एलपीजी गैस सिलेंडर

घरेलू एलपीजी सिलेंडर 60 रुपये महँगा,कमर्शियल सिलेंडर में भी 114.5 रुपये की बढ़ोतरी; तेल कंपनियों ने ईंधन की कमी की अफवाहों को बताया बेबुनियाद

नई दिल्ली,7 मार्च (युआईटीवी)- देश में रसोई गैस की कीमतों को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। तेल कंपनियों ने शनिवार को घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस फैसले के बाद आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की वृद्धि की गई है,जबकि कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में 114.5 रुपये का इजाफा किया गया है। नई कीमतें शनिवार से लागू हो गई हैं।

सरकारी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अनुसार राजधानी नई दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 913 रुपये हो गई है। इससे पहले इसकी कीमत 853 रुपये थी। यानी उपभोक्ताओं को अब हर सिलेंडर पर 60 रुपये ज्यादा चुकाने होंगे। पिछले एक साल से भी कम समय में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में यह दूसरी बार बढ़ोतरी की गई है।

सिर्फ घरेलू ही नहीं,बल्कि व्यावसायिक उपयोग के लिए इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। तेल कंपनियों के अनुसार कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में प्रति यूनिट 114.5 रुपये की वृद्धि की गई है। यह बढ़ोतरी होटल,रेस्तरां,कैटरिंग सेवाओं और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है,क्योंकि इन क्षेत्रों में गैस सिलेंडर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। ऐसे में कीमत बढ़ने से इनके संचालन खर्च में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई अस्थिरता का असर एलपीजी की कीमतों पर भी पड़ा है। विशेष रूप से मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऊर्जा आपूर्ति के प्रमुख समुद्री मार्गों और उत्पादन क्षेत्रों में अनिश्चितता के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ता है।

भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बदलाव होने पर घरेलू कीमतों में भी समायोजन करना पड़ता है। हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। इसी पृष्ठभूमि में एलपीजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी की गई है।

एलपीजी कीमतों में वृद्धि के साथ ही पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल और डीजल की संभावित कमी को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें फैल रही थीं। इन अफवाहों के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है।

इस संबंध में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट जारी करते हुए कहा कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह भरोसेमंद और मजबूत बनी हुई है। कंपनी ने बताया कि देश में पर्याप्त पेट्रोलियम भंडार मौजूद हैं और सप्लाई चेन बिना किसी रुकावट के काम कर रही है।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की कमी को लेकर जो खबरें सामने आ रही हैं,वे पूरी तरह से निराधार और भ्रामक हैं। बीपीसीएल ने लोगों से अपील की कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी तरह की घबराहट न फैलाएँ।

बीपीसीएल ने अपने बयान में कहा कि कंपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही है और सभी ग्राहकों के लिए सुचारू ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी के अनुसार देशभर में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है और कहीं भी कमी की स्थिति नहीं है।

इसी तरह इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने भी पेट्रोल और डीजल की कमी की खबरों को सिरे से खारिज किया है। कंपनी ने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी रिपोर्टें पूरी तरह बेबुनियाद हैं। आईओसीएल के मुताबिक भारत के पास पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद हैं और वितरण प्रणाली सामान्य रूप से काम कर रही है।

आईओसीएल ने भी एक्स पर जारी अपने संदेश में कहा कि कंपनी देशभर में निर्बाध ईंधन आपूर्ति बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही नागरिकों से अनुरोध किया गया कि वे किसी भी अफवाह से प्रभावित होकर पेट्रोल पंपों पर अनावश्यक भीड़ न लगाएँ।

कंपनी ने लोगों से यह भी अपील की कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से मिलने वाली जानकारी पर ही भरोसा करें। सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरें अक्सर घबराहट पैदा कर देती हैं,जिससे ईंधन स्टेशनों पर अनावश्यक भीड़ लग जाती है और आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।

ऊर्जा बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में वैश्विक परिस्थितियाँ काफी संवेदनशील हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव,कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आपूर्ति मार्गों पर संभावित जोखिम जैसे कारक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

फिलहाल सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि देश में ईंधन की उपलब्धता को लेकर कोई संकट नहीं है। हालाँकि,एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी से आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर असर जरूर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की स्थिति और भू-राजनीतिक घटनाक्रम यह तय करेंगे कि घरेलू बाजार में ईंधन और गैस की कीमतें किस दिशा में जाएँगी।