इंग्लैंड क्रिकेट टीम (तस्वीर क्रेडिट@JaikyYadav16)

एशेज में 4-1 की हार के बाद इंग्लैंड क्रिकेट में मंथन तेज,ईसीबी करेगा पूरी सीरीज का रिव्यू

नई दिल्ली,9 जनवरी (युआईटीवी)- एशेज सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के हाथों 4-1 से करारी हार झेलने के बाद इंग्लैंड क्रिकेट एक बार फिर बड़े आत्ममंथन के दौर में प्रवेश कर गया है। इस हार ने न केवल टीम के प्रदर्शन पर सवाल खड़े किए हैं,बल्कि इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) की रणनीति,तैयारी और टीम संस्कृति को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ दी है। ईसीबी ने साफ संकेत दिए हैं कि एशेज दौरे की व्यापक समीक्षा की जाएगी,जिसमें खिलाड़ियों के प्रदर्शन से लेकर उनके व्यवहार तक हर पहलू को परखा जाएगा।

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर इंग्लैंड की शुरुआत उम्मीदों से भरी हुई थी। ‘बैजबॉल’ की आक्रामक सोच और बेन स्टोक्स की कप्तानी में टीम से यह उम्मीद की जा रही थी कि वह ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर लंबे समय से चला आ रहा हार का सिलसिला तोड़ सकेगी। हालाँकि,सीरीज के आगे बढ़ने के साथ यह साफ हो गया कि इंग्लैंड लगातार प्रदर्शन करने में नाकाम रहा। गेंदबाजी में धार की कमी,बल्लेबाजी में अस्थिरता और अहम मौकों पर फैसलों की चूक ने टीम को पीछे धकेल दिया।

ईसीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिचर्ड गोल्ड ने इस हार पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। एक आधिकारिक बयान में उन्होंने कहा कि यह एशेज टूर काफी उम्मीदों के साथ शुरू हुआ था,लेकिन टीम ऑस्ट्रेलिया में एशेज जीतने का सपना पूरा नहीं कर सकी। उन्होंने माना कि मेलबर्न में खेले गए चौथे टेस्ट में मिली जीत जैसे कुछ अच्छे पल जरूर आए,लेकिन टीम पूरे दौरे में हर हालात और हर चरण में लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। गोल्ड ने यह भी स्वीकार किया कि ऑस्ट्रेलिया ने बेहतर और संतुलित खेल दिखाया और वह एशेज जीतने का पूरा हकदार था।

हार के साथ-साथ कुछ अन्य मुद्दों ने भी ईसीबी की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक,ऑस्ट्रेलिया के नूसा दौरे के दौरान इंग्लैंड के खिलाड़ियों के अत्यधिक शराब सेवन की खबरें सामने आई हैं। इन खबरों को बोर्ड ने गंभीरता से लिया है और संभावना जताई जा रही है कि रिव्यू के दौरान इस पहलू की भी जाँच की जाएगी। ईसीबी यह जानना चाहता है कि क्या टीम का अनुशासन और पेशेवर रवैया कहीं न कहीं प्रदर्शन पर असर डाल रहा है।

इस पूरी स्थिति के बीच हेड कोच ब्रैंडन मैकुलम पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। मैकुलम की आक्रामक सोच और ‘फियरलेस क्रिकेट’ के दर्शन ने इंग्लैंड को एक नई पहचान जरूर दी,लेकिन बड़े मुकाबलों में नतीजे उनके पक्ष में नहीं आए हैं। मैकुलम की कोचिंग और बेन स्टोक्स की कप्तानी में इंग्लैंड अब तक ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ कोई भी टेस्ट सीरीज जीतने में असफल रहा है। इसके अलावा,टीम पिछले तीन विश्व टेस्ट चैंपियनशिप चक्रों में एक बार भी फाइनल तक नहीं पहुँच सकी है,जो इंग्लैंड जैसे क्रिकेट राष्ट्र के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।

रिचर्ड गोल्ड ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि बोर्ड इस सीरीज से सबक लेने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कैंपेन का पूरा रिव्यू पहले से ही चल रहा है,जिसमें टूर प्लानिंग और तैयारी,व्यक्तिगत प्रदर्शन और खिलाड़ियों का व्यवहार,साथ ही अलग-अलग हालात में ढलने और प्रभावी तरीके से जवाब देने की टीम की क्षमता को परखा जाएगा। गोल्ड के मुताबिक,यह समीक्षा केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं होगी,बल्कि इसके आधार पर ठोस बदलाव भी लागू किए जाएँगे।

ईसीबी ने अपने प्रशंसकों को भरोसा दिलाया है कि आने वाले कुछ महीनों में जरूरी सुधार किए जाएँगे। बोर्ड का लक्ष्य है कि जून 2026 में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज से पहले ये बदलाव लागू हो जाएँ,ताकि टीम एक नई ऊर्जा और स्पष्ट दिशा के साथ मैदान पर उतर सके। ईसीबी का दीर्घकालिक फोकस 2027 में एशेज दोबारा जीतने पर टिका हुआ है और बोर्ड इसके लिए अभी से मजबूत नींव तैयार करना चाहता है।

एशेज में 4-1 की हार ने इंग्लैंड क्रिकेट को एक बार फिर कठोर सवालों के सामने खड़ा कर दिया है। यह सिर्फ एक सीरीज की हार नहीं,बल्कि टीम की रणनीति,नेतृत्व और संस्कृति पर पुनर्विचार का संकेत है। अब देखने वाली बात यह होगी कि ईसीबी इस रिव्यू के बाद कितनी तेजी और गंभीरता से बदलाव लागू करता है और क्या इंग्लैंड भविष्य में बड़े मुकाबलों में फिर से अपनी खोई हुई धार वापस पा पाता है।