नई दिल्ली,11 दिसंबर (युआईटीवी)- आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में उनकी पार्टी के अपने दम पर चुनाव लड़ने की बात को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के साथ कोई भी गठबंधन नहीं किया जाएगा। यह बयान उस समय आया जब राजनीति के गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन कर सकती हैं। हालाँकि,केजरीवाल ने इन सभी चर्चाओं को नकारते हुए कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी और कांग्रेस के साथ किसी भी प्रकार के गठबंधन की संभावना नहीं है।
अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी दी। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा,”आम आदमी पार्टी दिल्ली में अपने बलबूते पर चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के गठबंधन की संभावना नहीं है।” उनके इस बयान से यह साफ हो गया कि पार्टी का नेतृत्व दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के राजनीतिक समझौते के लिए तैयार नहीं है।
वास्तव में, कुछ समय से यह चर्चा हो रही थी कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन कर सकती हैं। यह दावा किया जा रहा था कि दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बैठक हुई है,जिसमें आम आदमी पार्टी कांग्रेस को 15 सीटें देने पर सहमत हो सकती है। इसके अलावा,यह भी कहा जा रहा था कि इस संभावित गठबंधन से दोनों दलों को दिल्ली में भाजपा के खिलाफ एक मजबूत मुकाबला करने में मदद मिल सकती है। हालाँकि,अरविंद केजरीवाल ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि कोई गठबंधन नहीं होगा।
केजरीवाल के बयान के बाद कांग्रेस की ओर से भी अपनी स्थिति स्पष्ट की गई। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा था कि कांग्रेस दिल्ली विधानसभा चुनाव में सभी 70 सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ेगी। यादव ने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी ने पिछले छह महीनों से यह स्पष्ट किया है कि वह किसी भी प्रकार के गठबंधन में नहीं जाएगी। उनका यह भी कहना था कि लोकसभा चुनाव में जिस तरह से विपक्षी दलों के साथ गठबंधन का खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा था,उसके बाद कांग्रेस को यह समझ में आ गया कि ऐसे गठबंधनों से बचना चाहिए। यादव ने कहा, “हम लगातार कह रहे हैं कि हम 70 में से 70 विधानसभा सीटों पर अपनी पूरी ताकत से चुनाव लड़ेंगे और दिल्ली की जनता को बदलाव देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक पार्टियों की तैयारियाँ पहले से ही शुरू हो चुकी हैं,जहाँ आम आदमी पार्टी ने 31 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है और वे चुनावी तैयारियों में जुटे हुए हैं, वहीं भाजपा भी अपनी चुनावी रणनीतियों पर काम कर रही है। भाजपा ने अपनी ‘परिवर्तन यात्रा’ के साथ ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत अभियान’ की शुरुआत की है,जिसके तहत पार्टी कार्यकर्ता प्रत्येक बूथ पर लोगों से संपर्क कर रहे हैं और उनका समर्थन प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही, कांग्रेस भी अपनी ‘न्याय यात्रा’ को अंतिम चरण में लेकर आ रही है,जो दिल्ली की विभिन्न सीटों पर पार्टी की स्थिति को मजबूत करने का प्रयास है।
दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य में एक दिलचस्प मोड़ यह भी है कि आम आदमी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस तीनों ही पार्टियाँ चुनावी तैयारियों में जुटी हुई हैं। तीनों दलों के बीच अपनी-अपनी चुनावी रणनीतियाँ हैं और सभी को लगता है कि 2025 का विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण होगा,जहाँ भाजपा अपनी परिवर्तन यात्रा और मजबूत बूथ अभियान के जरिए सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस अपनी न्याय यात्रा के जरिए जनता को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ,आम आदमी पार्टी ने भी अपने उम्मीदवारों का चयन कर चुनावी रणभूमि में कदम रख दिया है और पार्टी की पूरी ताकत दिल्ली की जनता से संवाद करने में लगाई जा रही है।
अरविंद केजरीवाल द्वारा गठबंधन से इनकार करने के बाद यह साफ हो गया है कि आम आदमी पार्टी आगामी चुनाव में अपनी रणनीति के अनुसार अकेले चुनाव लड़ेगी। उनका यह निर्णय उनके पार्टी के प्रति विश्वास को दर्शाता है, जहाँ उन्हें भरोसा है कि वे दिल्ली की जनता से सीधे संपर्क करके अपनी स्थिति को मजबूत कर सकते हैं। साथ ही,यह पार्टी के भीतर एकजुटता और आत्मनिर्भरता का संदेश भी देता है,जो आगामी चुनावों के संदर्भ में पार्टी के लिए एक सकारात्मक संकेत हो सकता है।
इस स्थिति के मद्देनजर,दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 का मुकाबला अब और भी रोचक हो गया है। भाजपा,कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच तीन-तरफा मुकाबला देखने को मिलेगा,जहाँ हर पार्टी अपनी-अपनी चुनावी रणनीतियाँ लेकर मैदान में है। यह चुनाव दिल्ली की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने वाला हो सकता है,जो न केवल दिल्ली,बल्कि पूरे देश में राजनीतिक हलचल पैदा करेगा।
