प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@mlabhagirathi)

छठ पूजा का महापर्व नहाय-खाय से शुरू,पीएम मोदी और नीतीश कुमार ने दी शुभकामनाएँ

नई दिल्ली,25 अक्टूबर (युआईटीवी)- आस्था और भक्ति का महापर्व छठ पूजा शनिवार से शुरू हो गया है। नहाय-खाय के पावन अनुष्ठान के साथ चार दिवसीय यह पर्व उत्तर प्रदेश,बिहार और देशभर के साथ-साथ विश्व के विभिन्न हिस्सों में भी श्रद्धालुओं द्वारा उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व न केवल सूर्य देव की उपासना का प्रतीक है,बल्कि इसे सादगी,संयम और परिवारिक सद्भाव का महापर्व भी माना जाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर देशवासियों को छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि नहाय-खाय के पावन अनुष्ठान के साथ आज से चार दिवसीय महापर्व छठ का शुभारंभ हो रहा है। पीएम मोदी ने अपने संदेश में विशेष रूप से कहा कि बिहार सहित पूरे देश के श्रद्धालुओं को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ। सभी व्रतियों को मेरा नमन और वंदन।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हमारी संस्कृति का यह विराट उत्सव सादगी और संयम का प्रतीक है,जिसकी पवित्रता और नियम-निष्ठा अतुलनीय है। उन्होंने यह भी बताया कि छठ पूजा के दौरान घाटों पर जो दृश्य दिखाई देता है,वह पारिवारिक और सामाजिक सद्भाव की अद्भुत प्रेरणा देता है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि समाज और संस्कृति के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है।

पीएम मोदी ने अपने संदेश में छठ की प्राचीन परंपरा और इसके सामाजिक महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि छठ पूजा की परंपरा का हमारे समाज पर गहरा प्रभाव रहा है और आज यह पर्व विश्व के कोने-कोने में मनाया जाता है। दुनिया के हर हिस्से में रहने वाले भारतवंशी परिवार इस परंपरा में पूरी आत्मीयता से सम्मिलित होते हैं। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर छठी मइया से सभी के कल्याण और आशीर्वाद की कामना की।

छठ महापर्व को आस्था,उपासना और प्रकृति प्रेम का अनूठा संगम माना जाता है। इसमें अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने का रिवाज है,वहीं उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने का भी विशेष महत्व है। इसके अलावा छठ पूजा में प्रसाद तैयार करना और उसे बाँटना भी एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। इस प्रसाद में प्रकृति के विविध रंग और सामग्रियों का समावेश होता है,जो इसे और भी पवित्र और आकर्षक बनाता है।

प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि छठ पूजा के गीत और भक्ति धुनों में प्रकृति और भगवान सूर्य के प्रति श्रद्धा का अद्भुत भाव भरा होता है। उन्होंने इस अवसर पर अपने संदेश में छठ पूजा के कुछ गीतों को साझा किया,जिन्हें सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। ये गीत पारंपरिक होते हुए भी भावनाओं और आस्था के अद्वितीय रंग से ओत-प्रोत हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस महापर्व के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ के अवसर पर प्रदेश एवं देशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ। मुख्यमंत्री ने छठ पूजा को आत्मानुशासन और शुद्ध अंतःकरण के पर्व के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर लोग निर्मल मन से अस्ताचल और उदीयमान सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं और भगवान भास्कर से राज्य की प्रगति,सुख,शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

छठ पूजा के दौरान घाटों पर महिलाओं और पुरुषों की भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु नदी या तालाब के किनारे सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं। नहाय-खाय के पहले दिन व्रती शुद्धता और संयम के साथ भोजन ग्रहण करते हैं और अन्य दिनों में उपवास और निर्जला व्रत रखते हैं। इस पर्व में परिवार और समाज की भूमिका भी अहम होती है,क्योंकि सभी मिलकर तैयारी करते हैं और पूजा अनुष्ठानों में सहयोग करते हैं।

छठ महापर्व का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं,बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह पर्व न केवल व्यक्तिगत आस्था का प्रतीक है,बल्कि समाज और परिवार के बीच सहयोग,सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने में भी योगदान देता है। इस पवित्र पर्व के दौरान लोगों के व्यवहार,परंपरा और भक्ति भावना में स्पष्ट प्रतिबिंब दिखाई देता है।

देश और विदेश में रहने वाले भारतीय अपने परिवार के साथ घाटों पर छठ पूजा में सम्मिलित होते हैं। छठ के दौरान पारंपरिक गीत और भजन वातावरण को और भी पवित्र बनाते हैं। यह पर्व अपने आप में न केवल सूर्य उपासना का प्रतीक है,बल्कि आस्था,संयम और प्रकृति के प्रति सम्मान का भी संदेश देता है।

इस प्रकार,नहाय-खाय से शुरू हुआ छठ महापर्व श्रद्धालुओं के लिए चार दिनों तक उत्साह,भक्ति और सामाजिक सद्भाव का माध्यम बनेगा। पीएम मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने देशवासियों को छठ पूजा की शुभकामनाएँ देते हुए इस पर्व के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को उजागर किया। यह पर्व भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा और विश्वभर में फैले भारतवंशियों के बीच साझा आस्था का प्रतीक है।