कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (तस्वीर क्रेडिट@kaankit)

अमेरिका के टैरिफ फैसले से नाराज कनाडा: प्रधानमंत्री मार्क कार्नी बोले- कनाडाई नौकरियों की करेंगे रक्षा,’बाय कनाडियन’ नीति को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली,1 अगस्त (युआईटीवी)- वाशिंगटन और ओटावा के बीच व्यापारिक रिश्तों में इन दिनों तनाव का माहौल है। अमेरिका द्वारा कनाडा के कुछ निर्यात उत्पादों पर 35 फीसदी टैरिफ लगाए जाने की घोषणा से कनाडा सरकार और उद्योग जगत में नाराजगी देखी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस फैसले की घोषणा किए जाने के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सार्वजनिक रूप से निराशा व्यक्त की है और देशवासियों को आश्वासन दिया है कि सरकार उनके रोजगार,उद्योग और आर्थिक हितों की पूरी सुरक्षा करेगी।

प्रधानमंत्री कार्नी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि हम अमेरिका द्वारा लिए गए इस एकतरफा निर्णय से गहराई से निराश हैं। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कनाडा अभी भी अमेरिका और मैक्सिको के साथ हुए कनाडा-संयुक्त राज्य-मेक्सिको समझौते (सीयूएसएमए) को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह समझौता, व्यापारिक मात्रा के हिसाब से,विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है और कनाडा इसकी मूल भावना और प्रावधानों का सम्मान करता है।

अमेरिकी प्रशासन द्वारा लगाए गए नए टैरिफ उन उत्पादों पर लागू होंगे,जो सीयूएसएमए की परिधि में नहीं आते। इन उत्पादों में प्रमुख रूप से लकड़ी,स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल शामिल हैं,जो कनाडा के निर्यात और घरेलू रोजगार के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण उद्योग हैं। इन क्षेत्रों में नए शुल्क से कनाडा को आर्थिक झटका लग सकता है,लेकिन प्रधानमंत्री कार्नी ने भरोसा दिलाया है कि उनकी सरकार ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हम कनाडाई नागरिकों की नौकरियों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएँगे। सरकार ‘बाय कनाडियन’ नीति को बढ़ावा देगी,ताकि घरेलू उत्पादन और उपभोग को प्राथमिकता दी जा सके। साथ ही,कनाडा अपने निर्यात बाजारों को विविध बनाएगा और अमेरिकी निर्भरता को धीरे-धीरे कम करेगा। उन्होंने कहा कि औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में निवेश किया जाएगा,ताकि कनाडा वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को और मजबूत कर सके।

अमेरिका ने इन टैरिफों को लागू करने के पीछे फेंटानिल जैसे घातक ड्रग्स की सीमा पार तस्करी को कारण बताया है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि कनाडा के माध्यम से अमेरिका में फेंटानिल की आपूर्ति हो रही है,जिससे देश को सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर नुकसान हो रहा है। हालाँकि,कनाडा ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है और आँकड़ों के जरिए बताया है कि अमेरिका में आने वाले कुल फेंटानिल का केवल 1 प्रतिशत हिस्सा कनाडा से आता है। इसके बावजूद कनाडा इस समस्या को गंभीरता से ले रहा है और इससे निपटने के लिए व्यापक कदम उठा रहा है।

प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा कि उनकी सरकार सीमा सुरक्षा में ऐतिहासिक निवेश कर रही है। इसके तहत हजारों नए कानून प्रवर्तन अधिकारियों की तैनाती की जा रही है, अत्याधुनिक हवाई निगरानी की जा रही है और खुफिया तंत्र को मजबूत किया गया है। इसके अलावा,अब तक का सबसे कठोर सीमा सुरक्षा कानून भी लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य ट्रांसनेशनल गैंग्स,ड्रग्स की तस्करी और मानव तस्करी जैसी समस्याओं से सख्ती से निपटना है। कार्नी ने कहा कि कनाडा अमेरिका के साथ मिलकर फेंटानिल संकट से निपटने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है,क्योंकि यह सिर्फ एक देश की नहीं बल्कि एक साझा चुनौती है।

बातचीत के द्वार खुले रखने की बात करते हुए प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा कि कनाडा अमेरिका के साथ व्यापारिक मसलों पर संवाद जारी रखेगा,लेकिन,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कनाडा अब अपने आंतरिक विकास पर और अधिक ध्यान केंद्रित करेगा। उन्होंने वन कनाडा इकोनॉमी की परिकल्पना प्रस्तुत की,जिसके तहत संघीय, प्रांतीय और क्षेत्रीय सरकारें मिलकर देश के संसाधनों,श्रमबल और निवेश क्षमताओं का एकीकृत विकास करेंगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हम अपने आदिवासी और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर ऐसे राष्ट्रीय विकास कार्यक्रम शुरू कर रहे हैं,जिनसे अगले कुछ वर्षों में आधे ट्रिलियन डॉलर से अधिक का निवेश कनाडा में हो सकता है। यह निवेश देश की बुनियादी ढाँचे,ऊर्जा,तकनीक और स्वास्थ्य क्षेत्रों को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। इसके अलावा,ये परियोजनाएँ कनाडाई युवाओं को घर के नजदीक रोजगार के अवसर भी प्रदान करेंगी।

प्रधानमंत्री कार्नी ने अपने संबोधन का अंत एक आत्मनिर्भर और गर्वित कनाडा की कल्पना से किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कनाडाई नागरिक खुद अपने सबसे बड़े ग्राहक बनें और घरेलू उत्पादन और रोजगार को प्राथमिकता दें। अगर हम कनाडाई संसाधनों और श्रमिकों के बल पर निर्माण करें,तो हम खुद को वह सब कुछ दे सकते हैं,जिसकी हमें ज़रूरत है और वह किसी विदेशी सरकार से कहीं अधिक मूल्यवान होगा।

कनाडा की यह प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि भले ही व्यापारिक विवाद अमेरिका जैसे बड़े साझेदार से हो,लेकिन कनाडा अपनी आर्थिक संप्रभुता,औद्योगिक क्षमता और नागरिकों की भलाई से कोई समझौता नहीं करेगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देशों के बीच यह टैरिफ युद्ध किस दिशा में आगे बढ़ता है अर्थात तनाव और बढ़ेगा या बातचीत से समाधान निकलेगा।