यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की,अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@ChandanSharmaG)

डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को दी जाने वाली सभी सैन्य सहायता पर रोक लगाने का दिया आदेश

वाशिंगटन,4 मार्च (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (3 मार्च) को यूक्रेन को दी जाने वाली सभी सैन्य सहायता पर रोक लगाने का आदेश दिया। यह आदेश यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ ओवल ऑफिस में हुई एक तनावपूर्ण बैठक के बाद आया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार,अमेरिकी रक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमेरिका यूक्रेन को दी जाने वाली सभी मौजूदा सैन्य सहायता को तब तक रोक रहा है,जब तक ट्रंप यह सुनिश्चित नहीं कर लेते कि राष्ट्रपति जेलेंस्की शांति के लिए गंभीर रूप से प्रतिबद्ध हैं या नहीं।

यह कदम उस बैठक के बाद उठाया गया,जिसमें जेलेंस्की ने रूस के साथ किसी भी शांति समझौते को सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा गारंटी की माँग की थी। जेलेंस्की की इस माँग पर ट्रंप ने नाराजगी जताई और कहा कि जब तक यूक्रेन शांति के लिए गंभीर रूप से तैयार नहीं होता,तब तक अमेरिका मदद नहीं करेगा। इस बैठक के बाद यूरोपीय सहयोगियों ने यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति और शांति सैनिक भेजने की योजना बनानी शुरू कर दी,ताकि रूस-यूक्रेन युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त किया जा सके।

डोनाल्ड ट्रंप रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से चल रहे युद्ध को शीघ्र समाप्त करने के लिए शांति समझौते का समर्थन कर रहे हैं। हालाँकि,जेलेंस्की की ओर से सुरक्षा की माँग ने इस शांति प्रक्रिया को जटिल बना दिया है। ट्रंप ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि जब तक शांति समझौते की प्रक्रिया में कोई प्रगति नहीं होती,तब तक अमेरिका से कोई भी सैन्य सहायता नहीं दी जाएगी। इस कारण यूक्रेन की सुरक्षा के लिए आवश्यक सैन्य सहायता पर रोक लगाई गई है,जिससे संकट गहरा गया है।

इस बीच, यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप के आदेश से यूक्रेन को दी जाने वाली कितनी सैन्य सहायता प्रभावित होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार,ट्रंप प्रशासन को पूर्व सरकार से बची हुई $3.85 बिलियन की धनराशि के बारे में भी अनिश्चितता है और यह तय नहीं किया गया है कि इसे यूक्रेन के लिए जारी किया जाएगा या नहीं। इसके साथ ही, पहले से तय किए गए सैन्य अनुबंध और हथियारों की डिलीवरी भी इस आदेश से प्रभावित हो सकती हैं,जिसमें महत्वपूर्ण युद्ध सामग्री और एंटी-टैंक हथियारों का समावेश है।

ट्रंप के इस आदेश के बाद यूरोपीय देशों ने यूक्रेन की मदद के लिए अपनी योजनाओं पर पुनर्विचार करना शुरू कर दिया है। यूरोपीय अधिकारियों का मानना है कि यूरोप के पास अमेरिका जितनी सैन्य शक्ति और संसाधन नहीं हैं,लेकिन वे जल्द-से-जल्द यूक्रेन की मदद देने के प्रयास में हैं। हालाँकि,उन्हें यह चिंता है कि उपलब्ध सैन्य संसाधनों की आपूर्ति केवल कुछ ही महीनों तक चल सकेगी,खासकर गर्मी के मौसम तक।

अमेरिका का यह निर्णय केवल सैन्य सहायता तक ही सीमित नहीं है,बल्कि यह यूक्रेन को दी जा रही आर्थिक मदद को भी प्रभावित करता है। इसके अलावा,अमेरिका और यूक्रेन के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता होने वाला था,जिसके तहत अमेरिका को यूक्रेन के प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा मिलना था,लेकिन इस आदेश के बाद इस समझौते की स्थिति भी अस्पष्ट हो गई है और यह समझौता टूटता हुआ दिखाई दे रहा है।

यह संकट अमेरिकी-यूक्रेनी संबंधों में एक नई जटिलता पैदा कर रहा है। यूरोपीय सहयोगी देशों का मानना है कि अमेरिकी सैन्य सहायता में कमी से यूक्रेन की स्थिति और भी कठिन हो सकती है। ऐसे में यूरोपीय देशों को अपनी सैन्य सहायता और रणनीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस हो रही है।

ट्रंप का यह आदेश यूक्रेन को दी जा रही सैन्य सहायता पर एक बड़ी रोक का संकेत है और यह रूस-यूक्रेन युद्ध के शांति समझौते की प्रक्रिया को और भी जटिल बना सकता है। इस फैसले से न केवल यूक्रेन की सुरक्षा,बल्कि अमेरिका और यूरोप के बीच भी नई राजनीतिक चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। यूक्रेन की स्थिति इस समय अनिश्चित है और भविष्य में क्या होगा,यह निर्भर करेगा कि ट्रंप और अन्य वैश्विक नेता इस संकट का समाधान कैसे निकालते हैं।