्होंने आगे बताया कि लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी दो सामान्य रूप से न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रियाएं हैं। यूरोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. शैंकी सिंह ने कहा कि रोबोट प्रत्यारोपण दोनों रिसिपिएंट के लिए बहुत बेहतर है।

मेदांता के रोबोटिक रीनल ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. राजेश अहलावत और उनके सहयोगी डॉ. सुदीप बोद्दुलुरी ने विभाग को रोबोटिक रीनल ट्रांसप्लांटेशन शुरू करने में मदद की है।

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