मारिया कोरिना मचाडो ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भेंट किया नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल (तस्वीर क्रेडिट@daiya_dwarka)

समुद्र में मौत से सामना,लोकतंत्र की जंग और अमेरिका से उम्मीद: वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो का दर्दनाक पलायन और सख्त संदेश

वाशिंगटन,17 जनवरी (युआईटीवी)- वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार सौंपने के बाद अब उन्होंने अपने देश से समुद्र के रास्ते भागने के उस खौफनाक अनुभव का खुलासा किया है,जिसने उनकी जान को सीधे खतरे में डाल दिया था। मचाडो का कहना है कि निकोलस मादुरो सरकार के बढ़ते दबाव और उत्पीड़न के बीच यह यात्रा उनके जीवन की सबसे डरावनी घड़ियों में से एक थी। आखिरकार,कई घंटों की अनिश्चितता और मौत से जूझते हुए वह अमेरिका पहुँचने में सफल रहीं।

वॉशिंगटन में हेरिटेज फाउंडेशन थिंक-टैंक के मंच से आयोजित एक न्यूज कॉन्फ्रेंस में मचाडो ने मीडिया से बातचीत करते हुए उस रात की भयावह तस्वीर खींच दी,जब समुद्र की ऊँची लहरों और तकनीकी विफलताओं ने उनकी नाव को लगभग निगल ही लिया था। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान एक ऐसा पल आया,जब नाव बुरी तरह हिलने लगी और वह खुद घायल हो गईं। मचाडो के मुताबिक,समुद्र में छह फीट से भी ऊँची लहरें उठ रही थीं और तेज हवाओं के कारण जहाज पर नियंत्रण लगभग असंभव हो गया था। हालात तब और बिगड़ गए जब एक साथ कई अहम नेविगेशन सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया।

उन्होंने कहा कि जीपीएस सिग्नल पूरी तरह गायब हो गया था,सैटेलाइट फोन ने जवाब देना बंद कर दिया और स्टारलिंक एंटीना भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। मचाडो ने बताया कि यह सब कुछ एक ही समय में हुआ,जिससे नाव समुद्र में भटकने लगी। उनके शब्दों में, “हम समुद्र में खो गए थे। हमें नहीं पता था कि अगला पल क्या लेकर आएगा।” यह स्थिति कई घंटों तक बनी रही और हर गुजरता मिनट उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता था।

मचाडो ने स्वीकार किया कि उस दौरान उन्हें अपनी जान का गहरा डर महसूस हुआ। उन्होंने कहा कि हालात बेहद खतरनाक और डरावने थे,लेकिन आखिरकार वे आगे बढ़ने में सफल रहीं। उन्होंने इस पूरे अभियान में शामिल लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि वह इस यात्रा के सभी विवरण अभी साझा नहीं कर सकतीं। उनका कहना था कि जब तक सरकार की उन लोगों को नुकसान पहुँचाने की क्षमता कम नहीं हो जाती,तब तक वह इंतजार करेंगी। मचाडो ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उनका बचना कोई महज संयोग था। उनके अनुसार,यह एक तरह का चमत्कार था कि वह आज यहाँ खड़ी होकर अपनी कहानी सुना पा रही हैं।

अमेरिका पहुँचने के बाद मचाडो ने वेनेजुएला में जारी संकट को लेकर बेहद सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई को किसी व्यक्तिगत दुश्मनी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए,बल्कि यह एक आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ संघर्ष है। मचाडो के मुताबिक,यह मामला ड्रग कार्टेल,संगठित अपराध और न्याय की लड़ाई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि मादुरो सरकार एक “क्रिमिनल स्ट्रक्चर” का हिस्सा बन चुकी है,जो सत्ता में बने रहने के लिए दमन और हिंसा का सहारा ले रही है।

मचाडो ने जोर देकर कहा कि वह अकेली नहीं हैं,बल्कि लाखों वेनेजुएलावासियों के उस बड़े आंदोलन का प्रतिनिधित्व करती हैं,जिसने आजादी का रास्ता चुन लिया है। उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ उस आंदोलन की एक सदस्य हूँ। लाखों वेनेजुएलावासी आजाद होने का फैसला कर चुके हैं और हम इसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।” उनके अनुसार,यह संघर्ष केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं,बल्कि पूरे देश के भविष्य और गरिमा से जुड़ा हुआ है।

अमेरिका को लेकर मचाडो ने खुलकर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप,उनकी सरकार और अमेरिकी जनता लोकतंत्र,न्याय,आजादी और वेनेजुएला के लोगों के जनादेश का समर्थन करते हैं। उन्होंने वेनेजुएला में बदलाव को सीधे तौर पर अमेरिकी सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि 3 जनवरी के बाद से अमेरिका आज पहले से ज्यादा सुरक्षित देश है। मचाडो के मुताबिक,वेनेजुएला में स्थिरता आने से न केवल वहाँ खुशहाली बढ़ेगी,बल्कि यह क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से भी अहम होगा।

वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली को लेकर मचाडो ने मौजूदा हालात की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अगर देश में संविधान का सम्मान किया जाता,तो आज वहाँ एक हजार से ज्यादा राजनीतिक कैदी नहीं होते। उनके अनुसार,लोकतांत्रिक बदलाव एक लंबी प्रक्रिया है,जिसमें कई चरण शामिल हैं। इसकी शुरुआत अत्याचार को खत्म करने से होनी चाहिए। मचाडो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सभी टॉर्चर सेंटर बंद किए जाने चाहिए और राजनीतिक दमन का अंत होना चाहिए।

उन्होंने पत्रकारों और देश लौटने वाले नागरिकों के लिए सुरक्षा और गारंटी की माँग भी की। मचाडो ने लापता कैदियों के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सैकड़ों लोग ऐसे हैं,जो अचानक गायब हो गए हैं और उनके परिवार आज भी उनके बारे में कोई जानकारी पाने के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं सैकड़ों लोगों की बात कर रही हूँ। वे बस गायब हो गए हैं।” यह बयान वेनेजुएला में मानवाधिकार स्थिति की गंभीरता को उजागर करता है।

मचाडो ने सरकार पर माइग्रेशन को हथियार बनाने का भी आरोप लगाया। उनके मुताबिक,मौजूदा हालात के चलते लाखों वेनेजुएलावासी देश छोड़ने को मजबूर हुए हैं और सरकार इस पलायन को अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि माइग्रेशन की समस्या का स्थायी समाधान केवल लोकतांत्रिक बदलाव से ही संभव है। मचाडो ने कहा कि अगर लोगों को आजादी और सुरक्षा की उम्मीद दिखाई दे,तो वे देश लौटने और समाधान का हिस्सा बनने के लिए तैयार होंगे।

मारिया कोरिना मचाडो की यह कहानी सिर्फ एक नेता के पलायन की नहीं है,बल्कि वह वेनेजुएला में चल रहे गहरे राजनीतिक,सामाजिक और मानवीय संकट की तस्वीर पेश करती है। समुद्र में मौत से सामना करने के बावजूद उनका हौसला और संघर्ष का संकल्प यह दिखाता है कि वह इस लड़ाई को केवल व्यक्तिगत नहीं,बल्कि एक राष्ट्रीय और ऐतिहासिक जिम्मेदारी के रूप में देखती हैं। अमेरिका पहुँचकर भी उनका संदेश साफ है कि वेनेजुएला में बदलाव अपरिहार्य है और यह बदलाव केवल सत्ता के हस्तांतरण तक सीमित नहीं,बल्कि लोकतंत्र,न्याय और मानवाधिकारों की बहाली से जुड़ा हुआ है।