तकनीकी खराबी के बाद कोच्चि बंदरगाह पर पहुंचा ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस लवन’ (तस्वीर क्रेडिट@ocjain4)

तकनीकी खराबी के बाद कोच्चि बंदरगाह पर पहुँचा ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस लवन’, भारत ने दी आपातकालीन डॉकिंग की अनुमति

कोच्चि,7 मार्च (युआईटीवी)- केरल के कोच्चि में शुक्रवार को एक ईरानी नौसैनिक जहाज के पहुँचने से कूटनीतिक और रणनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। ईरान के युद्धपोत ‘आईआरआईएस लवन’ को तकनीकी खराबी की वजह से भारत ने आपातकालीन आधार पर डॉकिंग की अनुमति दी। अधिकारियों के अनुसार जहाज को तत्काल मरम्मत और जाँच की आवश्यकता थी,जिसके बाद भारत सरकार ने मानवीय और तकनीकी सहायता के तहत उसे कोच्चि बंदरगाह में रुकने की अनुमति प्रदान की।

यह घटना ऐसे समय में हुई है,जब पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पहले से ही तनावपूर्ण बनी हुई है। हाल ही में एक अन्य ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस
डेना’ के डूबने की घटना ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी थी। रिपोर्टों के अनुसार यह जहाज कथित तौर पर अमेरिकी टॉरपीडो हमले का शिकार हुआ था,जिसके बाद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और भू-राजनीतिक संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई।

जानकारी के मुताबिक आईआरआईएस लवन 4 मार्च को कोच्चि पहुँचा। इससे पहले जहाज को 28 फरवरी को समुद्र में गश्त के दौरान एक तकनीकी खराबी का सामना करना पड़ा था। जहाज के अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल सहायता के लिए भारत से संपर्क किया और डॉकिंग की अनुमति माँगी। इसके बाद भारत सरकार ने इस अनुरोध पर विचार करते हुए एक मार्च को आपातकालीन अनुमति दे दी।

अधिकारियों ने बताया कि जहाज को बंदरगाह में प्रवेश करने की अनुमति मानवीय आधार पर दी गई। तकनीकी खराबी के कारण जहाज को तत्काल जाँच और मरम्मत की आवश्यकता थी,इसलिए उसे कोच्चि बंदरगाह में सुरक्षित रूप से रुकने की अनुमति प्रदान की गई। वर्तमान में जहाज की तकनीकी जाँच जारी है और विशेषज्ञ दल इसकी स्थिति का आकलन कर रहे हैं।

आईआरआईएस लवन मूल रूप से इस क्षेत्र में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय नौसैनिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आया था। यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय बेड़े की समीक्षा से जुड़ा हुआ था,जिसमें विभिन्न देशों की नौसेनाएं भाग लेती हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समुद्री सहयोग और मित्रता को बढ़ावा देना होता है।

जहाज के कोच्चि पहुँचने के बाद भारतीय नौसेना और बंदरगाह प्राधिकरणों ने चालक दल की सुरक्षा और सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ की हैं। युद्धपोत पर कुल 183 नाविक मौजूद हैं,जिनके लिए शहर में विशेष सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन नाविकों के लिए रहने,भोजन और अन्य आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था भारतीय नौसेना की ओर से की गई है।

नौसेना के अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि जहाज के चालक दल को सभी आवश्यक लॉजिस्टिक और मानवीय सहायता उपलब्ध कराई जाए। साथ ही जहाज की तकनीकी जाँच के लिए विशेषज्ञों की टीम भी तैनात की गई है,जो खराबी के कारणों का पता लगाने और मरम्मत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में लगी हुई है।

इस घटनाक्रम ने इसलिए भी ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि कुछ ही दिनों पहले आईआरआईएस डेना के डूबने की खबर सामने आई थी। उस घटना के बाद से ही क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालाँकि,इस मामले में आधिकारिक तौर पर कई पहलुओं की पुष्टि अभी बाकी है,लेकिन घटना ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक चर्चा को जन्म दिया है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर जारी बहस के बीच किसी ईरानी युद्धपोत का भारतीय बंदरगाह पर आना रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और समुद्री सुरक्षा व्यवस्थाओं पर व्यापक प्रभाव डाल सकती हैं।

हालाँकि,भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आईआरआईएस लवन को डॉकिंग की अनुमति पूरी तरह मानवीय और तकनीकी आधार पर दी गई है। भारत ने केवल एक मित्र राष्ट्र के अनुरोध पर सहायता प्रदान की है,ताकि जहाज की तकनीकी समस्या का समाधान किया जा सके और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

भारत लंबे समय से समुद्री सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय नौवहन सुरक्षा को बढ़ावा देने की नीति का पालन करता रहा है। इसी नीति के तहत आपातकालीन परिस्थितियों में विदेशी जहाजों को तकनीकी सहायता और मानवीय मदद प्रदान की जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कोच्चि जैसे रणनीतिक बंदरगाह का उपयोग इस तरह की आपात स्थितियों में करना क्षेत्रीय समुद्री सहयोग की भावना को भी दर्शाता है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और सहयोग को लेकर विभिन्न देशों के बीच संवाद और समन्वय आवश्यक है।

फिलहाल आईआरआईएस लवन कोच्चि बंदरगाह पर खड़ा है और उसकी तकनीकी जाँच जारी है। अधिकारियों के अनुसार जाँच पूरी होने के बाद जहाज की मरम्मत की जाएगी और उसके बाद ही यह तय किया जाएगा कि वह कब दोबारा समुद्र में अपनी यात्रा शुरू करेगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया है कि वैश्विक स्तर पर बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच समुद्री सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। कोच्चि में ईरानी युद्धपोत की मौजूदगी भी इसी व्यापक संदर्भ में देखी जा रही है।