नई दिल्ली,27 फरवरी (युआईटीवी)- दिल्ली की कथित शराब नीति से जुड़े केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) मामले में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को अदालत से बड़ी राहत मिली है। अदालत द्वारा बरी किए जाने के बाद सिसोदिया ने इसे सत्य की जीत बताते हुए कहा कि आज यह साबित हो गया है कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया कट्टर ईमानदार हैं। फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं में उत्साह का माहौल है और उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश पर न्यायिक मुहर लगने जैसा करार दिया है।
मनीष सिसोदिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “सत्यमेव जयते। आज एक बार फिर बाबा साहेब अंबेडकर की दूरदर्शी सोच और उनके बनाए संविधान पर फख्र महसूस हो रहा है। भाजपा और सारी एजेंसियों की हमें बेईमान साबित करने की तमाम कोशिशों के बावजूद आज साबित हो गया कि अरविंद केजरीवाल-मनीष सिसोदिया कट्टर ईमानदार हैं।” उनके इस बयान को पार्टी कार्यकर्ताओं ने व्यापक रूप से साझा किया और इसे न्यायपालिका में विश्वास की पुनर्स्थापना के रूप में प्रस्तुत किया।
इस फैसले के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सच की हमेशा जीत होती है। अपने ‘एक्स’ पोस्ट में उन्होंने लिखा कि अदालत के इस फैसले ने सच्चाई को सबके सामने ला दिया है और समय के साथ बाकी मामलों की सच्चाई भी सामने आ जाएगी। मान ने इस फैसले को आम आदमी पार्टी की नीतियों और नेतृत्व की ईमानदारी की पुष्टि बताया।
राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी अदालत के निर्णय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कोर्ट ने उनके नेताओं को बरी कर दिया और इससे यह साबित हो गया कि देश की सत्ता पर एक खतरनाक षड्यंत्रकारी सोच हावी है,जिसने साजिश के तहत पार्टी के शीर्ष नेताओं को बदनाम करने का प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके नेताओं को जेल में यातनाएँ दी गईं और राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई की गई। संजय सिंह ने कहा कि यह फैसला उन सभी लोगों के लिए जवाब है,जिन्होंने आम आदमी पार्टी की ईमानदारी पर सवाल उठाए थे।
पार्टी नेता सुशील गुप्ता ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सत्य अडिग होता है और झूठ के पैर नहीं होते। उन्होंने इसे सत्य की जीत करार देते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल ने हमेशा ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ देश की सेवा की है। उनके अनुसार अदालत का निर्णय यह दर्शाता है कि झूठे आरोपों के आधार पर किसी की छवि को लंबे समय तक धूमिल नहीं किया जा सकता।
पंजाब सरकार में मंत्री अमन अरोड़ा ने भी फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि न्याय में देरी हो सकती है,लेकिन न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि दिल्ली के तथाकथित शराब घोटाले को लेकर जो आरोप लगाए गए थे,वे मनगढ़ंत और झूठे साबित हुए हैं। अरोड़ा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की एजेंसियों ने आम आदमी पार्टी की ईमानदार राजनीति को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की थी। उन्होंने कहा कि देश की जनता आने वाले दिनों में साजिश करने वालों को मुँहतोड़ जवाब देगी।
गौरतलब है कि दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति को लेकर सीबीआई और अन्य केंद्रीय एजेंसियों ने जाँच शुरू की थी। इस मामले में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। मनीष सिसोदिया को इस मामले में गिरफ्तार भी किया गया था और उन्होंने लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में समय बिताया। आम आदमी पार्टी लगातार इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताती रही है और दावा करती रही है कि यह कार्रवाई विपक्षी दलों को निशाना बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
अदालत के फैसले के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने इसे बड़ी नैतिक और राजनीतिक जीत के रूप में देखा है। दिल्ली और पंजाब में पार्टी कार्यालयों के बाहर समर्थकों ने खुशी जाहिर की और नारे लगाए। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह फैसला न केवल व्यक्तिगत राहत है,बल्कि उनकी राजनीतिक विचारधारा की भी पुष्टि है।
हालाँकि,इस पूरे प्रकरण पर विपक्षी दलों की ओर से अब तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है,लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आने वाले चुनावी समीकरणों पर असर डाल सकता है। आम आदमी पार्टी इसे अपने पक्ष में जनसमर्थन जुटाने के अवसर के रूप में देख सकती है।
दिल्ली शराब नीति से जुड़े इस मामले में अदालत का फैसला आम आदमी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है। मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल के समर्थकों का मानना है कि इससे उनकी छवि को मजबूती मिलेगी,जबकि आलोचकों की निगाहें अब आगे की कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हैं। फिलहाल,पार्टी नेतृत्व इसे न्याय और सत्य की जीत के रूप में पेश कर रहा है और आगे की राजनीतिक रणनीति बनाने में जुट गया है।
