ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (तस्वीर क्रेडिट@007AliSohrab)

एपस्टीन कांड पर ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर की सार्वजनिक माफी,मैंडेलसन की नियुक्ति को लेकर लेबर सरकार घिरी

लंदन,6 फरवरी (युआईटीवी)- ब्रिटेन की राजनीति में उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया,जब प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने जेफ्री एपस्टीन के पीड़ितों से सार्वजनिक रूप से माफी माँगी और पूर्व वरिष्ठ नेता पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त करने को अपनी गंभीर भूल बताया। स्टार्मर ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि उन्होंने मैंडेलसन के बयानों पर भरोसा किया,जो बाद में झूठे साबित हुए और इसी भरोसे के आधार पर उन्हें अहम कूटनीतिक पद सौंपा गया। एपस्टीन से जुड़े नए खुलासों और लीक ईमेल सामने आने के बाद यह मामला न केवल सरकार,बल्कि पूरी लेबर पार्टी के लिए एक बड़े संकट में बदल गया है।

प्रधानमंत्री स्टार्मर ने यह माफी दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड के हेस्टिंग्स शहर में एक भाषण के दौरान दी। उन्होंने एपस्टीन के पीड़ितों के दर्द को स्वीकार करते हुए कहा कि जिन लोगों ने यह भयावह ट्रॉमा झेला है,उसे समझ पाना अधिकांश लोगों के लिए लगभग असंभव है। स्टार्मर ने भावुक शब्दों में कहा कि सत्ता और प्रभाव रखने वाले कई लोग पीड़ितों की मदद करने में नाकाम रहे और इसके लिए उन्हें गहरा अफसोस है। उन्होंने कहा, “मुझे माफ करें; आपके साथ जो हुआ,उसके लिए मुझे अफसोस है। मुझे अफसोस है कि इतने सारे ताकतवर लोग आपकी मदद नहीं कर पाए और मुझे माफ करें कि मैंने पीटर मैंडेलसन के झूठ पर विश्वास किया और उन्हें इस पद पर नियुक्त किया।”

यह बयान ऐसे समय आया है,जब पीटर मैंडेलसन के जेफ्री एपस्टीन के साथ कथित करीबी संबंधों को लेकर नए और गंभीर आरोप सामने आए हैं। हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी दस्तावेजों में दावा किया गया है कि मैंडेलसन और एपस्टीन के बीच करीबी संपर्क थे,जिनमें ईमेल चैट और संवेदनशील सरकारी दस्तावेज साझा करने जैसे आरोप भी शामिल हैं। इन खुलासों के बाद ब्रिटेन की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और विपक्ष के साथ-साथ लेबर पार्टी के भीतर से भी प्रधानमंत्री पर दबाव बढ़ने लगा।

पीटर मैंडेलसन,जो पहले टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन की सरकारों में प्रभावशाली मंत्री रह चुके हैं,इस पूरे विवाद के सामने आने के तुरंत बाद हाउस ऑफ लॉर्ड्स से इस्तीफा दे चुके हैं। अपने इस्तीफे के दौरान उन्होंने कहा था कि वह पार्टी को और अधिक शर्मिंदगी से बचाना चाहते हैं। हालाँकि,उनके इस कदम के बावजूद विवाद थमा नहीं और सवाल सीधे प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की निर्णय प्रक्रिया पर उठने लगे।

स्टार्मर ने स्वीकार किया कि उन्हें मैंडेलसन से जुड़े कुछ पहलुओं की जानकारी थी,लेकिन उन्होंने इस स्तर के झूठ और गलतबयानी की उम्मीद नहीं की थी। उन्होंने कहा कि मैंडेलसन ने “बार-बार झूठ बोला” और देश को “धोखा दिया।” प्रधानमंत्री ने यह भी माना कि इस नियुक्ति पर उन्हें गहरा पछतावा है और अगर सच्चाई पहले सामने आ जाती,तो वह कभी ऐसा फैसला नहीं लेते।

इस पूरे मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया,जब यह सामने आया कि मैंडेलसन से जुड़े ईमेल लीक हुए हैं और जाँच के दौरान उन्होंने कथित तौर पर गलत बयान दिए। इन घटनाओं ने लेबर पार्टी की नैतिक साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं,खासकर ऐसे समय में जब पार्टी खुद को पारदर्शिता और जवाबदेही की मिसाल के रूप में पेश करती रही है।

प्रधानमंत्री स्टार्मर ने यह भी बताया कि वह बुधवार को मैंडेलसन की नियुक्ति से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करना चाहते थे और संसद में प्रधानमंत्री प्रश्नकाल (पीएमक्यू) के दौरान इस मुद्दे पर खुलकर बात करना चाहते थे। हालाँकि,पुलिस की सलाह के चलते उन्हें ऐसा करने से रोका गया। स्टार्मर के अनुसार,पुलिस ने चेतावनी दी कि दस्तावेजों को सार्वजनिक करने से भविष्य की किसी जाँच या कानूनी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “मैं लोगों की भावनाओं को समझता हूँ। मैं भी चाहता हूँ कि ये दस्तावेज जल्द-से-जल्द सामने आएँ,लेकिन हमें कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करना होगा।”

स्टार्मर ने इस बात पर जोर दिया कि एपस्टीन से जुड़ा यह मुद्दा किसी भी सूरत में “पॉलिटिकल फुटबॉल” नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीति से ऊपर है और इसमें सबसे ज्यादा ध्यान पीड़ितों के न्याय और सम्मान पर होना चाहिए। उनके मुताबिक,इस तरह के गंभीर मामलों को राजनीतिक फायदे या नुकसान के नजरिये से देखना गलत होगा।

फिर भी,विपक्षी दलों और लेबर पार्टी के भीतर कई नेताओं का मानना है कि यह मामला प्रधानमंत्री की नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आलोचकों का कहना है कि इतने संवेदनशील अंतर्राष्ट्रीय पद पर नियुक्ति से पहले पृष्ठभूमि की गहन जाँच होनी चाहिए थी,खासकर तब जब एपस्टीन जैसे विवादास्पद व्यक्ति से जुड़ी खबरें पहले से सार्वजनिक थीं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,कीर स्टार्मर की सार्वजनिक माफी एक असामान्य लेकिन जरूरी कदम है,क्योंकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री आमतौर पर इस तरह की व्यक्तिगत जिम्मेदारी स्वीकार करने से बचते रहे हैं। हालाँकि,यह माफी लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और दबाव को पूरी तरह शांत कर पाएगी या नहीं,यह आने वाला वक्त बताएगा।

फिलहाल,एपस्टीन कांड से जुड़े नए खुलासों और मैंडेलसन की भूमिका की जाँच जारी है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सत्ता,प्रभाव और जवाबदेही के बीच संतुलन कैसे साधा जाए। कीर स्टार्मर की माफी ने भले ही नैतिक जिम्मेदारी का संकेत दिया हो,लेकिन ब्रिटिश राजनीति में इसके दूरगामी प्रभाव अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।