नई दिल्ली,8 मार्च (युआईटीवी)- ब्रिटेन में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयंशकर की यात्रा के दौरान सुरक्षा उल्लंघन को लेकर भारत ने हाल ही में गहरी चिंता जताई है। इस घटनाक्रम के बाद,भारत ने यूके सरकार से इस विषय पर अपनी सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त की। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बयान जारी कर बताया कि विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान ब्रिटेन में स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों ने लंदन के प्रसिद्ध चैथम हाउस के बाहर उनके काफिले को रोकने की कोशिश की। इस घटना की कड़ी निंदा भारत ही नहीं,बल्कि पूरी दुनिया में की गई।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता,रणधीर जायसवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारत ने ब्रिटिश अधिकारियों को यह संदेश भेजा है कि उनके देश में सुरक्षा व्यवस्था के उल्लंघन की यह घटना गंभीर चिंता का विषय है। जायसवाल ने कहा, “हमने यूके के अधिकारियों को इस बारे में हमारी गहरी चिंता से अवगत कराया है। यह घटना सिर्फ एक व्यक्तिगत घटना नहीं है,बल्कि इससे यह बात सामने आती है कि कुछ ताकतों को खुला लाइसेंस मिल गया है,जो न केवल भारत के खिलाफ बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।”
इस घटना के बारे में यूके के अधिकारियों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसी किसी भी कार्रवाई की निंदा की जानी चाहिए,जिसमें सार्वजनिक कार्यक्रमों को डराने, धमकाने या बाधित करने की कोशिश की जाए। ब्रिटेन के विदेश,राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (एफसीडीओ) ने एक बयान में कहा कि “ऐसा कोई भी प्रयास पूरी तरह से अस्वीकार्य है और इसकी कड़ी निंदा की जाती है।” हालाँकि,भारत ने यूके के बयान को देखकर अपनी चिंताओं का इज़हार किया और कहा कि इसके बावजूद, इस तरह की घटनाओं के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का क्या होगा,यह देखना जरूरी है।
यह घटना कोई नई बात नहीं थी। इससे पहले भी कई बार ब्रिटेन में भारत विरोधी और कट्टरपंथी तत्वों ने भारतीय मिशनों और संस्थानों के खिलाफ प्रदर्शन,हमले और तोड़फोड़ की घटनाओं को अंजाम दिया है। मार्च 2023 में लंदन में भारतीय उच्चायोग के परिसर में खालिस्तानी तत्वों ने उत्पात मचाया था,जिससे भारत ने ब्रिटिश अधिकारियों से इस बात का स्पष्टीकरण माँगा था कि सुरक्षा व्यवस्था की इतनी बड़ी चूक कैसे हुई,जिससे इन उग्र तत्वों को उच्चायोग परिसर में घुसने का मौका मिल गया।
इस घटनाक्रम पर भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “एक्स” पर लिखा कि “ब्रिटिश खालिस्तानी चरमपंथियों को भारत विरोधी गतिविधियों के लिए दी जा रही यह स्वतंत्रता अस्वीकार्य है।” उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन इस मामले में बार-बार भारत की चिंताओं को अनदेखा कर रहा है और शांति की आड़ में खालिस्तानी तत्वों को अपनी गतिविधियों को अंजाम देने की जगह दे रहा है।
विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने कई बार खालिस्तानी चरमपंथियों की आलोचना की है, खासकर उन देशों में जो ऐसे तत्वों को पनाह देते हैं। उन्होंने कहा है कि कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में खालिस्तानी तत्व अपने देश के कानूनों का गलत इस्तेमाल करते हुए स्वतंत्रता का अनुचित लाभ उठा रहे हैं। जयशंकर ने पहले भी कहा है कि “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं हो सकता कि कोई व्यक्ति हिंसा की वकालत करे या आतंकवाद और अलगाववाद का समर्थन करे।”
भारत सरकार का यह मानना है कि खालिस्तानी तत्वों को जो समर्थन मिल रहा है, वह न केवल भारतीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा है,बल्कि यह अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को भी प्रभावित कर सकता है। भारत का यह भी कहना है कि ब्रिटेन, जो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है,को इस तरह के तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए और अपनी धरती पर भारत विरोधी गतिविधियों को सहन नहीं करना चाहिए।
इस मुद्दे पर भारत की स्थिति स्पष्ट है। वह अपनी कूटनीतिक,सुरक्षा और राजनयिक गतिविधियों को बाधित करने वाले ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ा रुख अपना चुका है और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी चिंता जाहिर कर चुका है। भारत का मानना है कि यदि इस तरह की घटनाओं को नजरअंदाज किया जाता है,तो यह न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है।
इस घटना के माध्यम से भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने नागरिकों और अपने राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और किसी भी प्रकार की हिंसा या आतंकवाद के खिलाफ अपनी पूरी ताकत से लड़ने के लिए तैयार है। ब्रिटेन और अन्य देशों से यह उम्मीद की जाती है कि वे भारत की चिंताओं को समझेंगे और उचित कदम उठाएँगे,ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।