पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल (तस्वीर क्रेडिट@dineshdangi84)

पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल का निधन: भारतीय राजनीति के संतुलन संस्करण की विदाई,90 वर्ष की आयु में ‘देववर’ में ली अंतिम सांस

मुंबई,12 दिसंबर (युआईटीवी)- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का शुक्रवार सुबह अपने पैतृक शहर लातूर स्थित आवास ‘देववर’ में निधन हो गया। 90 वर्ष की आयु में आई इस दुखद खबर ने राष्ट्रीय राजनीति में एक शून्य पैदा कर दिया है। लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार पाटिल का इलाज घर पर ही चल रहा था,लेकिन शुक्रवार सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्होंने अंतिम सांस ले ली। उनके निधन से कांग्रेस पार्टी,भारतीय राजनीतिक परिवार तथा जनता के बीच शोक की लहर दौड़ गई है।

शिवराज पाटिल भारतीय राजनीति के उन दुर्लभ नेताओं में से थे,जिन्‍होंने अपने सार्वजनिक जीवन में अनेक महत्वपूर्ण भूमिकाओं को बखूबी निभाया और देश की राजनीति पर एक गहरा प्रभाव छोड़ा। संतुलित विचारों,शांत स्वभाव तथा उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले पाटिल ने देश के राजनीतिक परिदृश्य में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई।

पाटिल का राजनीतिक जीवन अत्यंत विविध और विस्तृत रहा। वे महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र से संबंध रखते थे और राजनीति में कदम रखते ही उन्होंने अपने सामर्थ्य का परिचय दिया। 1973 में वे पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य चुने गए। इसके पश्चात उन्होंने 1978 तथा 1980 में भी विधानसभा सदस्य के रूप में सेवा दी। विधानसभा में रहते हुए उन्होंने डिप्टी स्पीकर और बाद में स्पीकर के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाया।

1980 में पाटिल ने सातवीं लोकसभा के लिए चुनाव जीतकर राष्ट्रीय राजनीति में अपने कदम स्थिर किए। इसके बाद वे लगातार छह बार लोकसभा सदस्य चुने गए — 1984,1989,1991,1996,1998 और 1999 में। इस लंबी अवधि के दौरान पाटिल ने न केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र को सशक्त आवाज दी वरन् देश के वृहद राजनीतिक हितों की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उनकी संसदीय यात्रा केवल एक सांसद तक सीमित नहीं रही। उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल में विभिन्न मंत्रालयों में भी काम किया। संसद की उच्च सद्भावना बनाए रखने के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्हें लोकसभा का स्पीकर भी बनाया गया,जहाँ उन्होंने सदन की कार्यवाही को निष्पक्ष तथा सुव्यवस्थित रखने की प्रेरणा दी। उनके कार्यकाल में सदन संचालन में गंभीरता तथा संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

हालाँकि,2004 के लोकसभा चुनाव में पाटिल की जीत का सिलसिला रूका,जब वे भाजपा उम्मीदवार रूपाताई पाटिल निलंगेकर से पराजित हुए,लेकिन इसके बाद भी उनका राजनीतिक प्रभाव कम नहीं हुआ। उनके अनुभव,सूझबूझ और विवेकपूर्ण निर्णय-क्षमता को देखकर कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण स्थान दिया और 2004 में केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में जिम्मेदारी सौंपी।

एक गृह मंत्री के रूप में पाटिल के कार्यकाल का सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण क्षण 2008 के मुंबई हमलों के दौरान सामने आया। उस समय देश में आतंकवाद की सबसे भयंकर घटना घटी और इसके प्रभाव ने संपूर्ण राष्ट्र को हिलाकर रख दिया। इस संकट के समय पाटिल ने गृह मंत्रालय की कमान सँभाली और स्थिति से निपटने का भरपूर प्रयास किया। हालाँकि,जवाबदेही तथा आलोचनाओं के बीच उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया,जिसे राजनीतिक विशेषज्ञों तथा सभी दलों के नेताओं ने जिम्मेदारी और मर्यादा का उत्कृष्ट उदाहरण माना।

शिवराज पाटिल न केवल एक राजनेता थे,बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपने शांत और संयत स्वभाव के कारण राजनीति में सम्मान तथा समर्पण दोनो को कायम रखा। कांग्रेस,भाजपा तथा अन्य दलों के कई नेताओं ने जीवन भर उनके व्यवहार एवं सलाह को सराहा। वे हमेशा तर्कसंगत,विचारशील और संतुलन की राजनीति का पक्षधर रहे।

शिक्षा के क्षेत्र में भी पाटिल का सफर प्रेरणादायक रहा। उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से साइंस में डिग्री प्राप्त की तथा बाद में मुंबई यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की। यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उनके विश्लेषणात्मक कौशल तथा न्यायिक दृष्टिकोण का स्रोत रही,जिसने राष्‍ट्रीय तथा क्षेत्रीय राजनीति दोनों में उन्हें सक्षम नेतृत्व प्रदान किया।

बीते कई महीनों से पाटिल स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनकी स्थिति धीरे-धीरे कमजोर होती गयी और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उन्हें अस्पताल के बजाय घर पर ही निगरानी में रखा गया था। इसके बावजूद परिवार और समर्थकों के बीच उनमें राजनीति और जनसेवा की गहरी भावनाएँ बनी रहीं।

शिवराज पाटिल के निधन पर कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने गहरा शोक व्यक्त किया है। पार्टी अध्यक्ष सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदनाएँ प्रकट की हैं। साथ ही विपक्षी दलों और राज्यों के नेताओं ने भी उनके निधन पर दुःख जताया और कहा कि भारतीय राजनीति ने एक संतुलित,संयत तथा नैतिक नेता खो दिया है।

पाटिल के राजनीतिक जीवन ने युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को एक उदाहरण दिया कि कैसे कठिन समय में भी अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदारी तथा देश के प्रति प्रतिबद्धता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके निधन से राजनीति हितों के चर्चित सवालों पर व्यापक विचार-विमर्श जारी रहेगा और उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

पाटिल के राजनीतिक जीवन ने युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को एक उदाहरण दिया कि कैसे कठिन समय में भी अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदारी तथा देश के प्रति प्रतिबद्धता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके निधन से राजनीति हितों के चर्चित सवालों पर व्यापक विचार-विमर्श जारी रहेगा और उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

शिवराज पाटिल का जाना न केवल कांग्रेस पार्टी के लिए अपार क्षति है,बल्कि भारतीय लोकतंत्र के लिए भी एक बड़ा नुकसान है। उनके आत्मीय जीवन,राजनीतिक संतुलन और संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदैव भारतीय राजनीति के महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में अंकित रहेगी। उनके प्रशंसक,अनुयायी तथा राजनीतिक जगत के सभी वर्ग उनके योगदान को स्मृति में रखते हुए श्रद्धांजलि देते हैं।

उनके निधन की खबर ने न केवल लातूर बल्कि पूरे देश में शोक की लहर फैला दी है — एक ऐसे नेता के लिए जिन्होंने देश की राजनीति में सदैव संतुलन,सम्मान और निष्पक्षता के मूल्यों को सर्वोपरि रखा।