दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (तस्वीर क्रेडिट@GaganPratapMath)

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर जनसुनवाई के दौरान हमला,भाजपा नेताओं ने बताया कायराना कृत्य,विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली,20 अगस्त (युआईटीवी)- दिल्ली की राजनीति में बुधवार का दिन तब अचानक गरमा गया,जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर जनसुनवाई के दौरान हमला किया गया। इस घटना ने न केवल राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए,बल्कि राजनीतिक दलों के बीच नए आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू कर दिया। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस हमले को विपक्ष की “कायराना हरकत” करार दिया,वहीं दिल्ली सरकार के मंत्रियों ने इसे जनसेवा और लोकप्रियता से डरी विपक्षी ताकतों की साजिश बताया।

घटना के तुरंत बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का जनता से निडर जुड़ाव और जनसेवा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता विपक्ष को बेचैन कर रही है। सिरसा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “मैं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर जनसुनवाई के दौरान हुए कायराना हमले की कड़ी निंदा करता हूँ। जनता से उनका निडर जुड़ाव और जनसेवा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता विपक्ष को स्पष्ट रूप से बेचैन करती है,जो इस तरह के शर्मनाक हथकंडे अपना रहा है। मैं उनकी शक्ति, सुरक्षा और शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।”

सिरसा की इस प्रतिक्रिया के तुरंत बाद भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी सोशल मीडिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रेखा गुप्ता दिल्ली की बेहद लोकप्रिय मुख्यमंत्री हैं और इस लोकप्रियता से विपक्ष घबराया हुआ है। भंडारी ने लिखा, “क्या यह प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक गुट के लोगों की तरफ से जनसुनवाई को रोकने की एक पूर्व नियोजित साजिश थी? इसकी पूरी जानकारी जाँच के बाद ही सामने आएगी,लेकिन यह साफ है कि जनता से सीधा संवाद विपक्ष को रास नहीं आ रहा है।”

वहीं,दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने इस घटना को अक्षम्य अपराध बताया। उन्होंने कहा कि एक महिला मुख्यमंत्री,जो रात-दिन दिल्ली की सेवा में जुटी है,उन पर हमला करने वाले और करवाने वाले दोनों ही कायर और अपराधी हैं। कपिल मिश्रा ने एक्स पर लिखा, “मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमला अक्षम्य अपराध है। एक महिला,एक बेटी,जो दिन-रात सिर्फ दिल्ली की सेवा में लगी है,उन पर हमला करने वाले और करवाने वाले दोनों कायर और अपराधी हैं। ऐसे अपराधियों में इतनी हिम्मत नहीं कि वे तर्क और तथ्यों के आधार पर बहस कर सकें।”

कपिल मिश्रा ने आगे एक और पोस्ट में लिखा, “जनसुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री पर हमले की कोशिश विपक्ष की कायराना हरकत है। जो आयुष्मान कार्ड से,देवी बसों से,सुधरते सीवर सिस्टम से और साफ होती यमुना से डर रहे हैं,वो अब ऐसे हथकंडे अपना रहे हैं,लेकिन जनता के जनादेश से बनी संकल्पित सरकार दिल्ली के विकास की खातिर न झुकेगी और न रुकेगी।”

भाजपा नेता तजिंदर सिंह बग्गा ने भी मुख्यमंत्री पर हुए हमले पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने लिखा, “आज जनसुनवाई के दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री पर हुए हमले से स्तब्ध हूँ। उनकी सुरक्षा और शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूँ। बजरंग बली कृपा करें।”

इस घटना ने जहाँ मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए,वहीं यह भी साफ कर दिया कि दिल्ली की राजनीति में तनाव का स्तर कितना बढ़ चुका है। विपक्षी दल जहाँ सरकार की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठा रहे हैं,वहीं भाजपा के नेताओं का मानना है कि रेखा गुप्ता की बढ़ती लोकप्रियता और उनके फैसलों से विपक्ष असहज महसूस कर रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य,परिवहन,जल निकासी और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर जो योजनाएँ लागू की हैं,वे आम जनता के बीच व्यापक समर्थन जुटाने में सफल रही हैं। यही वजह है कि उनकी जनसुनवाई में भारी संख्या में लोग पहुँचते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री पर हुआ हमला केवल एक सुरक्षा चूक नहीं बल्कि राजधानी की सियासत में बढ़ते टकराव का भी प्रतीक है। भाजपा नेताओं का यह आरोप कि विपक्ष लोकप्रियता से घबराकर ऐसे हथकंडे अपना रहा है,दिल्ली की सियासत को और तीखा बना सकता है। वहीं विपक्ष की ओर से इस हमले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जनता के बीच भी इस घटना को लेकर गुस्सा और चिंता दोनों ही देखने को मिले। आम लोगों का मानना है कि लोकतंत्र में इस तरह की हिंसक कोशिशें बेहद निंदनीय हैं और नेताओं के बीच असहमति का जवाब हिंसा से नहीं दिया जा सकता। सुरक्षा एजेंसियाँ अब इस घटना की जाँच में जुट गई हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर हमला करने वालों के पीछे कौन लोग थे और उनकी मंशा क्या थी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमला सिर्फ एक व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर चोट के रूप में देखा जा रहा है। दिल्ली के नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएँ यह साबित करती हैं कि राजधानी की राजनीति आने वाले दिनों में और भी गरमाने वाली है। अब देखने वाली बात होगी कि जाँच में क्या सामने आता है और क्या वास्तव में यह विपक्ष की कोई साजिश थी या फिर कोई और वजह,लेकिन इतना निश्चित है कि इस घटना ने दिल्ली की सियासत में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है।