सुपर-8 में पहुँचा इंग्लैंड (तस्वीर क्रेडिट@mufaddal_vohra)

सुपर-8 में पहुँचा इंग्लैंड,लेकिन कप्तान हैरी ब्रूक ने जताई असंतुष्टि; बोले- अभी सर्वश्रेष्ठ खेल बाकी है

कोलकाता,17 फरवरी (युआईटीवी)- आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 में इंग्लैंड ने सुपर-8 का टिकट तो कटा लिया है,लेकिन टीम के कप्तान हैरी ब्रूक के चेहरे पर संतोष की पूरी चमक नहीं दिखी। इटली के खिलाफ 24 रन की जीत के बाद जहाँ दर्शकों को राहत मिली,वहीं ब्रूक ने साफ कहा कि टीम अभी अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर से काफी दूर है। जीत दर्ज करने के बावजूद उन्होंने माना कि इंग्लैंड की टीम उस धार तक नहीं पहुँचीं है,जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है।

इटली के खिलाफ मुकाबले में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 202/7 का मजबूत स्कोर खड़ा किया। स्कोरकार्ड देखने पर सब कुछ संतुलित और प्रभावशाली लगता है, लेकिन मैच की परतें खोलें तो कहानी थोड़ी अलग नजर आती है। शुरुआती ओवरों में टीम को वह लय नहीं मिली,जिसकी तलाश थी। बीच के ओवरों में रनगति कुछ धीमी हुई और विकेट भी गिरते रहे। ऐसे में विल जैक्स ने नाबाद अर्धशतक लगाकर पारी को सँभाला और अंत तक टिके रहे। उनकी पारी किसी मजबूत स्तंभ की तरह थी,जिसने डगमगाती दीवार को गिरने से बचा लिया।

मैच के बाद प्रेजेंटेशन सेरेमनी में ब्रूक ने साफ कहा, “हमने अपना बेस्ट क्रिकेट नहीं खेला है,लेकिन आखिर में हम आगे बढ़ गए हैं। हम अगले राउंड में जा रहे हैं,इसलिए खुश हो सकते हैं।” उनके बयान में जीत की संतुष्टि तो थी,पर साथ ही एक बेचैनी भी झलक रही थी। यह बेचैनी उस टीम की है,जो खुद को टूर्नामेंट की प्रबल दावेदार मानती है और जानती है कि आगे की राह और कठिन होने वाली है।

ब्रूक ने स्वीकार किया कि ग्रुप स्टेज में इंग्लैंड की बल्लेबाजी यूनिट उतनी निरंतर नहीं रही,जितनी वे चाहते थे। उन्होंने कहा कि टीम जितना स्कोर बनाना चाहती थी,उतना नहीं बना सकी। हालाँकि,उन्होंने यह भी जोड़ा कि टी20 क्रिकेट की प्रकृति ही ऐसी है,जहाँ हर दिन एक नई कहानी लिखी जाती है। कभी कोई बल्लेबाज शतक जड़ देता है,तो अगले ही दिन पहली गेंद पर पवेलियन लौट सकता है। इस फॉर्मेट की यही अनिश्चितता इसे रोमांचक भी बनाती है और चुनौतीपूर्ण भी।

इंग्लैंड की पारी में आक्रामकता के साथ-साथ कुछ अस्थिरता भी दिखी। पावरप्ले में तेज शुरुआत की कोशिश हुई,लेकिन निरंतरता नहीं बन पाई। मिडिल ऑर्डर में साझेदारियों की कमी साफ झलकी। ऐसे में विल जैक्स का संयमित खेल और अंत में तेज रन बटोरने की क्षमता टीम के लिए राहत साबित हुई। ब्रूक ने विशेष रूप से उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में उन्होंने टीम का साथ दिया है।

गेंदबाजी विभाग में इंग्लैंड ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। खासकर डेथ ओवरों में टीम ने मैच को हाथ से फिसलने नहीं दिया। ब्रूक ने सैम करन की जमकर तारीफ की,जिन्होंने अहम मौकों पर विकेट लेकर इटली की उम्मीदों को झटका दिया। करन की गेंदों में वह सटीकता और समझ दिखी,जो बड़े टूर्नामेंटों में फर्क पैदा करती है। ब्रूक ने कहा कि सैमी पूरे टूर्नामेंट में प्रभावशाली रहे हैं और मुश्किल समय में टीम के लिए ढाल बनकर खड़े हुए हैं।

साथ ही उन्होंने जेमी के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया,जिन्होंने अंतिम ओवरों में कसी हुई गेंदबाजी कर दबाव बनाए रखा। इंग्लैंड की फील्डिंग भी इस मैच में उल्लेखनीय रही। तेज रिफ्लेक्स,सटीक थ्रो और कैचिंग में सतर्कता ने इटली को बड़े शॉट्स खेलने से रोके रखा। टी20 जैसे तेज फॉर्मेट में फील्डिंग अक्सर वह अदृश्य ताकत होती है,जो स्कोरबोर्ड पर सीधे नहीं दिखती,लेकिन परिणाम पर गहरा असर डालती है।

हालाँकि,जीत के बावजूद यह साफ है कि इंग्लैंड को सुपर-8 में और मजबूत टीमों का सामना करना होगा। वहाँ छोटी गलतियाँ भी भारी पड़ सकती हैं। ब्रूक का आत्ममंथन इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। उन्होंने संकेत दिया कि टीम को अपने विकल्पों का बेहतर इस्तेमाल करना होगा और लगातार सकारात्मक इरादे के साथ खेलना होगा।

इंग्लैंड की टीम कागज पर संतुलित और अनुभवी दिखती है,लेकिन टूर्नामेंट के इस पड़ाव पर सिर्फ नाम नहीं,प्रदर्शन मायने रखता है। सुपर-8 में पहुँचना एक उपलब्धि जरूर है,पर असली परीक्षा अब शुरू होगी। ब्रूक और उनकी टीम के लिए यह वक्त आत्मविश्वास और आत्मविश्लेषण के बीच संतुलन साधने का है।

इटली के खिलाफ मिली जीत ने उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया है,लेकिन कप्तान की नजरें अब अगले दौर पर टिकी हैं। यदि इंग्लैंड को खिताब की दौड़ में मजबूत दावेदार बनना है,तो उन्हें अपने खेल की धार और तेज करनी होगी। अभी सफर बाकी है और ब्रूक के शब्दों में छिपा संदेश साफ है कि असली इंग्लैंड अभी पूरी तरह मैदान पर उतरा ही नहीं है।