डेयजॉन,20 मार्च (युआईटीवी)- दक्षिण कोरिया के डेयजॉन शहर में शुक्रवार को एक कार पुर्जे बनाने वाले कारखाने में भीषण आग लगने से अफरातफरी मच गई। इस हादसे में कम से कम 50 लोग घायल हो गए,जिनमें से 35 की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार,आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते पूरा कारखाना उसकी चपेट में आ गया और वहाँ काम कर रहे कर्मचारियों को बाहर निकलने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
यह घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 1:17 बजे हुई,जब अचानक फैक्ट्री परिसर से धुआँ उठता देखा गया। शुरुआती जाँच में आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है,लेकिन माना जा रहा है कि किसी तकनीकी खराबी या ज्वलनशील सामग्री के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है। आग की तीव्रता को देखते हुए तुरंत स्थानीय दमकल विभाग को सूचना दी गई,जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया।
हालात की गंभीरता को देखते हुए नेशनल फायर एजेंसी ने देशभर से अतिरिक्त संसाधन और दमकलकर्मियों को बुलाने का आदेश जारी किया। आमतौर पर ऐसा कदम तभी उठाया जाता है,जब आग पर काबू पाना स्थानीय स्तर पर मुश्किल हो जाता है। इस आदेश के बाद कई शहरों से फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ और आपातकालीन टीमें डेयजॉन पहुँचीं और आग बुझाने के अभियान में जुट गईं।
घटना के बाद दक्षिण कोरिया के प्रधानमंत्री किम मिन-सोक ने तुरंत स्थिति का जायजा लिया और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने गृह मंत्रालय और फायर एजेंसी को आदेश दिया कि सभी उपलब्ध संसाधनों को तुरंत राहत और बचाव कार्य में लगाया जाए। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि फैक्ट्री में फँसे लोगों को जल्द-से-जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जाए और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने स्थानीय प्रशासन,विशेष रूप से डेयजॉन महानगर सरकार और पुलिस को निर्देश दिए कि वे ट्रैफिक कंट्रोल करें और आसपास के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने की व्यवस्था करें। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं में समय पर कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है और किसी भी तरह की लापरवाही से नुकसान और बढ़ सकता है।
घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है,जहाँ कई लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। राहत कार्य में लगे अधिकारियों के मुताबिक,कई कर्मचारी आग के दौरान धुएँ की वजह से बेहोश हो गए थे,जबकि कुछ लोग जलने से गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
यह पहली बार नहीं है,जब दक्षिण कोरिया में इस तरह की औद्योगिक दुर्घटना सामने आई हो। इससे पहले 14 मार्च को सियोल के जंग-गु इलाके के सोगोंग-डोंग में एक सात मंजिला इमारत में आग लग गई थी,जिसमें 10 लोग घायल हो गए थे। उस घटना में आग एक गेस्टहाउस से शुरू हुई थी और तेजी से फैल गई थी। फायर विभाग ने उस समय लेवल-1 इमरजेंसी रिस्पॉन्स जारी किया था और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया था।
इसी तरह, 10 फरवरी को ग्योंगसान क्षेत्र में एक तेल भंडारण टैंक में विस्फोट के बाद आग लगने की घटना सामने आई थी। उस हादसे में हालाँकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं थी,लेकिन इससे औद्योगिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएँ सुरक्षा मानकों के पालन और निगरानी व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को दर्शाती हैं।
डेयजॉन की इस ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा उपायों का सही तरीके से पालन किया जा रहा है या नहीं। आग जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम और नियमित जाँच बेहद जरूरी होती है,ताकि इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
फिलहाल दमकलकर्मी आग पर पूरी तरह काबू पाने की कोशिश में जुटे हुए हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आग बुझने के बाद विस्तृत जाँच की जाएगी,ताकि हादसे के असली कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
डेयजॉन में हुई यह घटना न केवल एक बड़ा औद्योगिक हादसा है,बल्कि यह सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की भी माँग करती है। सरकार और संबंधित एजेंसियों के सामने अब चुनौती यह है कि वे न केवल इस घटना से प्रभावी ढंग से निपटें,बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम भी उठाएँ।
