एलपीजी सिलेंडर

मुंबई में गैस संकट की आहट,कमर्शियल सिलेंडर की कमी से 20% होटल-रेस्तरां बंद; 72 घंटे में समाधान न हुआ तो आधे प्रतिष्ठान ठप होने की चेतावनी

मुंबई,10 मार्च (युआईटीवी)- मुंबई के होटल और रेस्तरां उद्योग पर इन दिनों गैस आपूर्ति संकट का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी के कारण शहर के कई होटल और रेस्तरां पहले ही प्रभावित हो चुके हैं। उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि यदि जल्द ही स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है। इस बीच इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (एएचएआर) ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।

आहार के अनुसार कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति में आई अचानक कमी के कारण मुंबई के करीब 20 प्रतिशत होटल और रेस्तरां को अपना संचालन बंद करना पड़ा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 72 घंटों के भीतर गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई,तो शहर के लगभग 50 प्रतिशत रेस्तरां बंद होने की नौबत आ सकती है। यह स्थिति न केवल आतिथ्य उद्योग,बल्कि लाखों लोगों की आजीविका और रोजमर्रा की जरूरतों को भी प्रभावित कर सकती है।

इस संकट को लेकर आहार ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को एक विस्तृत पत्र लिखकर समस्या का समाधान करने की माँग की है। पत्र में संगठन ने बताया है कि गैस आपूर्ति में आई बाधा के कारण होटल और रेस्तरां उद्योग के सामने गंभीर परिचालन संकट पैदा हो गया है। संगठन ने यह भी कहा कि वर्तमान स्थिति वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़ी हुई है,लेकिन इसके प्रभाव से स्थानीय उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

आहार के अध्यक्ष विजय शेट्टी ने कहा कि मुंबई के हजारों होटल और रेस्तरां अपने दैनिक संचालन के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं। यदि गैस की आपूर्ति बाधित होती है,तो खाना पकाने का काम ठप हो जाता है और व्यवसाय चलाना लगभग असंभव हो जाता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो शहर का आधा आतिथ्य उद्योग बंद हो सकता है,जिससे आर्थिक गतिविधियों पर भी व्यापक असर पड़ेगा।

गैस संकट को लेकर आहार का एक प्रतिनिधिमंडल महाराष्ट्र सरकार से भी संपर्क कर रहा है। संगठन के प्रतिनिधि आज महाराष्ट्र के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल से मुलाकात करेंगे और उन्हें मौजूदा स्थिति से अवगत कराएँगे। इस बैठक में उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि सरकार से यह आग्रह करेंगे कि कम-से-कम न्यूनतम स्तर पर गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि होटल और रेस्तरां का संचालन पूरी तरह बंद न हो।

दरअसल इस संकट के पीछे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता तनाव भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। हाल के दिनों में अमेरिका,इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण खाड़ी क्षेत्र में समुद्री गतिविधियाँ प्रभावित हुई हैं। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास टैंकरों की आवाजाही पर असर पड़ा है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है और खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल व गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

भारत भी अपनी एलपीजी जरूरतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इसी समुद्री मार्ग के जरिए आयात करता है। ऐसे में यदि इस मार्ग पर परिवहन प्रभावित होता है,तो उसका असर सीधे देश की गैस आपूर्ति पर पड़ता है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर अक्सर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है और वर्तमान स्थिति भी उसी का परिणाम है।

आहार ने अपने पत्र में बताया कि उनका संगठन मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 8,000 छोटे रेस्तरां,होटल और परमिट रूम का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अलावा महाराष्ट्र में 65 संबद्ध संस्थाएँ भी इस संगठन से जुड़ी हुई हैं। इस तरह यह राज्य के आतिथ्य उद्योग का एक बड़ा प्रतिनिधि संगठन है,जो छोटे उद्यमों से लेकर स्टार श्रेणी के होटलों तक के हितों की आवाज उठाता है।

संगठन के मुताबिक होटल और रेस्तरां उद्योग केवल व्यवसायिक गतिविधि ही नहीं,बल्कि रोजगार का भी एक बड़ा स्रोत है। आहार के अनुसार महाराष्ट्र में इस क्षेत्र से करीब 40 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है,जबकि लगभग 1 करोड़ 60 लाख लोग अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग पर निर्भर हैं। इनमें बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर और छोटे स्वरोजगार करने वाले लोग शामिल हैं।

आहार ने यह भी कहा कि यदि गैस आपूर्ति पूरी तरह बंद हो जाती है,तो इसका सबसे ज्यादा असर इन्हीं श्रमिकों और छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा। होटल और रेस्तरां बंद होने से हजारों कर्मचारियों की आय रुक सकती है और इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। संगठन ने चेतावनी दी है कि इस तरह की स्थिति से राज्य की अर्थव्यवस्था और सरकारी राजस्व पर भी असर पड़ेगा।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि शहर के लाखों लोग अपने दैनिक भोजन के लिए रेस्तरां और छोटे होटलों पर निर्भर रहते हैं। खासकर प्रवासी श्रमिक और निम्न आय वर्ग के लोग सस्ती और सुलभ भोजन व्यवस्था के लिए इन प्रतिष्ठानों पर भरोसा करते हैं। यदि बड़ी संख्या में रेस्तरां बंद हो जाते हैं,तो इन लोगों के लिए भी भोजन की उपलब्धता एक समस्या बन सकती है।

आहार ने सरकार से यह भी कहा है कि उद्योग कठिन परिस्थितियों को समझता है और वैश्विक हालात को देखते हुए सहयोग करने के लिए तैयार है। संगठन ने सुझाव दिया है कि यदि आवश्यक हो तो उद्योग पीएनजी या गैस आपूर्ति में लगभग 25 प्रतिशत तक की कटौती के साथ काम चला सकता है,लेकिन यदि गैस आपूर्ति पूरी तरह बंद हो जाती है या 100 प्रतिशत कटौती कर दी जाती है,तो होटल और रेस्तरां का संचालन व्यावहारिक रूप से असंभव हो जाएगा।

इसलिए संगठन ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह इस संकट में हस्तक्षेप करे और यह सुनिश्चित करे कि आतिथ्य उद्योग को कम से कम न्यूनतम स्तर पर गैस आपूर्ति मिलती रहे। इससे रेस्तरां और होटल अपनी सेवाएँ जारी रख सकेंगे और कर्मचारियों की आजीविका भी सुरक्षित रह सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई जैसे बड़े महानगर में होटल और रेस्तरां उद्योग केवल पर्यटन और मनोरंजन से जुड़ा क्षेत्र नहीं है,बल्कि यह शहर की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस उद्योग से जुड़े हजारों छोटे व्यवसाय और लाखों कर्मचारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं।

अब सभी की नजर केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। यदि जल्द ही गैस आपूर्ति की समस्या का समाधान नहीं निकला तो मुंबई के आतिथ्य उद्योग को एक बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले कुछ दिन इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं,क्योंकि उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही कोई ठोस कदम उठाएगी।