नई दिल्ली,6 फरवरी (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत सरकार,नागालैंड सरकार और ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ईएनपीओ) के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते की खुले दिल से सराहना की है। प्रधानमंत्री ने इसे न केवल पूर्वी नागालैंड बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत के लिए एक निर्णायक मोड़ बताया है। उनका कहना है कि यह समझौता लोगों के लिए अवसर और समृद्धि के नए रास्ते खोलेगा और क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही विकास संबंधी असमानताओं को दूर करने में मदद करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि यह वास्तव में एक ऐतिहासिक समझौता है,जो खासकर पूर्वी नागालैंड के विकास की दिशा को मजबूत बनाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे स्थानीय लोगों को शिक्षा,रोजगार,बुनियादी ढाँचे और प्रशासनिक भागीदारी के बेहतर अवसर मिलेंगे। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह समझौता उत्तर-पूर्व में शांति,प्रगति और सबके विकास के लिए केंद्र सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस समझौते की औपचारिक घोषणा करते हुए बताया कि भारत सरकार,नागालैंड सरकार और ईएनपीओ के बीच लंबे समय से लंबित मुद्दों पर सहमति बनी है। अमित शाह ने कहा कि दशकों से पूर्वी नागालैंड के लोगों की जो माँगें और चिंताएँ थीं,उन्हें संवाद और आपसी सहमति के माध्यम से सुलझाया गया है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी के उस विजन का हिस्सा बताया,जिसमें एक शांतिपूर्ण,समावेशी और समृद्ध पूर्वोत्तर का निर्माण करना लक्ष्य है।
गौरतलब है कि ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन नागालैंड के छह पूर्वी जिलों—तुएनसांग,मोन,किफिरे,लॉन्गलेंग,नोकलाक और शमाटोर—के आठ मान्यता प्राप्त नगा जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाला शीर्ष संगठन है। इन क्षेत्रों में लंबे समय से यह भावना रही है कि विकास,प्रशासनिक सुविधाओं और संसाधनों के वितरण में उन्हें अपेक्षित ध्यान नहीं मिला। इसी पृष्ठभूमि में ईएनपीओ की ओर से अलग प्रशासनिक व्यवस्था की माँग उठती रही है।
This is a historic agreement indeed, which will enhance the development trajectory of Eastern Nagaland in particular. I am sure it will open new avenues of opportunity and prosperity for the people. It reflects our unwavering commitment to peace, progress and inclusive growth in… https://t.co/bKsHl8rWOn
— Narendra Modi (@narendramodi) February 6, 2026
गृह मंत्री अमित शाह और नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफिउ रियो की मौजूदगी में गुरुवार को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत पूर्वी नागालैंड के लिए फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (एफएनटीए) के गठन का प्रावधान किया गया है। एफएनटीए को 46 विषयों से संबंधित प्रशासनिक और विकासात्मक शक्तियों का हस्तांतरण किया जाएगा,जिससे स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी और योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
समझौते में यह भी प्रावधान है कि एफएनटीए के लिए एक मिनी-सचिवालय की स्थापना की जाएगी,जिसका नेतृत्व अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव स्तर का अधिकारी करेगा। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी और पूर्वी नागालैंड के जिलों को राज्य राजधानी पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसके अलावा, विकास व्यय का आवंटन आबादी और क्षेत्रफल के अनुपात में सुनिश्चित किया जाएगा,ताकि संसाधनों का न्यायसंगत वितरण हो सके।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह समझौता भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371(ए) के प्रावधानों को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करता। अनुच्छेद 371(ए) नागालैंड को विशेष संवैधानिक संरक्षण प्रदान करता है,जिसके तहत नागा सामाजिक परंपराओं,भूमि स्वामित्व और संसाधनों से जुड़े अधिकार सुरक्षित रहते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए प्रशासनिक ढाँचे का उद्देश्य इन संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करना नहीं,बल्कि विकास को गति देना है।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह समझौता पूर्वोत्तर के लोगों की वास्तविक आकांक्षाओं को समझने और उन्हें पूरा करने की केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि यह पहल इस बात का प्रमाण है कि जटिल और संवेदनशील मुद्दों का समाधान हिंसा या टकराव से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान,संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के जरिए ही संभव है।
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता पूर्वी नागालैंड में भरोसे की कमी को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। लंबे समय से यह क्षेत्र बुनियादी ढाँचे,स्वास्थ्य सुविधाओं,शिक्षा और रोजगार के मामले में पिछड़ा माना जाता रहा है। एफएनटीए के गठन से उम्मीद की जा रही है कि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियाँ बनेंगी और योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचेगा।
स्थानीय समुदायों में भी इस समझौते को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि इससे युवाओं को अपने क्षेत्र में ही बेहतर अवसर मिलेंगे और पलायन की समस्या पर भी कुछ हद तक अंकुश लगेगा। हालाँकि,कुछ वर्गों ने यह भी कहा है कि समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन पर ही इसकी सफलता निर्भर करेगी।
पूर्वी नागालैंड को लेकर हुआ यह समझौता न केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था का विस्तार है,बल्कि यह उस व्यापक सोच का हिस्सा है,जिसमें उत्तर-पूर्व को भारत की विकास यात्रा का अभिन्न अंग माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों ने इसे शांति,विकास और समावेशन की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है। आने वाले समय में इसकी वास्तविक तस्वीर जमीन पर कैसे उतरती है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी,लेकिन फिलहाल इसे पूर्वोत्तर के लिए एक नई उम्मीद और नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
