कैनबरा,1 अप्रैल (युआईटीवी)- ऑस्ट्रेलिया ने डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू किया है,लेकिन अब इस कानून के पालन को लेकर कई बड़ी टेक कंपनियाँ जाँच के घेरे में आ गई हैं। सरकार ने मंगलवार को जानकारी दी कि पाँच प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स इस नियम का पालन करने में विफल रहे हैं,जिसके चलते उनके खिलाफ औपचारिक जाँच शुरू कर दी गई है।
यह कदम ऑस्ट्रेलिया को दुनिया का पहला ऐसा देश बनाता है,जिसने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इतने व्यापक स्तर पर सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू किया है। दिसंबर में लागू हुए इस कानून के तहत,यदि कोई सोशल मीडिया कंपनी 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अपने प्लेटफॉर्म तक पहुँचने से रोकने में पर्याप्त कदम नहीं उठाती है,तो उस पर 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
संघीय सरकार के ई-सेफ्टी कमिश्नर कार्यालय की पहली रिपोर्ट में इस बात को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है कि कई प्रमुख प्लेटफॉर्म्स,जिनमें फेसबुक और इंस्टाग्राम शामिल हैं, उम्र सत्यापन और सुरक्षा उपायों को लेकर पर्याप्त सख्ती नहीं बरत रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार,कुछ प्लेटफॉर्म बच्चों को बार-बार अलग-अलग तरीकों से अपनी उम्र 16 साल से अधिक दिखाने की अनुमति दे रहे हैं,जिससे यह प्रतिबंध प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कई प्लेटफॉर्म्स पर उम्र-सीमित खातों की रिपोर्ट करने की सुविधा भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं है। इससे यह समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि ऐसे में न तो अभिभावक और न ही अन्य उपयोगकर्ता संदिग्ध खातों की शिकायत कर पाते हैं। यह स्थिति बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा मानी जा रही है।
ई-सेफ्टी कमिश्नर जूली इनमैन ग्रांट ने स्पष्ट किया है कि उनका कार्यालय अब केवल निगरानी के चरण में नहीं,बल्कि नियमों को सख्ती से लागू करने के चरण में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि जिन प्लेटफॉर्म्स की पहचान की गई है,उन्हें उनके विशिष्ट उल्लंघनों के बारे में सूचित कर दिया गया है और अब उनके खिलाफ औपचारिक जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
सरकार का रुख भी इस मामले में काफी सख्त नजर आ रहा है। ऑस्ट्रेलिया की संचार मंत्री अनिका वेल्स ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कंपनियाँ ऑस्ट्रेलिया में अपना कारोबार जारी रखना चाहती हैं,तो उन्हें देश के कानूनों का पालन करना ही होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऑनलाइन सेफ्टी वॉचडॉग उन कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा,जो अपनी कानूनी जिम्मेदारियों को व्यवस्थित रूप से निभाने में विफल रही हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक चौंकाने वाला आँकड़ा भी सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिबंध लागू होने के शुरुआती दिनों में ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लगभग 47 लाख सोशल मीडिया अकाउंट्स को या तो डिएक्टिवेट कर दिया गया या उनकी पहुँच सीमित कर दी गई। यह आँकड़ा इस बात का संकेत है कि समस्या कितनी व्यापक थी और कितने बड़े पैमाने पर नाबालिग बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर रहे थे।
हालाँकि,विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अकाउंट डिएक्टिवेशन या प्रतिबंध लगाना ही पर्याप्त नहीं है। असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे किसी भी तरह से इन प्लेटफॉर्म्स तक दोबारा पहुँच न बना सकें। इसके लिए कंपनियों को अधिक उन्नत और विश्वसनीय उम्र सत्यापन तकनीकों को अपनाना होगा।
इस कानून का उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाना है,जिनमें साइबर बुलिंग गलत जानकारी,मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाला नकारात्मक प्रभाव और अनुचित सामग्री तक पहुँच शामिल है। ऑस्ट्रेलिया सरकार का मानना है कि कम उम्र में सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।
हालाँकि,इस फैसले को लेकर कुछ आलोचनाएँ भी सामने आई हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का पूर्ण प्रतिबंध बच्चों को डिजिटल दुनिया से पूरी तरह अलग कर सकता है,जबकि आज के समय में डिजिटल साक्षरता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि संतुलित दृष्टिकोण अपनाना ज्यादा प्रभावी हो सकता है,जिसमें बच्चों को सुरक्षित तरीके से इंटरनेट का उपयोग सिखाया जाए।
फिर भी,ऑस्ट्रेलिया का यह कदम वैश्विक स्तर पर एक नई बहस को जन्म दे रहा है। कई देश अब इस मॉडल को ध्यान से देख रहे हैं और संभव है कि भविष्य में वे भी इसी तरह के सख्त नियम लागू करें। खासकर ऐसे समय में जब सोशल मीडिया का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है,बच्चों की सुरक्षा को लेकर इस तरह के कदमों की अहमियत और भी बढ़ जाती है।
ऑस्ट्रेलिया सरकार का यह सख्त रुख यह दर्शाता है कि वह बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जाँच के बाद इन प्लेटफॉर्म्स पर क्या कार्रवाई होती है और क्या वे अपनी नीतियों में बदलाव कर इस कानून का पूरी तरह पालन कर पाते हैं।
