मुंबई,9 फरवरी (युआईटीवी)- शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी स्टारर फिल्म ‘ओ’ रोमियो’ को लेकर लंबे समय से चल रहा कानूनी विवाद अब खत्म होता नजर आ रहा है। बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। 7 फरवरी को सुनाए गए इस फैसले के साथ ही फिल्म की थिएट्रिकल रिलीज का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। कोर्ट के इस निर्णय को न सिर्फ फिल्म के निर्माताओं बल्कि पूरे फिल्म उद्योग के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
यह मामला दिवंगत हुसैन शेख की बेटी द्वारा दायर की गई याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि फिल्म ‘ओ’ रोमियो’ में उनके पिता की निजी जिंदगी और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया गया है और इससे परिवार की भावनाओं को ठेस पहुँचती है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की माँग की थी। हालाँकि,कोर्ट ने लंबी और विस्तृत सुनवाई के बाद इन दलीलों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने अपने फैसले में रचनात्मक अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार और निजता के अधिकार के बीच संतुलन को प्रमुख आधार बनाया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि निजता का अधिकार व्यक्ति-विशेष से जुड़ा होता है और किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद यह अधिकार स्वतः समाप्त हो जाता है। इसे परिवार के सदस्य न तो विरासत में ले सकते हैं और न ही इसका इस्तेमाल किसी फिल्म,किताब या अन्य कलात्मक कृति को रोकने के लिए किया जा सकता है। अदालत के मुताबिक,कानून की नजर में निजता का अधिकार जीवित व्यक्ति तक सीमित होता है।
कोर्ट ने यह भी माना कि ‘ओ’ रोमियो’ एक पूरी तरह काल्पनिक फिल्म है। इसमें साफ तौर पर डिस्क्लेमर दिया गया है कि फिल्म के सभी पात्र और घटनाएँ कल्पना पर आधारित हैं और यदि किसी वास्तविक व्यक्ति से कोई समानता नजर आती है,तो वह महज संयोग है। अदालत ने कहा कि जब किसी फिल्म में ऐसा स्पष्ट डिस्क्लेमर मौजूद हो,तो उसे किसी वास्तविक व्यक्ति के जीवन से जोड़कर देखना उचित नहीं है।
फैसले में एक और अहम पहलू यह रहा कि कोर्ट ने याचिका दायर करने के समय को भी सवालों के घेरे में रखा। अदालत ने कहा कि फिल्म की घोषणा साल 2024 के अंत में ही सार्वजनिक रूप से हो चुकी थी और इसके बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया गया। इसके बावजूद याचिका फिल्म की रिलीज से ठीक कुछ दिन पहले दायर की गई,जो यह दर्शाता है कि इसका उद्देश्य आखिरी समय में रिलीज को रोकना था। कोर्ट के अनुसार,अगर इस स्तर पर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई जाती,तो इससे निर्माताओं,कलाकारों,वितरकों और थिएटर मालिकों को भारी आर्थिक नुकसान होता।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता ने खुद अपने कथित नुकसान को पैसों के संदर्भ में प्रस्तुत किया था। यानी अगर किसी प्रकार का नुकसान हुआ भी है,तो उसकी भरपाई मौद्रिक मुआवजे से की जा सकती है। ऐसे में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने जैसा कठोर कदम उठाने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता। अदालत ने साफ कहा कि सिर्फ संभावित भावनात्मक आहत होने की आशंका के आधार पर किसी कलात्मक कृति को रोका नहीं जा सकता।
इस पूरे मामले में फिल्म की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने मजबूती से पक्ष रखा। साजिद नाडियाडवाला की ओर से बार एंड ब्रीफ अटॉर्नीज ने फिल्म का प्रतिनिधित्व किया,जबकि निर्देशक विशाल भारद्वाज की तरफ से साईकृष्णा एंड एसोसिएट्स ने कानूनी दलीलें पेश कीं। दोनों ही पक्षों ने अदालत को यह समझाने में सफलता पाई कि फिल्म किसी व्यक्ति विशेष की छवि खराब करने के इरादे से नहीं बनाई गई है,बल्कि यह एक रचनात्मक और काल्पनिक कहानी है।
‘ओ’ रोमियो’ विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म है,जिसे साजिद नाडियाडवाला प्रस्तुत कर रहे हैं। फिल्म का निर्माण नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट के बैनर तले किया गया है। फिल्म की स्टार कास्ट भी काफी मजबूत मानी जा रही है। शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी के अलावा इसमें नाना पाटेकर,अविनाश तिवारी,तमन्ना भाटिया और फरीदा जलाल जैसे अनुभवी कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आएँगे।
फिल्म की कहानी मशहूर लेखक हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वींस ऑफ मुंबई’ से प्रेरित बताई जा रही है। इसमें शाहिद कपूर एक माफिया डॉन हुसैन उस्तरा के किरदार में दिखाई देंगे,जबकि तृप्ति डिमरी सपना नाम की महिला का रोल निभा रही हैं। हालाँकि,कोर्ट ने साफ कर दिया कि फिल्म की कहानी और किरदारों को किसी वास्तविक व्यक्ति से सीधे तौर पर जोड़कर नहीं देखा जा सकता,क्योंकि यह एक काल्पनिक सिनेमाई प्रस्तुति है।
कोर्ट के इस फैसले के बाद फिल्म के निर्माताओं ने राहत की सांस ली है। लंबे समय से रिलीज को लेकर बनी अनिश्चितता अब खत्म हो चुकी है और ‘ओ’ रोमियो’ तय समय पर सिनेमाघरों में रिलीज हो सकेगी। फिल्म इंडस्ट्री में इस निर्णय को एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है,जो भविष्य में रचनात्मक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
