नई दिल्ली,22 फरवरी (युआईटीवी)- यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) ने भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को एक नया आयाम दिया है और यह देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वित्त वर्ष 24 में भारत में हुए कुल पाँच डिजिटल लेनदेन में से चार यूपीआई के माध्यम से किए गए हैं। इस समय देश के डिजिटल लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी बढ़कर 84 प्रतिशत तक पहुँच गई है। यह आँकड़ा यूपीआई की बढ़ती लोकप्रियता और उपयोगिता को दर्शाता है।
फिनटेक कंसल्टिंग और एडवाइजरी फर्म,द डिजिटल फिफ्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार,यूपीआई अब सिर्फ एक पेमेंट सिस्टम नहीं रहा,बल्कि यह भारत के लिए एक समग्र इकोसिस्टम के रूप में काम कर रहा है। यूपीआई के प्रभाव और बढ़ती उपयोगिता के कारण भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। रिपोर्ट के मुताबिक,यूपीआई प्रति माह लगभग 16 अरब लेनदेन को हैंडल करता है और इसके 2030 तक तीन गुना बढ़ने का अनुमान है।
द डिजिटल फिफ्थ के संस्थापक और सीईओ समीर सिंह जैनी ने इस बारे में कहा कि यूपीआई के माध्यम से किए गए लेनदेन में निरंतर वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि, “यूपीआई ने अपने बुनियादी ढाँचे के तहत तेज और सुरक्षित भुगतान प्रणाली को स्थापित किया है। इसके साथ ही रियल-टाइम में धोखाधड़ी का पता लगाना,क्लाउड-नेटिव आर्किटेक्चर और स्केलेबल,डुअल-कोर स्विच की आवश्यकता और महत्व भी बढ़ गए हैं,ताकि डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित और फेल-प्रूफ बनाया जा सके।”
2021 से 2024 के बीच यूपीआई के लेनदेन में चार गुना वृद्धि देखी गई है। यूपीआई की बढ़ती लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसके तेज,सुरक्षित और आसानी से उपयोग में आने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित होना है। 2024 तक यह लेनदेन की संख्या 172 अरब तक पहुँच चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार,यूपीआई की हिस्सेदारी देश के कुल डिजिटल लेनदेन में लगातार बढ़ रही है और अब यह कार्ड-आधारित तथा वॉलेट लेनदेन को पीछे छोड़ चुका है।
इसके अतिरिक्त,मर्चेंट-टू-कस्टमर (एम2सी) सेगमेंट भी तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट में यह कहा गया कि मर्चेंट-टू-कस्टमर सेगमेंट में 67 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर पाई गई है, जबकि पीयर-टू-पीयर (पी2पी) लेनदेन की तुलना में यह अधिक तेजी से बढ़ा है। इसके परिणामस्वरूप,यूपीआई से जुड़े मर्चेंट्स की संख्या 3 करोड़ से अधिक हो गई है। मर्चेंट-टू-कस्टमर लेनदेन का तेजी से बढ़ना यह दर्शाता है कि यूपीआई अब केवल व्यक्तिगत लेनदेन तक सीमित नहीं है,बल्कि व्यवसायों और व्यापारियों के बीच भी यह एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
इसके अलावा,रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत के डिजिटल भुगतान में यूपीआई की हिस्सेदारी 2019 में 34 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 83 प्रतिशत से अधिक हो गई है। यूपीआई के माध्यम से होने वाले लेनदेन का कुल वॉल्यूम 2018 में 375 करोड़ से बढ़कर 2024 में 17,221 करोड़ हो गया है,जबकि यूपीआई के माध्यम से किए गए लेनदेन का कुल मूल्य 2018 में 5.86 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 246.83 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इस प्रकार,यूपीआई ने न केवल लेनदेन की संख्या में वृद्धि की है,बल्कि इसके द्वारा किए गए लेनदेन का कुल मूल्य भी बहुत तेजी से बढ़ा है।
यूपीआई के माध्यम से किए जाने वाले लेनदेन की यह वृद्धि भारत के डिजिटल भुगतान इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ-साथ इसके उपयोगकर्ताओं के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित विकल्प प्रदान करती है। यह भारत में वित्तीय समावेशन को बढ़ाने के साथ-साथ छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए भी एक सशक्त वित्तीय सिस्टम स्थापित कर रही है।
समूहों और व्यक्तियों के बीच लेनदेन में यूपीआई के प्रभाव और इसकी बढ़ती पहुँच से यह स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में यूपीआई का दायरा और भी बढ़ने वाला है। यह केवल एक डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म नहीं,बल्कि देश की वित्तीय प्रणाली में सुधार लाने का एक प्रमुख साधन बन चुका है।
यूपीआई की सफलता को देखते हुए इसे और भी अधिक मजबूत बनाने के लिए विभिन्न तकनीकी उपायों को लागू किया जा रहा है,ताकि यह पेमेंट सिस्टम अधिक सुरक्षित,स्केलेबल और तेज हो सके। इसके माध्यम से किए गए लेनदेन के बढ़ते आँकड़े यह साबित करते हैं कि यूपीआई न केवल एक सुविधा है,बल्कि एक महत्वपूर्ण वित्तीय साधन बन चुका है,जिसे देश के हर वर्ग में स्वीकार किया जा रहा है।

