जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विपुल पंचोली ने शपथ ग्रहण किया (तस्वीर क्रेडिट@CiteCase)

सुप्रीम कोर्ट को दो नए न्यायाधीश मिले,जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विपुल पंचोली ने शपथ ग्रहण किया

नई दिल्ली,29 अगस्त (युआईटीवी)- सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा,जब दो नए न्यायाधीशों ने पद की शपथ ली। भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) बी.आर. गवई ने जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली को शपथ दिलाई। यह शपथ ग्रहण समारोह केंद्र सरकार की ओर से नियुक्तियों को मंजूरी दिए जाने के महज दो दिन बाद संपन्न हुआ। इस नियुक्ति के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या अब 34 हो गई है,जिसमें मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं।

दोनों न्यायाधीश उच्च न्यायालयों में लंबे समय तक न्यायिक सेवा देकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचे हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे आलोक अराधे और पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे विपुल पंचोली ने अब देश की सर्वोच्च अदालत में अपनी नई पारी की शुरुआत की है। कॉलेजियम ने इन दोनों नामों की सिफारिश हाल ही में की थी और केंद्र सरकार ने भी त्वरित कार्रवाई करते हुए राष्ट्रपति की मंजूरी से इन्हें नियुक्त कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जारी बयान में कहा गया कि 25 अगस्त को हुई बैठक में कॉलेजियम ने दो हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को सर्वोच्च अदालत में पदोन्नत करने की अनुशंसा की थी। इसी प्रक्रिया के तहत 27 अगस्त को केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से यह जानकारी दी कि राष्ट्रपति ने सीजेआई से परामर्श के बाद दोनों न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी प्रदान कर दी है।

जस्टिस आलोक अराधे का न्यायिक सफर काफी लंबा और अनुभवपूर्ण रहा है। उनका जन्म 13 अप्रैल 1964 को हुआ था। उन्होंने 1988 में वकालत की शुरुआत की और 2007 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा मिला। दिसंबर 2009 में उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया और फरवरी 2011 में वे स्थायी न्यायाधीश बन गए। इसके बाद 2016 में उनका स्थानांतरण जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में हुआ,जहाँ 2018 में कुछ समय के लिए उन्होंने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी भी संभाली। इसके बाद नवंबर 2018 में उनका तबादला कर्नाटक हाईकोर्ट में हुआ और वहाँ भी उन्होंने अपनी निष्ठा और अनुभव से कार्य किया। 2022 में वे लगभग तीन महीने तक कर्नाटक हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे। जुलाई 2023 में उन्हें तेलंगाना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया और बाद में जनवरी 2025 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट भेजा गया। उनके लंबे अनुभव और विविध न्यायिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सर्वोच्च अदालत के लिए एक उपयुक्त विकल्प बनाया।

वहीं जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली की पृष्ठभूमि भी उतनी ही प्रभावशाली रही है। 28 मई 1968 को गुजरात के अहमदाबाद में जन्मे पंचोली ने गुजरात विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स में स्नातक की डिग्री ली और फिर कानून की ओर रुख किया। उन्होंने कॉमर्शियल लॉ में एलएलएम की डिग्री प्राप्त की। 1991 में वकालत की शुरुआत के बाद उन्होंने करीब सात साल तक गुजरात हाईकोर्ट में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक के रूप में काम किया। उनकी मेहनत और ईमानदारी ने उन्हें न्यायपालिका में एक पहचान दिलाई। 1 अक्टूबर 2014 को उन्हें गुजरात हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 10 जून 2016 को स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। जुलाई 2023 में उन्हें पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया,जहाँ उन्होंने 21 जुलाई को पदभार संभाला। उनकी न्यायिक समझ और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें अब सर्वोच्च अदालत में स्थान दिया गया है।

दोनों न्यायाधीशों की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है,जब सुप्रीम कोर्ट कई महत्वपूर्ण संवैधानिक और सामाजिक मामलों पर सुनवाई कर रहा है। न्यायपालिका में योग्य और अनुभवी जजों की मौजूदगी न्यायिक प्रक्रिया को और भी सशक्त बनाएगी। देशभर के न्यायिक विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों का मानना है कि जस्टिस अराधे और जस्टिस पंचोली का अनुभव सुप्रीम कोर्ट की कार्यक्षमता को और भी बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

सुप्रीम कोर्ट में जजों की अधिकतम संख्या 34 निर्धारित है। इससे पहले कई बार यह संख्या रिक्तियों के कारण कम होती रही है,लेकिन अब नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से अदालत में लंबित मामलों की सुनवाई की गति बढ़ने की उम्मीद है। देश में लाखों मामले अभी भी विचाराधीन हैं और आम जनता न्याय की प्रतीक्षा कर रही है। ऐसे में न्यायाधीशों की संख्या पूरी होना न केवल न्यायपालिका बल्कि आम नागरिकों के लिए भी राहत की बात है।

जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विपुल पंचोली दोनों ही अपने-अपने क्षेत्र में अलग पहचान रखते हैं। आलोक अराधे की पहचान संवैधानिक मामलों और प्रशासनिक कानून में विशेषज्ञता रखने वाले न्यायाधीश के रूप में रही है,वहीं विपुल पंचोली वाणिज्यिक और आपराधिक कानून के मामलों में गहरी समझ रखते हैं। सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति न केवल अदालत की विविधता को और मजबूत करेगी,बल्कि विभिन्न विधिक क्षेत्रों में आने वाली चुनौतियों के समाधान में भी सहायक होगी।

इन दोनों न्यायाधीशों की नियुक्ति से यह भी स्पष्ट होता है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम पारदर्शिता और योग्यता के आधार पर न्यायाधीशों का चयन कर रहा है। उनकी नियुक्ति न केवल न्यायपालिका के प्रति जनता के विश्वास को और सुदृढ़ करेगी,बल्कि न्याय के त्वरित और निष्पक्ष वितरण की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विपुल पंचोली का स्वागत पूरे न्यायिक तंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। उनके अनुभव,दृष्टिकोण और समर्पण से देश की सर्वोच्च अदालत को नई ऊर्जा मिलेगी और आने वाले समय में यह न्यायिक प्रणाली को और अधिक सशक्त तथा सक्षम बनाने में अहम योगदान देंगे।