मुंबई,19 फरवरी (युआईटीवी)- मुंबई क्रिकेट के लिए आज,19 फरवरी, 2025 को एक बेहद दुखद खबर सामने आई,जब मुंबई के पूर्व कप्तान मिलिंद रेगे का 76 वर्ष के उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके निधन से क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौर गई।रिपोर्ट्स के अनुसार,उनकी किडनी ने भी काम करना बंद कर दिया था। उन्होंने कुछ दिन पहले ही 16 फरवरी को अपना 76वां जन्मदिन मनाया था और इसके कुछ दिनों बाद ही उन्होंने अंतिम सांस ली। मिलिंद रेगे के निधन से मुंबई क्रिकेट में एक महत्वपूर्ण स्थान रिक्त हो गया है और उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
मिलिंद रेगे के परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं। वह घरेलू क्रिकेट के एक बड़े नाम थे और भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर के करीबी दोस्त थे। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ने मुंबई क्रिकेट टीम के लिए एक साथ क्रिकेट खेला था और उनकी साझेदारी ने मुंबई क्रिकेट के इतिहास में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
मिलिंद रेगे का क्रिकेट से प्रेम बेहद गहरा था। हालाँकि,जब वह महज 26 वर्ष के थे, तब उन्हें हार्ट अटैक आया,जिससे उनका क्रिकेट करियर प्रभावित हुआ और उन्हें अपना पसंदीदा खेल छोड़ना पड़ा। यदि उनका स्वास्थ्य ठीक रहता तो वे टीम इंडिया के लिए भी खेल सकते थे,लेकिन दुर्भाग्यवश उनका करियर घरेलू क्रिकेट तक ही सीमित रहा। इसके बावजूद,उन्होंने क्रिकेट के प्रति अपनी श्रद्धा और प्रेम को कभी कम नहीं होने दिया और मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) के लिए अपनी सेवाएँ दीं। वह करीब तीन दशकों तक एमसीए के चयनकर्ता रहे और क्रिकेट सुधार समिति का भी हिस्सा थे। 2020 में, उन्हें एमसीए का सलाहकार नियुक्त किया गया था।
मिलिंद रेगे ने भारतीय क्रिकेट के कई दिग्गजों के करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सबसे खास बात यह है कि जब सचिन तेंदुलकर ने 1988-89 के सत्र में घरेलू क्रिकेट में पदार्पण किया,तब मिलिंद रेगे की अहम भूमिका मानी जाती है। वह उस समय एमसीए की चयन समिति का हिस्सा थे और उनका मानना था कि सचिन में अपार क्षमता है। मिलिंद रेगे की वजह से ही सचिन तेंदुलकर को प्रथम श्रेणी और लिस्ट ए क्रिकेट खेलने का मौका मिला था। उन्होंने सचिन के पहले कदमों को बड़े करीबी से देखा और उनका करियर प्रारंभ से ही मार्गदर्शन किया। सचिन के लिए यह एक महत्वपूर्ण क्षण था और उन्होंने मिलिंद रेगे को धन्यवाद देते हुए उनके योगदान को हमेशा याद किया।
मिलिंद रेगे का क्रिकेट करियर करीब एक दशक तक चला। उन्होंने 1966-67 से 1977-78 तक घरेलू क्रिकेट खेला और इसमें वे एक बेहतरीन स्पिनर के तौर पर सामने आए। हालाँकि,वे कभी भी टीम इंडिया के लिए डेब्यू नहीं कर पाए,लेकिन उनके प्रदर्शन ने घरेलू क्रिकेट में उनका नाम रोशन किया। उन्होंने 52 प्रथम श्रेणी मैच खेले,जिनमें 23.56 की औसत से 1532 रन बनाए और 29.83 की औसत से 126 विकेट लिए। मिलिंद रेगे लगातार पाँच रणजी ट्रॉफी खिताब जीतने वाले सीजन का हिस्सा थे,जो उनके शानदार क्रिकेट करियर का प्रमाण है।
Sad to hear about Milind Rege Sir’s passing. He was a true Mumbai cricketer with immense contributions to the city’s cricket. He and other CCI members saw potential in me and asked me to play for CCI, which, as I look back now, was a landmark moment in my career.
He could pick… pic.twitter.com/MD00ghszkW
— Sachin Tendulkar (@sachin_rt) February 19, 2025
सचिन तेंदुलकर ने मिलिंद रेगे के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, “मिलिंद रेगे सर के निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। वह मुंबई के सच्चे क्रिकेटर थे,जिन्होंने शहर के क्रिकेट में बहुत बड़ा योगदान दिया। उन्होंने मुझमें क्षमता देखी और मुझे क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया। यह मेरे करियर का एक महत्वपूर्ण क्षण था। वह मेहनती उम्मीदवारों के समुद्र में से एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी को चुन सकते थे। उनके पास सभी स्तरों पर प्रतिभा को पहचानने की विशेष छठी इंद्री थी। वह अपने पीछे एक खालीपन छोड़ गए हैं,जिसे भरना मुश्किल है। वह हमारे बीच नहीं हैं,लेकिन उनकी छाप हमेशा रहेगी। उन्होंने बहुत से लोगों के जीवन में बदलाव लाया और निश्चित रूप से मेरे जीवन में भी बदलाव लाया। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएँ।”
मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने भी मिलिंद रेगे के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और लिखा, “श्री मिलिंद रेगे के निधन से बहुत दुखी हूँ। वह मुंबई क्रिकेट के दिग्गज थे,जिन्होंने कप्तान,वरिष्ठ चयन समिति के अध्यक्ष,प्रबंध समिति के सदस्य और सलाहकार के रूप में समर्पण के साथ काम किया। उनकी विरासत को हमेशा याद रखा जाएगा। उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति हार्दिक संवेदना।”
मिलिंद रेगे के निधन के बाद,रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में मुंबई और विदर्भ दोनों टीमों ने उनकी याद में तीसरे दिन का खेल शुरू होने से पहले एक मिनट का मौन रखा। मुंबई के खिलाड़ियों ने भी काली पट्टियाँ पहनकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। यह एक भावुक पल था,जिसमें क्रिकेट जगत ने एक महान खिलाड़ी और समर्पित क्रिकेट प्रशासक को श्रद्धांजलि दी।
मिलिंद रेगे का योगदान केवल उनके खेल के आँकड़ों में ही नहीं,बल्कि उनके मार्गदर्शन और क्रिकेट को लेकर उनके दृष्टिकोण में भी देखने को मिलता है। वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहते थे और उनकी सटीक पहचान ने कई क्रिकेटरों को अपनी क्षमता को पहचानने का अवसर दिया। उनका निधन भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा नुकसान है और उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

