‘वंदे मातरम’ के गायन के लिए केंद्र ने जारी किए नए दिशानिर्देश (तस्वीर क्रेडिट@zahidpatka)

‘वंदे मातरम’ के गायन के लिए केंद्र ने जारी किए नए दिशानिर्देश,सरकारी समारोहों में पालन होगा अनिवार्य प्रोटोकॉल

नई दिल्ली,11 फरवरी (युआईटीवी)- केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के गायन और प्रस्तुति को लेकर व्यापक और औपचारिक दिशानिर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी इन निर्देशों का उद्देश्य देशभर में सार्वजनिक और सरकारी कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति को एक समान और गरिमामय स्वरूप देना है। लंबे समय से ‘वंदे मातरम’ के औपचारिक उपयोग को लेकर स्पष्ट प्रोटोकॉल की कमी महसूस की जा रही थी,जिसे अब इन नए दिशा-निर्देशों के माध्यम से दूर करने की कोशिश की गई है।

गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ‘वंदे मातरम’ का संपूर्ण आधिकारिक संस्करण,जिसमें छह श्लोक शामिल हैं और जिसकी कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है,प्रमुख राजकीय समारोहों के दौरान प्रस्तुत या बजाया जाना चाहिए। इन समारोहों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अवसर,राष्ट्रपति और राज्यपालों के आधिकारिक कार्यक्रमों में औपचारिक आगमन और प्रस्थान समारोह तथा उनके निर्धारित भाषणों से पहले और बाद के आयोजन शामिल हैं। मंत्रालय का कहना है कि इन अवसरों पर राष्ट्रीय गीत की गरिमा और महत्व को रेखांकित करना आवश्यक है।

दिशानिर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ और ‘राष्ट्रगान’ दोनों का आयोजन किया जाना हो,तो पहले ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा और उसके बाद ‘राष्ट्रगान’ प्रस्तुत किया जाएगा। यह क्रम सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित किया गया है,ताकि कार्यक्रमों में एकरूपता बनी रहे और किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। मंत्रालय ने इस संबंध में सभी सरकारी विभागों,राज्य सरकारों और संबंधित संस्थानों को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

नए प्रोटोकॉल के तहत दर्शकों और उपस्थित लोगों के आचरण को लेकर भी स्पष्ट अपेक्षाएँ निर्धारित की गई हैं। मंत्रालय ने कहा है कि ‘वंदे मातरम’ और ‘राष्ट्रगान’ दोनों के दौरान उपस्थित लोगों से सम्मान के प्रतीक के रूप में सावधान मुद्रा में खड़े रहने की अपेक्षा की जाती है। यह निर्देश राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति आदर और अनुशासन की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जारी किया गया है। हालाँकि,इसे लेकर अभी कोई नया दंडात्मक कानूनी प्रावधान घोषित नहीं किया गया है।

गृह मंत्रालय ने शिक्षण संस्थानों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया है। निर्देशों में स्कूलों और कॉलेजों से आग्रह किया गया है कि वे दैनिक प्रार्थना सभाओं और महत्वपूर्ण संस्थागत कार्यक्रमों के दौरान ‘वंदे मातरम’ के गायन को बढ़ावा दें। सरकार का मानना है कि इससे विद्यार्थियों और युवाओं में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ेगी। मंत्रालय के अनुसार,राष्ट्रगीत के नियमित गायन से देशभक्ति और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सकारात्मक भाव विकसित किया जा सकता है।

औपचारिकता और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देशों में यह अनुशंसा भी की गई है कि यदि ‘वंदे मातरम’ का प्रदर्शन किसी बैंड द्वारा किया जाता है,तो उससे पहले ढोल की थाप या बिगुल की ध्वनि के माध्यम से इसकी शुरुआत का संकेत दिया जाए। इससे कार्यक्रम में औपचारिक माहौल बनेगा और उपस्थित लोगों को गीत के आरंभ का स्पष्ट संकेत मिलेगा। मंत्रालय का मानना है कि ऐसे प्रतीकात्मक संकेत कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाते हैं।

साथ ही,सिनेमा हॉल और फिल्म स्क्रीनिंग के संदर्भ में विशेष छूट का प्रावधान भी किया गया है। निर्देशों के अनुसार,यदि ‘वंदे मातरम’ किसी फिल्म के साउंडट्रैक का हिस्सा है,तो दर्शकों के लिए खड़े होना अनिवार्य नहीं होगा। मंत्रालय ने तर्क दिया है कि मनोरंजन स्थलों में दर्शकों को खड़े होने के लिए बाध्य करना देखने के अनुभव में व्यवधान उत्पन्न कर सकता है और इससे भ्रम की स्थिति भी पैदा हो सकती है। इस प्रकार,सांस्कृतिक प्रस्तुति और औपचारिक सरकारी समारोहों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखने की कोशिश की गई है।

गृह मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया है कि वह राष्ट्रीय गीत के प्रोटोकॉल को राष्ट्रगान के प्रोटोकॉल के करीब लाने की संभावना की जाँच कर रहा है। वर्तमान में राष्ट्रगान के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश पहले से लागू हैं,जिनमें खड़े होने और सम्मान प्रदर्शित करने के नियम शामिल हैं। मंत्रालय इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या ‘वंदे मातरम’ के लिए भी समान स्तर की औपचारिकता और अपेक्षाएँ निर्धारित की जानी चाहिए। हालाँकि,इस संबंध में अभी तक कोई अंतिम वैधानिक संशोधन या कानूनी प्रावधान लागू नहीं किया गया है।

सरकार के इस कदम को राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा और औपचारिक भूमिका को स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट दिशानिर्देशों से कार्यक्रम आयोजकों और संस्थानों को एक समान मानक अपनाने में सुविधा होगी। इससे अनावश्यक विवादों और व्याख्याओं में भिन्नता की स्थिति से बचा जा सकेगा।

इन नए दिशा-निर्देशों के साथ केंद्र सरकार ने यह संकेत दिया है कि राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान दोनों को समान आदर और गंभीरता के साथ देखा जाना चाहिए। हालाँकि,सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों का उद्देश्य किसी प्रकार की दंडात्मक व्यवस्था लागू करना नहीं,बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और जागरूकता को बढ़ावा देना है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि इन दिशानिर्देशों का विभिन्न राज्यों और संस्थानों में किस प्रकार पालन किया जाता है और क्या इसके लिए आगे कोई कानूनी प्रावधान भी जोड़े जाते हैं।