नई दिल्ली,20 अगस्त (युआईटीवी)- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुए हमले ने पूरे राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना की न केवल दिल्ली बल्कि देशभर में कड़ी निंदा हो रही है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है और यही बात सभी राजनीतिक दलों और नेताओं ने अपने बयानों में दोहराई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुआ हमला बेहद निंदनीय है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद और विचारों का विरोध स्वीकार्य है,लेकिन हिंसा किसी भी रूप में मंजूर नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की आत्मा ही असहमति को स्वीकार करना है और जब इस असहमति को दबाने के लिए हिंसा का सहारा लिया जाता है,तो यह पूरे लोकतंत्र पर हमला होता है। केजरीवाल ने आगे कहा कि उन्हें विश्वास है कि दिल्ली पुलिस इस मामले में उचित और सख्त कार्रवाई करेगी और दोषी को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अच्छे स्वास्थ्य और शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
इसी तरह आम आदमी पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और सभ्य समाज में हिंसा की कोई जगह नहीं है। हर प्रकार की हिंसा केवल निंदनीय होती है और उसका कोई औचित्य नहीं हो सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी राजनीतिक दल इस विचार का अनुसरण करेंगे और एक स्वर में हिंसा का विरोध करेंगे। भारद्वाज ने यह भी कहा कि इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं और पुलिस को इससे सबक लेकर आगे की रणनीति बनानी चाहिए।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुआ हमला बेहद निंदनीय है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचारों का मतभेद और विरोध स्वीकार्य है, लेकिन हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता।
मुझे विश्वास है कि दिल्ली पुलिस उचित कार्रवाई करेगी। आशा है कि मुख्यमंत्री पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हों।
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 20, 2025
आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा कि किसी भी सभ्य समाज में हिंसा का कोई स्थान नहीं होता। उन्होंने इस हमले को केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रहार बताया। प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि जब लोकतंत्र में सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति सुरक्षित नहीं है,तो आम जनता की सुरक्षा को लेकर प्रश्नचिह्न खड़े होना स्वाभाविक है।
यह घटना तब हुई,जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अपने नियमित कार्यक्रम के तहत जनसुनवाई कर रही थीं। हर बुधवार की तरह वे राजनिवास मार्ग स्थित कैंप ऑफिस में सुबह सात बजे से जनता की समस्याएँ सुन रही थीं। इसी दौरान सुबह करीब आठ बजे आरोपी मुख्यमंत्री के पास पहुँचा और अचानक उन पर हमला कर दिया। घटना से वहाँ मौजूद लोग दहशत में आ गए। सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल आरोपी को काबू में किया और पुलिस को सौंप दिया। मुख्यमंत्री को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया,जहाँ उनका इलाज चल रहा है।
दिल्ली पुलिस ने आरोपी की पहचान गुजरात के राजकोट निवासी राजेश भाई खिमजी भाई सकारिया के रूप में की है। आरोपी की उम्र 41 साल बताई जा रही है। पुलिस हमले के कारणों का पता लगाने के लिए उससे लगातार पूछताछ कर रही है। सूत्रों के अनुसार,दिल्ली पुलिस ने गुजरात पुलिस से भी संपर्क साधा है,ताकि आरोपी की पृष्ठभूमि और संभावित उद्देश्यों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। शुरुआती जाँच में यह सामने आया है कि आरोपी मानसिक रूप से तनावग्रस्त था,लेकिन पुलिस अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले गहन पूछताछ कर रही है।
घटना के बाद मुख्यमंत्री आवास और कैंप ऑफिस की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और सिविल लाइंस थाने में पूरे मामले की विस्तृत जाँच चल रही है। पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) भी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के आवास पर पहुँचे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। सूत्रों के मुताबिक,मुख्यमंत्री डॉक्टरों की निगरानी में हैं और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
यह हमला केवल राजनीतिक स्तर पर ही नहीं,बल्कि आम नागरिकों में भी गहरी चिंता का विषय बन गया है। लोग सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रियाएँ देते हुए कह रहे हैं कि यदि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति सुरक्षित नहीं हैं,तो साधारण नागरिकों की सुरक्षा का भरोसा कैसे दिया जा सकता है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना लोकतांत्रिक व्यवस्था में सहिष्णुता और शांति की कमी को दर्शाती है और यह कि राजनीतिक असहमति को हिंसा का रूप देना बेहद खतरनाक संकेत है।
इस घटना ने राजनीतिक दलों के बीच भले ही असहमति को कुछ समय के लिए किनारे रख दिया हो,लेकिन यह भी साफ है कि इस हमले के राजनीतिक मायने भी निकाले जाएँगे। विपक्षी दल इसे सुरक्षा व्यवस्था की विफलता के तौर पर पेश कर सकते हैं,जबकि सरकार इस पर त्वरित कार्रवाई कर अपनी सख्ती और जिम्मेदारी को दिखाने की कोशिश करेगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुआ यह हमला केवल एक व्यक्ति पर आक्रामकता नहीं है,बल्कि लोकतांत्रिक प्रणाली पर गहरा प्रहार है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि लोकतंत्र की असली ताकत संवाद और सहिष्णुता में है,न कि हिंसा में। अब देखना होगा कि पुलिस की जाँच से इस घटना की सच्चाई कब सामने आती है और आरोपी के इरादों के पीछे की वास्तविक वजह क्या थी। फिलहाल पूरे देश की निगाहें मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य और इस मामले की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
