डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन (तस्वीर क्रेडिट@AkshayPratap94)

डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन से फोन पर की बात,यूक्रेन युद्ध को कम करने का किया आह्वान

न्यूयॉर्क,11 नवंबर (युआईटीवी)- अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत के दौरान उन्होंने रूस-यूक्रेन में चल रहे संघर्ष को और बढ़ाने से बचने का आग्रह किया।

यह बातचीत फ्लोरिडा में ट्रंप की चुनावी जीत के बाद हुई थी,जिसमें उन्होंने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस को हराया था। ट्रंप ने इस दौरान कहा कि वे मॉस्को के साथ और संवाद करना चाहते हैं,ताकि युद्ध को समाप्त किया जा सके। और ढाई साल से लंबे समय से जारी युद्ध का समाधान निकाल तनाव को कम किया जा सके।

वॉशिंगटन पोस्ट से मिली जानकारी के मुताबिक,यूरोप में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति की महत्ता पर जोर देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह यूक्रेन संघर्ष के समाधान में इस प्रभाव का उपयोग करना चाहते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने युद्ध को समाप्त करने का वादा किया था और शांति की आवश्यकता पर बल दिया था, हालाँकि,चुनाव जीतने के बाद अभी तक उन्होंने कोई स्पष्ट रणनीति या प्रस्ताव नहीं दी है।

इससे पहले,यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से भी ट्रंप ने फोन पर बात की, जिसमें उद्योगपति एलोन मस्क भी शामिल थे। जेलेंस्की ने इसे एक सकारात्मक चर्चा बताया और कहा कि ट्रंप के संवाद को जारी रखने के रुख से उन्हें आशा मिली है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने नई अमेरिकी सरकार के साथ सहयोग कर क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने की उम्मीद व्यक्त की है।

यूक्रेन-रूस युद्ध साल 2022 में शुरू हुआ था। वैश्विक राजनीति पर इस संघर्ष ने गहरा असर डाला है। इस संघर्ष का समाधान अभी तक दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है। हाल के घटनाक्रमों से यह साफ दिखता है कि रूस और यूक्रेन दोनों ही भविष्य की वार्ताओं में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए रणनीतिक कदम उठा रहे हैं।

यूक्रेन की सेनाएँ कुछ क्षेत्रों में आगे बढ़ी हैं,जबकि रूस ने भी कुछ स्थानों पर अपनी सैन्य स्थिति को मजबूत किया है,जो इस युद्ध के कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

हालिया घटनाक्रम में रूस ने यूक्रेन पर 145 ड्रोन दागे,जबकि रूस का कहना है कि उसने रविवार को 34 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। इस संघर्ष ने दुनिया के कई हिस्सों में अस्थिरता पैदा की है और अब कूटनीतिक हस्तक्षेप की और आवश्यकता महसूस हो रही है।