मुंबई,23 मार्च (युआईटीवी)- बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है और लगातार नए रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रही है। फिल्म को दर्शकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है,जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि यह अपने पहले पार्ट धुरंधर की सफलता को भी पीछे छोड़ सकती है। जहाँ पहला भाग एक महीने तक सिनेमाघरों में छाया रहा था,वहीं दूसरा भाग उससे भी ज्यादा मजबूत पकड़ बनाता नजर आ रहा है।
फिल्म की कहानी,एक्शन और इमोशनल गहराई ने दर्शकों को काफी प्रभावित किया है। हालाँकि,इस फिल्म से जुड़ी एक ऐसी जानकारी सामने आई है,जिसने न केवल दर्शकों बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को भी भावुक कर दिया है। दरअसल,फिल्म में मुंबई के 26/11 आतंकी हमले से जुड़ा एक सीन शूट किया गया था,जिसे फिल्माते वक्त सेट पर माहौल बेहद गंभीर और भावुक हो गया था।
इस सीन में अर्जुन रामपाल और अक्षय खन्ना ने अपने किरदारों के जरिए दुश्मन देश के एजेंट और अपराधी की भूमिका निभाई है। अर्जुन रामपाल फिल्म में मेजर इकबाल का किरदार निभा रहे हैं,जो आईएसआई से जुड़ा एक अहम चेहरा है,जबकि अक्षय खन्ना ने एक खतरनाक डॉन की भूमिका निभाई है। सीन के मुताबिक,जब मुंबई पर हमला होता है, तो उनके किरदार खुशी जाहिर करते हैं,जबकि रणवीर सिंह का किरदार अपने गुस्से और दर्द को दबाकर प्रतिक्रिया देता है।
लेकिन जैसे ही इस सीन की शूटिंग पूरी हुई और ‘कट’ बोला गया,सेट पर कुछ ऐसा हुआ,जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। अर्जुन रामपाल और अक्षय खन्ना दोनों ही अपने भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और फूट-फूट कर रोने लगे। दरअसल,यह सीन केवल अभिनय नहीं था,बल्कि उस त्रासदी की याद दिलाने वाला था,जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। दोनों कलाकारों ने उस दर्द को इतनी गहराई से महसूस किया कि वे खुद भावुक हो उठे।
इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा फिल्म में अहम भूमिका निभा रहे आर. माधवन ने एक इंटरव्यू के दौरान किया। उन्होंने बताया कि सीन के खत्म होते ही सेट पर एक अजीब सी खामोशी छा गई थी। सभी लोग भावुक थे और माहौल बेहद भारी हो गया था। माधवन के अनुसार,यह स्वाभाविक भी था क्योंकि हम सभी भारतीय हैं और उस दर्द से किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि कलाकारों के लिए ऐसे किरदार निभाना मानसिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
फिल्म में पाकिस्तानी किरदार निभाना कलाकारों के लिए आसान नहीं था। पर्दे पर भले ही यह एक कहानी के रूप में दिखता है,लेकिन इसके पीछे कलाकारों को अपने भावनाओं को नियंत्रित करना पड़ता है। देशभक्ति और संवेदनशील विषयों पर आधारित फिल्मों में अभिनय करना अक्सर कलाकारों के लिए एक भावनात्मक परीक्षा बन जाता है और ‘धुरंधर 2’ इसका एक स्पष्ट उदाहरण है।
फिल्म के निर्माण की बात करें तो यह सफर भी किसी संघर्ष से कम नहीं था। निर्देशक आदित्य धर ने इस फिल्म के लिए लगभग दो साल तक रिसर्च की थी। उन्होंने कहानी को वास्तविकता के करीब लाने के लिए हर पहलू पर गहराई से काम किया। इस लंबे रिसर्च के कारण फिल्म का बजट भी काफी बढ़ गया,जिससे निवेशकों को जुटाना एक बड़ी चुनौती बन गया था।
बताया जाता है कि फिल्म को फाइनल रूप देने में लगभग तीन साल का समय लगा। इस दौरान मेकर्स को कई आर्थिक और तकनीकी मुश्किलों का सामना करना पड़ा,लेकिन अंततः उनकी मेहनत रंग लाई और फिल्म को बड़े पर्दे पर उतारा गया। आज यही फिल्म दर्शकों के दिलों पर राज कर रही है और हिंदी सिनेमा में एक नया मानक स्थापित कर रही है।
‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ केवल एक एक्शन फिल्म नहीं है,बल्कि यह भावनाओं,देशभक्ति और मानवीय संवेदनाओं का एक संगम है। फिल्म ने यह साबित कर दिया है कि जब कहानी मजबूत हो और कलाकार अपने किरदार में पूरी तरह डूब जाएँ,तो वह दर्शकों के दिल तक पहुँचने में सफल होती है।
सोशल मीडिया पर भी फिल्म से जुड़े वीडियो और इंटरव्यू तेजी से वायरल हो रहे हैं। खासकर वह क्लिप,जिसमें माधवन इस सीन के बाद की स्थिति का जिक्र करते हैं,लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। दर्शक न केवल फिल्म की सराहना कर रहे हैं,बल्कि कलाकारों के समर्पण और मेहनत की भी जमकर तारीफ कर रहे हैं।
‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ ने यह साबित कर दिया है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है,बल्कि यह समाज और भावनाओं का आईना भी है। इस फिल्म की सफलता और इससे जुड़ी कहानियाँ आने वाले समय में भी लंबे समय तक याद की जाएँगी।
