गिग वर्कर्स (तस्वीर क्रेडिट@OpIndia_in)

गिग वर्कर्स को मिलेगा बड़ा सुरक्षा कवच: श्रम मंत्रालय ने चार नए लेबर कोड के ड्राफ्ट जारी किए

नई दिल्ली,3 जनवरी (युआईटीवी)- श्रम और रोजगार मंत्रालय ने देश के श्रम ढाँचे में बड़े सुधार की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए चार नए लेबर कोड के ड्राफ्ट नियम जारी कर दिए हैं। इन ड्राफ्ट नियमों के लागू होने के बाद खासकर गिग और प्लेटफॉर्म आधारित काम करने वाले लाखों श्रमिकों को पहली बार व्यापक सामाजिक सुरक्षा,न्यूनतम वेतन और बेहतर कार्य परिस्थितियों का कानूनी अधिकार मिल सकेगा। सरकार का लक्ष्य है कि सभी चारों लेबर कोड को एक अप्रैल से पूरे देश में लागू किया जाए,ताकि अनियमित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक भी औपचारिक संरक्षा प्रणाली के दायरे में आ सकें।

ड्राफ्ट के अनुसार,सोशल सिक्योरिटी का लाभ उठाने के लिए गिग कर्मचारियों को कम-से-कम 90 दिनों तक किसी एक प्लेटफॉर्म से जुड़कर काम करना होगा। यदि कोई कर्मचारी एक ही समय में दो प्लेटफॉर्म पर काम करता है,तो यह सीमा 120 दिन कर दी गई है। यह प्रावधान ऐसे कामगारों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गिग सेक्टर में रोजगार की प्रकृति लचीली और अस्थिर मानी जाती है। ड्राफ्ट में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कैलेंडर दिन में यदि कर्मचारी किसी एग्रीगेटर के लिए काम कर आय अर्जित करता है,चाहे वह आय कितनी भी हो,उस दिन को कार्य दिवस माना जाएगा। इससे उन कामगारों को राहत मिलेगी,जो रोज़ अलग-अलग समय या छोटे-छोटे कार्यों से अपनी जीविका चलाते हैं।

नियमों में यह भी कहा गया है कि यदि कोई कर्मचारी एक दिन में तीन अलग-अलग एग्रीगेटरों के साथ जुड़ा रहता है,तो उसे तीन कार्य दिवसों के रूप में गिना जाएगा। इसके साथ ही,यदि कोई श्रमिक एक से अधिक एग्रीगेटर से जुड़ा है,तो उन सभी में काम के दिनों को जोड़कर उसकी कुल सेवा अवधि तय की जाएगी। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है,ताकि वास्तविक काम के हिसाब से लाभों की गणना हो सके और गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल होने में कोई तकनीकी बाधा न रहे।

न्यूनतम मजदूरी के प्रावधानों को भी नए सिरे से परिभाषित किया गया है। ड्राफ्ट के अनुसार,जब एक दिन की मजदूरी तय की जाएगी,तो उसे आठ से विभाजित कर प्रति घंटे की मजदूरी निकाली जाएगी और फिर उसे छब्बीस से गुणा कर मासिक मजदूरी निर्धारित होगी। न्यूनतम मजदूरी तय करते समय सरकार भौगोलिक परिस्थितियों, रोजगार के स्वरूप,अनुभव और कौशल स्तर जैसे तत्वों को ध्यान में रखेगी। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि अलग-अलग क्षेत्रों और उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों को उनकी परिस्थितियों के अनुरूप न्यायसंगत पारिश्रमिक मिले।

सरकार ने इन ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक कर सभी हितधारकों—नियोक्ता संगठनों,ट्रेड यूनियनों,उद्योग समूहों और आम नागरिकों से सुझाव और आपत्तियाँ आमंत्रित की हैं। मंत्रालय का कहना है कि अंतिम नियम तैयार करते समय सभी पक्षों की राय पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि यह नोटिफिकेशन 30 दिसंबर,2025 को उस समय जारी किया गया,जब देश के कई हिस्सों में गिग वर्कर्स की असंतोष की आवाजें उठ रही थीं और हड़ताल की चेतावनी दी जा रही थी।

इन लेबर कोड में वेतन संहिता,औद्योगिक संबंध संहिता,सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा,स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियाँ संहिता शामिल हैं। चारों कोड एक ही दिन अधिसूचित किए गए थे,लेकिन अब उनके ड्राफ्ट नियमों के जरिए लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया तय की जा रही है। नया ढाँचा लंबे समय से चली आ रही जटिल और बिखरी हुई श्रम कानून प्रणाली की जगह लेगा।

नई व्यवस्था के तहत नियोक्ताओं के लिए हर श्रमिक को नियुक्ति पत्र जारी करना अनिवार्य होगा। पहले नियुक्ति पत्र जारी करना एक वैकल्पिक प्रक्रिया थी,जिसके कारण बड़े पैमाने पर श्रमिकों को न तो स्पष्ट शर्तों की जानकारी होती थी और न ही नौकरी की सुरक्षा के लिहाज से कोई लिखित दस्तावेज उपलब्ध रहता था। अब यह व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाएगी और नियुक्ति के दौरान तय शर्तों पर विवाद की गुंजाइश कम करेगी।

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों सहित सभी श्रमिकों को पीएफ,ईएसआईसी,बीमा और अन्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलने का प्रावधान है। पहले यह कवरेज केवल संगठित क्षेत्र के सीमित वर्ग तक सिमटा हुआ था। अब लाखों डिलीवरी एजेंट,कैब ड्राइवर,फ्रीलांसर जैसे कामगार,जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर हैं,भी इन योजनाओं के लिए पात्र बन सकते हैं। इससे न केवल उनकी वृद्धावस्था और आपदा के समय सुरक्षा बढ़ेगी,बल्कि वे औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनकर लंबी अवधि की स्थिरता महसूस करेंगे।

वेतन संहिता, 2019 के तहत सभी श्रमिकों के लिए वैधानिक न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित की जाएगी और समय पर भुगतान को कानूनी जिम्मेदारी बनाया जाएगा। पहले न्यूनतम मजदूरी केवल चुनिंदा अनुसूचित उद्योगों पर लागू होती थी,जिससे बड़ी संख्या में श्रमिक इस सुरक्षा से वंचित रह जाते थे। अब यह स्थिति बदलने की दिशा में सरकार का यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

औद्योगिक संबंध संहिता का उद्देश्य श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच संतुलन स्थापित करना और विवाद निपटान की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है। वहीं,व्यावसायिक सुरक्षा,स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियाँ संहिता कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों,स्वास्थ्य सुविधाओं और बेहतर पर्यावरण पर जोर देती है। गिग सेक्टर में जहाँ काम का स्वरूप अक्सर अनौपचारिक रहता है,इन नियमों के बाद नियोक्ताओं पर न्यूनतम सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।

आलोचकों का मानना है कि इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के बिना श्रमिकों को वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा। जबकि समर्थकों का तर्क है कि यह कदम भारत के श्रम बाजार को आधुनिक और समावेशी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हो सकता है। गिग अर्थव्यवस्था देश में तेजी से बढ़ रही है और लाखों युवा इससे जुड़े हुए हैं। ऐसे में उनके लिए सामाजिक सुरक्षा की ठोस व्यवस्था बनाना समय की माँग है।

सरकार का कहना है कि लेबर कोड लागू होने के बाद श्रम कानूनों की जटिलता कम होगी,निवेश माहौल बेहतर बनेगा और श्रमिकों को स्पष्ट अधिकार और सुरक्षा मिलेगी। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि हितधारकों के सुझावों को शामिल करते हुए अंतिम नियम कब तक जारी होते हैं और 1 अप्रैल से इनका जमीन पर क्रियान्वयन किस तरह आगे बढ़ता है। यदि यह प्रक्रिया सफल रही,तो गिग वर्कर्स सहित देश के करोड़ों श्रमिकों के लिए यह नया अध्याय आर्थिक सुरक्षा,सम्मान और स्थिरता का मजबूत आधार साबित हो सकता है।