नई दिल्ली,21 फरवरी (युआईटीवी)- नई दिल्ली में शुक्रवार को महत्वपूर्ण कूटनीतिक गतिविधियां देखने को मिलीं,जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ नवीनचंद्र रामगुलाम और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायका से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका,क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक दक्षिण के साथ सहयोग को नई दिशा देने के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार,दोनों बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा के साथ-साथ उभरती प्रौद्योगिकियों,कनेक्टिविटी और सतत विकास पर विशेष जोर दिया गया।
मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम ने नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने भारत और मॉरीशस के बीच उन्नत रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की। विदेश मंत्रालय ने बताया कि व्यापार एवं निवेश,समुद्री सुरक्षा,स्वास्थ्य,शिक्षा और डिजिटल सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच बहुआयामी जुड़ाव लगातार मजबूत हो रहा है। बैठक में यह भी स्वीकार किया गया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में उभरती प्रौद्योगिकियों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है,इसलिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार-आधारित क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देने की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने मॉरीशस को भारत की विकास साझेदारी का एक आदर्श भागीदार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और प्रगति के प्रति साझा प्रतिबद्धता संबंधों को विशेष बनाती है। भारत द्वारा मॉरीशस की विकास प्राथमिकताओं के समर्थन में दिए गए विशेष आर्थिक पैकेज के कार्यान्वयन की भी समीक्षा की गई। इस पैकेज के माध्यम से बुनियादी ढाँचे,स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक विकास से जुड़े कई परियोजनाओं को समर्थन मिल रहा है। दोनों नेताओं ने इस बात पर संतोष जताया कि इन पहलों से मॉरीशस के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को मजबूती मिल रही है।
बैठक के दौरान ‘विजन महासागर’ और पड़ोसी देशों को प्राथमिकता देने की भारत की नीति का भी उल्लेख हुआ। इस नीति के तहत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति,स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री रामगुलाम ने भारत-मॉरीशस साझेदारी के चिरस्थायी महत्व की पुष्टि करते हुए कहा कि यह संबंध केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं है,बल्कि वैश्विक दक्षिण की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि वे हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायका से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय के अनुसार,दोनों नेताओं ने हाल की उच्च स्तरीय यात्राओं के बाद शुरू की गई द्विपक्षीय पहलों में हुई प्रगति की समीक्षा की। अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की श्रीलंका की राजकीय यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया था। उस यात्रा के दौरान कई समझौतों और परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार की गई थी,जिनके क्रियान्वयन की स्थिति पर इस बैठक में चर्चा हुई।
भारत और श्रीलंका के बीच भौतिक,डिजिटल और ऊर्जा कनेक्टिविटी को संबंधों के प्रमुख स्तंभ के रूप में रेखांकित किया गया। दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि क्षेत्रीय विकास और आर्थिक एकीकरण के लिए इन क्षेत्रों में सहयोग को और तेज किया जाना चाहिए। डिजिटल बुनियादी ढाँचे और ऊर्जा ग्रिड कनेक्टिविटी जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ,जिनसे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई दिशा मिल सकती है।
प्रौद्योगिकी की भूमिका को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति दिसानायका ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग में तालमेल बढ़ाने पर भी चर्चा की। यह माना गया कि एआई जैसे उभरते क्षेत्र शिक्षा,स्वास्थ्य,कृषि और आपदा प्रबंधन में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच ज्ञान-साझेदारी और संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देना समय की माँग है।
राष्ट्रपति दिसानायका ने चक्रवात दितवाह के बाद भारत द्वारा दिए गए त्वरित और बिना शर्त समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में भारत का सहयोग दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और मित्रता को दर्शाता है। भारत ने मानवीय सहायता,राहत सामग्री और पुनर्वास समर्थन के माध्यम से श्रीलंका की मदद की थी,जिसे वहाँ व्यापक सराहना मिली।
बैठक में सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों का भी विशेष उल्लेख हुआ। श्रीलंका में हाल ही में आयोजित पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की प्रदर्शनी की सफलता का दोनों नेताओं ने स्वागत किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव भारत-श्रीलंका संबंधों को विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं। बौद्ध विरासत और धार्मिक आदान-प्रदान दोनों देशों के लोगों के बीच आत्मीयता को और सुदृढ़ करते हैं।
दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि श्रीलंका की सतत विकासात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने में भारत निरंतर सहयोग देता रहेगा। साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त प्रयासों को और आगे बढ़ाया जाएगा। समुद्री सुरक्षा,आपदा प्रबंधन और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया।
विश्लेषकों का मानना है कि मॉरीशस और श्रीलंका के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी की ये मुलाकातें हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करती हैं। चीन की बढ़ती सक्रियता और वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बीच भारत अपने पारंपरिक साझेदार देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। मॉरीशस और श्रीलंका दोनों ही इस क्षेत्र में भारत के महत्वपूर्ण साझेदार हैं,जिनके साथ सहयोग न केवल आर्थिक,बल्कि सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली में हुई इन बैठकों ने यह संकेत दिया है कि भारत उभरती प्रौद्योगिकियों,कनेक्टिविटी और विकास सहयोग को अपनी विदेश नीति के केंद्र में रख रहा है। वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने और बहुपक्षीय मंचों पर साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में भी इन साझेदारियों की अहम भूमिका होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉरीशस और श्रीलंका के नेताओं से हुई मुलाकातें द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देने वाली साबित हुई हैं। इन चर्चाओं ने न केवल वर्तमान परियोजनाओं की समीक्षा की,बल्कि भविष्य के सहयोग की रूपरेखा भी स्पष्ट की। हिंद महासागर क्षेत्र में शांति,स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता इन बैठकों के माध्यम से फिर से रेखांकित हुई है।
