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वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, 2025-26 में 7.4% वृद्धि का अनुमान: आरबीआई बुलेटिन

नई दिल्ली,21 फरवरी (युआईटीवी)- वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। शुक्रवार को जारी भारतीय रिजर्व बैंक की ताजा बुलेटिन में कहा गया है कि हाल के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौते भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को और सशक्त बनाएँगे। यूरोपीय संघ के साथ हुए व्यापार समझौते और अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार ढांचे को भारत की विकास गति के लिए सकारात्मक माना गया है।

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि नियंत्रित महंगाई दर आर्थिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था की उत्पादक जरूरतों को पूरा करने और विकास की रफ्तार को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार,मूल्य स्थिरता और विकास के बीच संतुलन बनाना मौद्रिक नीति का प्रमुख उद्देश्य है।

बुलेटिन में उल्लेख किया गया है कि उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक 2025-26 की तीसरी तिमाही और उसके बाद भी मजबूत वृद्धि की ओर इशारा कर रहे हैं। वर्ष 2025-26 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है,जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। यह वृद्धि मुख्य रूप से निजी उपभोग और स्थायी निवेश के कारण संभव हुई है। हालाँकि,आयात निर्यात की तुलना में अधिक रहने के कारण शुद्ध बाहरी माँग का योगदान अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

आपूर्ति पक्ष पर भी सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। सेवा क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है,जबकि विनिर्माण गतिविधियों में सुधार से औद्योगिक उत्पादन को बल मिला है। अनुमान है कि 2025-26 में वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। कॉरपोरेट क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन और असंगठित क्षेत्र में गतिविधियों की मजबूती से विनिर्माण को और गति मिलने की संभावना है। निर्माण क्षेत्र में भी बुनियादी ढाँचे से जुड़े निवेश और आवासीय परियोजनाओं के चलते वृद्धि दर मजबूत रहने की उम्मीद है।

बुलेटिन में यह भी कहा गया है कि 2026-27 में आर्थिक गतिविधियाँ और सुदृढ़ हो सकती हैं। कृषि क्षेत्र के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बन रही हैं। जलाशयों का बेहतर स्तर,मजबूत रबी बुवाई और अच्छी फसल की स्थिति से कृषि उत्पादन में वृद्धि की संभावना है। कृषि क्षेत्र में सुधार से ग्रामीण आय और माँग को बल मिलेगा,जिससे उपभोग आधारित विकास को समर्थन मिलेगा।

ग्रामीण श्रम बाजार में सुधार के संकेत भी उत्साहजनक हैं। रोजगार के अवसरों में वृद्धि और कृषि गतिविधियों में तेजी से ग्रामीण माँग स्थिर बनी हुई है। वहीं शहरी क्षेत्रों में घरेलू माँग मजबूत रहने से सेवा क्षेत्र में स्थिरता बनी रहेगी। पर्यटन,परिवहन,संचार और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं,जो समग्र आर्थिक प्रदर्शन को सहारा दे रही हैं।

आरबीआई बुलेटिन ने यह भी संकेत दिया कि वित्तीय क्षेत्र में स्थिरता बनी हुई है। बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता और मजबूत पूँजी स्थिति से ऋण प्रवाह में वृद्धि हुई है। उद्योगों और एमएसएमई क्षेत्र को कर्ज उपलब्धता में सुधार हुआ है,जिससे निवेश गतिविधियों को गति मिली है। हालाँकि,वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित वृद्धि जैसी बाहरी चुनौतियों पर नजर बनाए रखने की आवश्यकता जताई गई है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापारिक संबंधों का विस्तार भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अवसर लेकर आया है। यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ समझौते से निर्यात में विविधता और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में भारत की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। इससे दीर्घकाल में रोजगार सृजन और तकनीकी हस्तांतरण को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर भारत को दुनिया की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखेगी। हालाँकि,इसके लिए नीतिगत निरंतरता,संरचनात्मक सुधार और निवेश वातावरण को और मजबूत करना जरूरी होगा। बुनियादी ढाँचे,डिजिटल कनेक्टिविटी और हरित ऊर्जा में निवेश को प्राथमिकता देने से विकास को और स्थायित्व मिल सकता है।

कुल मिलाकर आरबीआई की ताजा बुलेटिन यह संकेत देती है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियादी आधार पर खड़ी है। नियंत्रित महँगाई,मजबूत घरेलू माँग,सेवा और विनिर्माण क्षेत्र का योगदान तथा कृषि क्षेत्र में सुधार आने वाले वर्षों में विकास की रफ्तार को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएँगे। यदि बाहरी जोखिम नियंत्रित रहते हैं और नीतिगत समर्थन जारी रहता है,तो भारत मध्यम अवधि में स्थिर और सतत विकास पथ पर आगे बढ़ सकता है।