नूक/पेरिस,7 फरवरी (युआईटीवी)- आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक हलचलों के बीच फ्रांस ने ग्रीनलैंड में अपना वाणिज्य दूतावास खोलकर एक अहम कूटनीतिक कदम उठाया है। इसके साथ ही फ्रांस स्वायत्त डेनिश क्षेत्र ग्रीनलैंड में औपचारिक राजनयिक मिशन स्थापित करने वाला पहला यूरोपीय संघ देश बन गया है। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि जां-नोएल पोइरियर ने ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में कांसुल जनरल के रूप में पदभार सँभाल लिया है। इस पहल को फ्रांस के कांसुलर नेटवर्क के विस्तार और आर्कटिक क्षेत्र में उसकी मौजूदगी को मजबूत करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा जानकारी में कहा कि नूक में कांसुलेट की स्थापना न केवल फ्रांसीसी नागरिकों और हितों की रक्षा के लिए अहम होगी,बल्कि यह ग्रीनलैंड के साथ दीर्घकालिक सहयोग को भी नई दिशा देगी। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने जून 2025 में ग्रीनलैंड की यात्रा के दौरान पहली बार वहाँ वाणिज्य दूतावास खोलने की योजना का ऐलान किया था। उसी यात्रा के दौरान उन्होंने यह संकेत दिया था कि आर्कटिक क्षेत्र में बदलते रणनीतिक,पर्यावरणीय और आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए फ्रांस अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहता है। इस सप्ताह की शुरुआत में राष्ट्रपति मैक्रों ने जां-नोएल पोइरियर की नियुक्ति से संबंधित आदेश पर हस्ताक्षर किए,जिसके बाद यह योजना औपचारिक रूप से अमल में आ गई।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार,जां-नोएल पोइरियर एक अनुभवी राजनयिक हैं और इससे पहले 2012 से 2016 तक वियतनाम में फ्रांस के राजदूत के रूप में सेवाएँ दे चुके हैं। ग्रीनलैंड में उनके कार्यकाल की प्राथमिकताओं में वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देना,फ्रांसीसी कंपनियों को निवेश और कारोबार के अवसरों के बारे में मार्गदर्शन देना और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर ग्रीनलैंड की उपसतह में मौजूद खनिज संसाधनों की संभावनाओं का आकलन करना शामिल है। माना जा रहा है कि दुर्लभ खनिजों और ऊर्जा संसाधनों से भरपूर ग्रीनलैंड आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाओं में अहम भूमिका निभा सकता है।
फ्रांस के विदेश मंत्री जां-नोएल बैरो ने पिछले महीने इस कांसुलेट को लेकर बयान देते हुए कहा था कि ग्रीनलैंड में वाणिज्य दूतावास खोलना केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं है,बल्कि यह एक “राजनीतिक संकेत” भी है। उनके मुताबिक,यह कदम यह दर्शाता है कि फ्रांस सभी स्तरों पर ग्रीनलैंड में अपनी मौजूदगी को मजबूत करना चाहता है,चाहे वह कूटनीतिक हो,आर्थिक हो या वैज्ञानिक। बैरो के बयान को आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में भी देखा जा रहा है,जहाँ कई वैश्विक शक्तियाँ अपने हित साधने में लगी हैं।
ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में फ्रांस के अलावा अन्य देश भी अपनी राजनयिक उपस्थिति बढ़ा रहे हैं। कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद भी शुक्रवार को वहाँ एक नया वाणिज्य दूतावास खोलने वाली हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ के पिघलने से नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं और प्राकृतिक संसाधनों तक पहुँच आसान हो रही है,जिसने इस क्षेत्र को रणनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।
इसी बीच,नाटो से जुड़ी गतिविधियों ने भी इस क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है। मंगलवार को एक अधिकारी ने बताया कि नाटो ने ‘आर्कटिक सेंट्री’ नामक मिशन के लिए सैन्य योजना बनाना शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच जारी तनाव के बीच निगरानी और सतर्कता को बढ़ाना है। नाटो के एक अधिकारी ने शिन्हुआ को बताया कि आर्कटिक सेंट्री की योजना पर काम चल रहा है, हालाँकि इससे जुड़े विस्तृत विवरण साझा नहीं किए गए। इससे पहले नाटो के सुप्रीम हेडक्वार्टर्स एलाइड पावर्स यूरोप के प्रवक्ता मार्टिन ओ’डॉनेल ने कहा था कि यह पहल आर्कटिक और उत्तरी क्षेत्रों में नाटो की स्थिति को और मजबूत करेगी।
ग्रीनलैंड को लेकर अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ती दिलचस्पी का एक बड़ा कारण अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान भी रहे हैं। ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान कई बार ग्रीनलैंड को हासिल करने की इच्छा जाहिर की थी,जिससे डेनमार्क और यूरोप के अन्य देशों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। ग्रीनलैंड,डेनमार्क के साम्राज्य के भीतर एक स्वशासित क्षेत्र है और वहाँ की सरकार ने साफ तौर पर किसी भी तरह के अधिग्रहण के विचार को खारिज किया है। ट्रंप के बयानों को लेकर यूरोप में व्यापक स्तर पर असहमति और चिंता व्यक्त की गई थी।
हाल ही में ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने डेनिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका के साथ राजनयिक वार्ता दोबारा शुरू होने के बावजूद वाशिंगटन की ग्रीनलैंड पर नजर अब भी बनी हुई है। उनके इस बयान से यह साफ झलकता है कि ग्रीनलैंड का मुद्दा केवल आर्थिक या पर्यावरणीय नहीं,बल्कि गहरे रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं से भी जुड़ा हुआ है।
इन तमाम घटनाक्रमों के बीच फ्रांस का ग्रीनलैंड में कांसुलेट खोलना एक संतुलित और दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। फ्रांस जहाँ एक ओर वैज्ञानिक अनुसंधान,पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता देने की बात कर रहा है,वहीं दूसरी ओर यह कदम उसे आर्कटिक क्षेत्र में उभरती कूटनीतिक और रणनीतिक चर्चाओं का सक्रिय हिस्सा भी बनाता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि फ्रांस की यह पहल ग्रीनलैंड में यूरोपीय संघ की भूमिका को किस तरह आकार देती है और आर्कटिक क्षेत्र की बदलती भू-राजनीति में क्या नया मोड़ लाती है।
