कैनबरा,29 नवंबर (युआईटीवी)- बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित को सुनिश्चित करने के मकसद से ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने शुक्रवार को कहा कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सोशल मीडिया कंपनियों की सामाजिक जिम्मेदारी है। उनका यह बयान उस समय आया,जब संसद ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करने से प्रतिबंधित करने वाला एक कानून पारित किया।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक,कैनबरा में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने संवाददाताओं को बताया कि यह कानून,जो दुनिया में अपनी तरह का पहला है,युवा ऑस्ट्रेलियाई बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि हमारे बच्चों की सुरक्षा करना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की प्राथमिक जिम्मेदारी बननी चाहिए।
इस नए कानून को गुरुवार देर रात सीनेट ने मंजूरी दी। इसके बाद शुक्रवार सुबह प्रतिनिधि सभा में इसे प्रक्रियात्मक सत्र में दूसरी बार पारित किया गया। अब यह कानून लागू होने के लिए तैयार है और अगले 12 महीनों में इसे प्रभावी किया जाएगा।
हालाँकि, सरकार ने अभी तक इस कानून को लागू किए जाने की प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट नहीं किया है। कानून के मुताबिक,यदि सोशल मीडिया कंपनियाँ 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अपने प्लेटफॉर्म का उपयोग करने से रोकने के लिए उचित कदम उठाने में असफल रहती हैं,तो उन्हें 50 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 32.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर) तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री अल्बानीज ने कहा कि यह स्वीकार किया जा सकता है कि इस कानून का कार्यान्वयन पूरी तरह से दोषरहित नहीं होगा। उन्होंने इसका उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे 18 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए शराब पर प्रतिबंध का मतलब यह नहीं है कि वे कभी शराब तक पहुँच नहीं पाएँगे,लेकिन यह कदम समाज के लिए सही दिशा में है।
मेटा (जो फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी है) ने इस कानून पर प्रतिक्रिया देते हुए इस पर चिंता जताई। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि कानून को जिस गति से पारित किया गया,वह चिंताजनक है। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में उद्योग द्वारा पहले से उठाए गए कदमों,आयु-उपयुक्त अनुभवों के प्रावधान और युवाओं की आवाज़ों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
यह नया कानून ऑस्ट्रेलियाई समाज में बच्चों की सुरक्षा पर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उत्पीड़न,साइबर बुलिंग और अनुचित सामग्री तक बच्चों की पहुँच को रोकने के लिए सरकार द्वारा यह कठोर कदम उठाया गया है। हालाँकि,इसके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों को लेकर उद्योग और विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं।
इस कानून के लागू होने से यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सोशल मीडिया कंपनियाँ इसे कैसे अपनाती हैं और क्या यह बच्चों की सुरक्षा में प्रभावी साबित होता है।
