इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष (तस्वीर क्रेडिट@TufailChaturve)

मिस्र ने गाजा प्रशासन को अपने नियंत्रण में लेने के इजरायली प्रस्ताव को किया खारिज

काहिरा,27 फरवरी (युआईटीवी)- मिस्र ने हाल ही में गाजा पट्टी की अस्थायी प्रशासनिक जिम्मेदारी को संभालने के किसी भी प्रस्ताव को सख्ती से खारिज कर दिया है। मिस्र के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता तमीम खलफ ने स्पष्ट किया कि उनका देश इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के स्थायी और व्यापक समाधान के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि गाजा का प्रशासन सौंपने का कोई भी प्रस्ताव जो फिलिस्तीनी मुद्दे के मूल कारणों और अरब देशों के स्थापित रुख को नज़रअंदाज़ करता है,उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। खलफ ने इसे “अधूरा समाधान” बताते हुए कहा कि इस तरह के कदम से संघर्ष का समाधान नहीं हो सकता,बल्कि यह उसे और लंबा खींच सकता है।

मिस्र ने यह स्पष्ट किया कि गाजा पट्टी,वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम,ये सभी फिलिस्तीनी इलाके एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य का हिस्सा हैं। इन पर केवल फिलिस्तीन का संप्रभुता और प्रशासन होना चाहिए। मिस्र ने जोर देकर कहा कि गाजा के प्रशासन को फिलिस्तीनियों के पास ही होना चाहिए और यह इजरायल या किसी अन्य देश के द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इस बयान से यह स्पष्ट हो गया कि मिस्र फिलिस्तीनियों की भूमि से जुड़े सभी प्रस्तावों को नकारता है,जो उनके स्वायत्तता और संप्रभुता को चुनौती देते हैं।

इजरायली विपक्ष के नेता याइर लापिद ने हाल ही में एक विवादास्पद प्रस्ताव दिया था,जिसमें उन्होंने सुझाव दिया था कि गाजा पट्टी का प्रशासन कम-से-कम आठ वर्षों तक मिस्र को सौंपा जाए। इसके बदले,लापिद ने यह प्रस्ताव रखा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय मिस्र के विदेशी कर्ज को चुकाने में मदद करेगा। उनका यह प्रस्ताव गाजा में सुरक्षा व्यवस्था पर आधारित था,जिसमें इजरायल,मिस्र,अमेरिका और अरब देशों के सहयोग से गाजा की सुरक्षा व्यवस्था का संचालन किया जाए। हालाँकि,उन्होंने इस प्रस्ताव में यह स्पष्ट नहीं किया कि यह सुरक्षा व्यवस्था कैसे काम करेगी या इसे लागू करने के लिए किन शर्तों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा।

लापिद का यह प्रस्ताव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके तहत मिस्र के साथ गाजा के प्रशासन का कोई स्पष्ट समझौता नहीं हुआ है। मिस्र ने 1948 से 1967 तक गाजा का प्रशासन किया था,लेकिन इसके बाद से इस क्षेत्र में इजरायल का नियंत्रण रहा है। लापिद का यह विचार विवादास्पद है,क्योंकि इस प्रस्ताव में गाजा को मिस्र को सौंपने का मुद्दा सामने आया है,जिससे फिलिस्तीनियों की स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर सवाल उठ सकते हैं।

इससे पहले,मिस्र ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया था,जिसमें गाजा का नियंत्रण अमेरिका को सौंपने और फिलिस्तीनी निवासियों को मिस्र और जॉर्डन भेजने की योजना थी। इस प्रस्ताव को लेकर अरब देशों और मिस्र ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी,क्योंकि इसमें फिलिस्तीनी लोगों को उनकी पुरानी भूमि से हटाने की बात की गई थी। मिस्र,जॉर्डन और अन्य अरब देशों का कहना था कि यह प्रस्ताव फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों का उल्लंघन करता है और इसे पूरी तरह से नकारा जाना चाहिए।

ट्रंप के इस प्रस्ताव के तहत मध्य पूर्व में एक नया समाधान खोजने की कोशिश की गई थी,जिसे “रिवेरा” का नाम दिया गया था,लेकिन अरब देशों का मानना था कि यह प्रस्ताव फिलिस्तीनियों की भूमि पर कब्जे और उनके अधिकारों के खिलाफ है। उनका कहना था कि दो-राष्ट्र समाधान (दो अलग-अलग राज्यों का गठन) ही फिलिस्तीनी समस्या का एकमात्र न्यायसंगत और स्थायी हल हो सकता है। इस तरह के प्रस्तावों को मिस्र और अन्य अरब देशों ने पूरी तरह से नकार दिया,क्योंकि यह फिलिस्तीनियों के अधिकारों को नजरअंदाज करने वाला था।

मिस्र ने हमेशा फिलिस्तीनी समस्या का समाधान दो-राष्ट्र समाधान के माध्यम से देखा है,जिसमें एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना शामिल है। मिस्र का मानना है कि फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के बिना मध्य-पूर्व में शांति संभव नहीं है। इसके अलावा,मिस्र फिलिस्तीनियों को विस्थापित किए बिना गाजा के पुनर्निर्माण की एक व्यापक योजना पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य गाजा के लोगों की मदद करना और उन्हें उनके घरों में पुनः बसाना है,न कि उन्हें अन्य देशों में भेजना।

मिस्र ने यह भी स्पष्ट किया कि गाजा के पुनर्निर्माण में फिलिस्तीनी अधिकारों का पूरी तरह से सम्मान किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गाजा के लोग अपने घरों में ही रह सकें और उनके अधिकारों को किसी तरह से खतरा न हो। यह योजना फिलिस्तीनी स्वायत्तता और संप्रभुता को मान्यता देती है और इसे कोई भी बाहरी हस्तक्षेप नहीं चाहिए।

इस मुद्दे पर और अधिक चर्चा के लिए काहिरा में 4 मार्च को एक आपातकालीन अरब सम्मेलन आयोजित किया जाएगा,जिसमें अरब देशों के नेता और अन्य संबंधित पक्ष बैठक करेंगे। इस सम्मेलन का उद्देश्य फिलिस्तीनी मुद्दे पर एक साझा दृष्टिकोण अपनाना और गाजा के भविष्य को लेकर रणनीतिक कदम उठाना होगा। इसमें मिस्र और अन्य अरब देशों के प्रतिनिधि मिलकर यह तय करेंगे कि गाजा में शांति और स्थायित्व कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है और फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों का संरक्षण कैसे किया जा सकता है।

मिस्र ने गाजा के प्रशासन से संबंधित किसी भी प्रस्ताव को नकारते हुए यह साफ कर दिया है कि वह फिलिस्तीनी मुद्दे का समाधान दो-राष्ट्र समाधान के माध्यम से चाहता है। इसने उन प्रस्तावों को खारिज किया है,जो फिलिस्तीनियों के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं और उनके लिए एक स्थायी समाधान की बजाय संघर्ष को और बढ़ा सकते हैं। मिस्र का यह रुख स्पष्ट करता है कि वह फिलिस्तीनियों के अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है और उनका विश्वास है कि शांति तभी संभव है,जब फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना हो और उनकी संप्रभुता का सम्मान किया जाए।