नई दिल्ली,31 दिसंबर (युआईटीवी)- भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में साल 2025 हमेशा याद किया जाएगा और इस यादगार सफर के केंद्र में रहीं ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा। भारत ने पहली बार वनडे विश्व कप का खिताब जीता,महिला क्रिकेट के मानचित्र पर अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया और इस सपने को साकार करने में दीप्ति ने बल्ले और गेंद दोनों से ऐसी छाप छोड़ी,जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गई। यह वह साल था,जब उन्होंने न सिर्फ रिकॉर्ड तोड़े,बल्कि नए मानक तय किए और अब 2026 उनके लिए एक और बड़े अध्याय की शुरुआत बनने जा रहा है।
2 नवंबर 2025 को खेला गया वनडे विश्व कप का फाइनल भारतीय महिला क्रिकेट इतिहास का सबसे भावनात्मक और रोमांचक मैच साबित हुआ। दक्षिण अफ्रीका जैसी सशक्त टीम के खिलाफ भारत का मुकाबला दबाव और उम्मीदों के बीच खेला गया। शुरुआती झटकों से उबरते हुए भारत की पारी को सँभालने का जिम्मा जब दीप्ति के कंधों पर आया,तो उन्होंने धैर्य,संयम और क्लास का वह उदाहरण पेश किया जिसकी भारतीय दर्शक लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे। 58 रन की जिम्मेदार पारी ने टीम के लिए मंच तैयार किया और महत्वपूर्ण मौकों पर लगाए गए बाउंड्री ने विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा।
लेकिन दीप्ति का योगदान यहीं तक सीमित नहीं था। गेंदबाजी में मोर्चा सँभालते हुए उन्होंने फाइनल में पाँच विकेट झटके और दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजी क्रम को झकझोर दिया। उनके सटीक लाइन-लेंथ और विविधताओं के सामने विपक्षी बल्लेबाज लगातार उलझते रहे। इस ऑलराउंड प्रदर्शन ने न सिर्फ मैच को भारत की ओर मोड़ दिया,बल्कि देशभर के क्रिकेटप्रेमियों के दिलों में उनके लिए एक विशेष जगह भी बना दी।
पूरे टूर्नामेंट में दीप्ति ने जिस तरह का खेल दिखाया,उसने उन्हें एक अलग ही ऊँचाई पर पहुँचा दिया। 22 विकेट और 215 रन—ये आँकड़ें सिर्फ एक खिलाड़ी के योगदान का प्रमाण नहीं,बल्कि टीम के आत्मविश्वास की कहानी भी कहते हैं। यही कारण है कि उन्हें टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया और इस सम्मान को पाने वाली वह पहली भारतीय महिला क्रिकेटर बन गईं। यह उपलब्धि भारतीय महिला क्रिकेट के उस सफर का प्रतीक बन गई,जो मुश्किलों और संघर्षों के बीच नई ऊँचाइयों को छू रहा है।
विश्व कप की ऐतिहासिक जीत के बाद महिला प्रीमियर लीग 2026 की नीलामी ने दीप्ति के करियर में एक और अनोखा अध्याय जोड़ दिया। यूपी वॉरियर्ज ने ‘राइट टू मैच’ कार्ड का इस्तेमाल करते हुए उन्हें 3.20 करोड़ रुपये में अपनी टीम के साथ बनाए रखा। यह लीग के इतिहास में पहली बार हुआ,जब किसी खिलाड़ी के लिए आरटीएम का उपयोग किया गया। इससे साफ है कि फ्रेंचाइज़ी न सिर्फ उनके कौशल को पहचानती है,बल्कि टीम की रणनीति में उन्हें केंद्र में रखकर आगे बढ़ना चाहती है। यह भरोसा दीप्ति के निरंतर प्रदर्शन,फिटनेस और मैच-विनिंग मानसिकता का नतीजा है।
दीप्ति शर्मा का सफर केवल ट्रॉफियों और रिकॉर्ड्स तक सीमित नहीं है। वह मैदान पर नेतृत्व,शांत स्वभाव और मुश्किल समय में सही निर्णय लेने के लिए भी जानी जाती हैं। युवा खिलाड़ियों के लिए उनका अनुभव और मार्गदर्शन किसी पाठशाला की तरह है। अक्सर मैच के बाद बातचीत में वह टीम को आगे रखने,सामूहिक प्रयास की बात करने और मेहनत को ही सफलता की कुंजी बताने पर जोर देती हैं। यह विनम्रता और प्रोफेशनलिज़्म उन्हें सिर्फ एक स्टार नहीं,बल्कि एक रोल मॉडल बनाता है।
अब जब वह 2026 में प्रवेश कर रही हैं,तो उनके सामने नए लक्ष्य और नई चुनौतियाँ होंगी। टी20 प्रारूप में वह दुनिया की नंबर वन गेंदबाज के रूप में कदम रखेंगी,साथ ही इस फॉर्मेट की सबसे सफल गेंदबाजों में उनकी गिनती होगी। बदलते हालात,नई रणनीतियाँ और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच दीप्ति के लिए निरंतरता बनाए रखना आसान नहीं होगा,लेकिन 2025 के उनके प्रदर्शन ने यह विश्वास जगा दिया है कि वह इन चुनौतियों को अवसर में बदलना जानती हैं।
भारतीय क्रिकेट के लिए यह दौर इसलिए भी खास है क्योंकि महिला टीम अब सिर्फ उम्मीदों की नहीं,बल्कि उपलब्धियों की पहचान बन चुकी है। स्टेडियम से लेकर घरों तक,हर जगह इस टीम के लिए समर्थन और उत्साह देखा जा सकता है और इस भावनात्मक जुड़ाव के केंद्र में जब एक ऐसी खिलाड़ी खड़ी हो,जिसने विश्व चैंपियन बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई हो,तो उम्मीदें और भी बढ़ जाती हैं।
कहानी अभी बाकी है,लेकिन इतना तय है कि 2025 ने दीप्ति शर्मा को भारतीय खेल इतिहास में एक स्थायी स्थान दिला दिया है। उनकी बदौलत करोड़ों प्रशंसकों ने उस पल को महसूस किया,जिसे वे दशकों से देखने का सपना देख रहे थे। अब पूरा देश उत्सुकता से देखना चाहता है कि 2026 और उसके बाद दीप्ति किस तरह नए कीर्तिमान गढ़ती हैं। यदि उनका जुनून, मेहनत और आत्मविश्वास इसी तरह कायम रहा,तो आने वाले सालों में भारतीय महिला क्रिकेट का स्वर्णिम अध्याय और भी चमकदार होने वाला है।
