पेरिस,22 अक्टूबर (युआईटीवी)- फ्रांस की राजनीति में एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाली घटना दर्ज हुई है। देश के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सारकोजी मंगलवार को पेरिस की मशहूर ला सांते जेल पहुँचे,जहाँ वे अपने खिलाफ चल रहे लीबिया से अवैध धन लेने और चुनावी फंडिंग में अनियमितता के मामले में पाँच साल की सजा काटना शुरू करेंगे। इस तरह वे आधुनिक फ्रांस के पहले ऐसे पूर्व राष्ट्रपति बन गए हैं,जिन्हें जेल की सजा भुगतनी पड़ रही है।
सारकोजी ने जेल जाने से ठीक पहले सोशल मीडिया पर एक भावुक बयान जारी करते हुए कहा, “एक निर्दोष व्यक्ति को जेल में डाला जा रहा है। मैंने हमेशा फ्रांस की सेवा ईमानदारी और सम्मान के साथ की है। मुझे न्याय पर भरोसा है और मैं अंत तक लड़ता रहूँगा।” उनकी इस टिप्पणी ने फ्रांसीसी समाज और राजनीति में गहरी हलचल मचा दी है।
यह मामला करीब 17 साल पुराना है। साल 2007 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने अपने चुनाव अभियान के लिए लीबिया के तत्कालीन तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी से अवैध रूप से धन प्राप्त किया। अदालत ने पिछले महीने उन्हें दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ सारकोजी ने अपील दायर की थी,लेकिन अदालत ने यह कहते हुए अपील लंबित रहने तक भी जेल जाने का आदेश दे दिया कि इस अपराध से “सार्वजनिक व्यवस्था को गंभीर क्षति” पहुँची है।
मंगलवार की सुबह जब सारकोजी अपने पेरिस स्थित घर से निकले,तो उनके साथ उनकी पत्नी और फ्रांस की मशहूर गायिका कार्ला ब्रूनी सारकोजी भी थीं। दोनों हाथ में हाथ डाले घर से बाहर निकले और एक काले रंग की कार में सवार होकर जेल की ओर रवाना हुए। रास्ते भर मीडिया और समर्थकों की भीड़ उमड़ पड़ी। पेरिस के ऊँचे तबके वाले इलाके में उनके घर के बाहर सैकड़ों समर्थक जमा थे,जो “निकोलस, निकोलस” के नारे लगा रहे थे और फ्रांस का राष्ट्रगान गा रहे थे। कई लोगों ने पोस्टर थाम रखे थे,जिन पर लिखा था, “हम तुम्हारे साथ हैं,राष्ट्रपति।”
जेल जाने से कुछ देर पहले सारकोजी और कार्ला ब्रूनी ने अपने बच्चों और नाती-पोतों से मुलाकात की। यह भावुक क्षण था जब उनके बेटे जीन,पियरे,लुई और बेटी जूलिया तथा उनके नाती-पोते घर के बाहर एकत्र हुए थे। बताया जाता है कि सारकोजी ने परिवार को आश्वस्त किया कि वे “हिम्मत नहीं हारेंगे” और “अपने नाम की बेगुनाही साबित करने के लिए हर कानूनी रास्ता अपनाएंगे।”
फ्रांसीसी अखबार ले पेरिसिएन ने रिपोर्ट किया कि सारकोजी ने जेल जाने से पहले अपने लिए एक छोटा-सा बैग तैयार किया था,जिसमें कपड़ों के अलावा परिवार की 10 तस्वीरें और तीन किताबें रखी थीं। उन्होंने अखबार से कहा, “मुझे जेल से डर नहीं है। मैं सिर ऊँचा रखूँगा,चाहे मुझे ला सांते के दरवाजों के सामने ही क्यों न खड़ा होना पड़े। मैं आखिरी दम तक अपनी लड़ाई जारी रखूँगा।”
फ्रांस की राजधानी पेरिस की ला सांते जेल देश की सबसे पुरानी और सख्त सुरक्षा वाली जेलों में से एक मानी जाती है। इस जेल में पहले भी कई नामचीन अपराधियों,राजनेताओं और पत्रकारों को रखा जा चुका है। हालाँकि,सुरक्षा कारणों से सारकोजी को अन्य कैदियों से अलग एक एकांत कारावास में रखा गया है। उनके वकील क्रिस्टोफ इंग्रैन ने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है,इसलिए उन्हें विशेष सुविधाएँ दी गई हैं,ताकि किसी भी तरह का खतरा न हो।
वकील इंग्रैन ने एक इंटरव्यू में कहा, “निकोलस सारकोजी एक लड़ाकू व्यक्ति हैं। जेल में डाले जाने से उनका संकल्प और उनकी बेगुनाही साबित करने का जुनून और मजबूत हुआ है। उन्होंने हमसे कहा है कि वे जेल में भी अपनी अगली कानूनी रणनीति पर काम करेंगे और संभव है कि इस अनुभव पर एक किताब भी लिखें।”
इस फैसले ने फ्रांस की राजनीति को गहराई से झकझोर दिया है। देश में इस पर तीखी प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। सारकोजी के समर्थकों का कहना है कि यह फैसला “राजनीतिक प्रतिशोध” से प्रेरित है,जबकि उनके आलोचक इसे “कानून के सामने समानता” का प्रतीक बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर #जस्टिस फॉर सारकोजी
और #नो वन अबोव लॉ जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं।
फ्रांस के राजनीतिक इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है,जब किसी पूर्व राष्ट्रपति को जेल भेजा गया है। इससे पहले जैक्स शिराक को भ्रष्टाचार के आरोप में दो साल की सजा सुनाई गई थी,लेकिन उनकी तबीयत खराब होने के कारण उन्हें जेल नहीं भेजा गया था। इस दृष्टि से सारकोजी का मामला अभूतपूर्व है।
फ्रांसीसी कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला फ्रांस के लोकतंत्र के लिए एक “कठिन लेकिन जरूरी सबक” है। राजनीतिक विश्लेषक जीन-मार्क ब्लांक ने कहा,“यह संदेश देता है कि चाहे कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो,अगर उसने कानून तोड़ा है तो उसे जवाब देना ही पड़ेगा।”
सारकोजी की जेल यात्रा उनके राजनीतिक जीवन का सबसे कठिन अध्याय है। राष्ट्रपति पद से लेकर जेल की सलाखों तक का यह सफर न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित कर रहा है,बल्कि फ्रांस की न्यायिक प्रणाली की साख की भी परीक्षा ले रहा है। हालाँकि,उनके करीबी मानते हैं कि वे एक दिन अपनी बेगुनाही साबित कर लेंगे और यह फैसला फ्रांस की राजनीति में लंबे समय तक बहस का विषय बना रहेगा।
अभी के लिए पेरिस की सड़कों पर एक ही चर्चा है कि क्या निकोलस सारकोजी सच में दोषी हैं या राजनीति ने एक पूर्व राष्ट्रपति को न्याय से पहले ही सजा दे दी है? लेकिन इतना तय है कि फ्रांस ने एक ऐसा दिन देख लिया है,जब उसके एक पूर्व राष्ट्रपति को कानून के तहत जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा और यह दृश्य आने वाले कई वर्षों तक फ्रांसीसी जनमानस की स्मृतियों में दर्ज रहेगा।
