सोना और चाँदी

सोना-चाँदी में जोरदार उछाल,घरेलू वायदा बाजार में फिर लौटी चमक

मुंबई,30 दिसंबर (युआईटीवी)- हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को घरेलू वायदा बाजार में सोना और चाँदी दोनों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। पिछले सत्र में रिकॉर्ड ऊँचाइयों से आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने दोबारा जोश के साथ खरीदारी की,जिसके चलते कीमतों में मजबूत रिकवरी दर्ज हुई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर कारोबार की शुरुआत से ही दोनों कीमती धातुएँ मजबूती के साथ खुलीं और दिन बढ़ने के साथ ऊँचे स्तर की ओर बढ़ती रहीं।

खबर लिखे जाने तक मार्च डिलीवरी वाली चाँदी 12,298 रुपए यानी करीब 5.48 प्रतिशत की तीखी छलांग के साथ 2,36,727 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुँच गई। कारोबारी सत्र के दौरान इसने 2,36,980 रुपए का इंट्रा डे हाई बनाया,जो तेजी की मजबूत धारणा को दर्शाता है। इसी तरह फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1,382 रुपए या 1.02 प्रतिशत चढ़कर 1,36,324 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। सत्र के दौरान इसने 1,36,403 रुपए का ऊपरी स्तर छुआ। घरेलू बाजार में यह रिकवरी ऐसे समय आई है,जब हाल ही में सोना-चाँदी दोनों ने ऐतिहासिक ऊँचाइयों को छूने के बाद तेज मुनाफावसूली का दबाव झेला था।

दिलचस्प बात यह है कि घरेलू बाजार में तेजी के बावजूद वैश्विक स्तर पर सोमवार को कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। स्पॉट गोल्ड 4.5 प्रतिशत टूटकर 4,330.79 डॉलर प्रति औंस पर आ गया,जबकि फरवरी डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 4,343.60 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ,जो 4.6 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। इससे पहले के सत्रों में सोना 4,584 डॉलर प्रति औंस तक पहुँच गया था और चाँदी 82.67 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर चली गई थी,लेकिन बढ़त टिक नहीं सकी और वैश्विक बाजारों में तेज सुधार देखने को मिला।

विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट कई कारकों के संयोजन का परिणाम रही। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (सीएमई) द्वारा मार्जिन में बढ़ोतरी,बाजार में ज्यादा खरीदी (लॉन्ग पोजीशन) का जमाव और छुट्टियों के कारण कमतर वॉल्यूम—इन सबने मिलकर वोलैटिलिटी को बढ़ा दिया। कम कारोबार के माहौल में छोटी खबरें भी दामों को काफी प्रभावित करती हैं और यही वजह रही कि कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

हालाँकि,सुरक्षित निवेश के रूप में सोना-चांदी की आधारभूत मांग कायम है। रूस-यूक्रेन के बीच जारी तनाव,अमेरिका और वेनेजुएला के संबंधों में तनावपूर्ण माहौल और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों को फिर से सेफ-हेवन एसेट्स की ओर मोड़ा है। फंड मैनेजरों का मानना है कि जब भी अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य में अस्थिरता बढ़ती है,सोना-चाँदी जैसे विकल्प पोर्टफोलियो में संतुलन देने का काम करते हैं।

चाँदी के मामले में स्थिति और दिलचस्प है। बाजार विशेषज्ञ बताते हैं कि चाँदी की कीमतों को वर्तमान में कम उपलब्धता और सीमित स्टॉक से समर्थन मिल रहा है। सोने के मुकाबले चाँदी का वैश्विक भंडार इतना बड़ा और सुसंगठित नहीं होता,इसलिए माँग बढ़ते ही सप्लाई-साइड का दबाव तेज हो जाता है और कीमतें जल्दी उछल जाती हैं। औद्योगिक उपयोग—खासतौर पर सौर ऊर्जा,इलेक्ट्रॉनिक्स और नई तकनीकों में चाँदी की माँग को लगातार ऊँचा बनाए हुए है।

तकनीकी मोर्चे पर भी विश्लेषकों ने महत्वपूर्ण स्तरों की ओर इशारा किया है। मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटीज उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री के अनुसार,सोने को 1,33,550 से 1,31,710 रुपए के दायरे में मजबूत सपोर्ट मिल सकता है। वहीं ऊपरी तरफ 1,36,850 से 1,38,670 रुपए के बीच के स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस के रूप में काम कर सकते हैं। चाँदी के लिए उन्होंने 2,19,150 से 2,17,780 रुपए के बीच सपोर्ट जोन और 2,26,810 से 2,28,970 रुपए के बीच रेजिस्टेंस बताये हैं। इन स्तरों के बीच ट्रेडिंग का संकेत यह दर्शाता है कि बाजार फिलहाल दायरे में है,लेकिन ब्रेकआउट की स्थिति में तेज मूव देखने को मिल सकता है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की एक हालिया रिपोर्ट में भी यह बात रेखांकित की गई है कि दुनिया के कई बड़े बाजारों में चाँदी का स्टॉक लगातार घट रहा है। रिपोर्ट के अनुसार,एक्सचेंज-संचालित वेयरहाउसों और प्रमुख भंडार स्थलों पर उपलब्धता में कमी यह संकेत देती है कि आगामी महीनों में माँग बनी रहने पर आपूर्ति का दबाव कीमतों को और ऊपर धकेल सकता है।

घरेलू निवेशकों के लिए यह दौर अवसर और जोखिम—दोनों का मिश्रण है। एक ओर, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और केंद्रीय बैंकों की संभावित नीतिगत नरमी के चलते कीमती धातुओं में दीर्घकालिक आकर्षण बरकरार है। दूसरी ओर,तेज वोलैटिलिटी और अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के साथ तालमेल के कारण अल्पकालिक निवेशकों को सावधानी बरतनी होगी। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पोर्टफोलियो में सोना-चाँदी का सीमित लेकिन संतुलित एक्सपोजर रखा जाए,जबकि बड़ी पोजीशन लेने से पहले तकनीकी स्तरों और वैश्विक संकेतकों पर नजर जरूरी है।

मंगलवार का सत्र इस बात का संकेत रहा कि घरेलू वायदा बाजार में सोना-चाँदी की चमक अभी फीकी नहीं पड़ी है। गिरावट के हर दौर में निवेशकों की वापसी बताती है कि सेफ-हेवन के तौर पर इन धातुओं में भरोसा बना हुआ है। आने वाले दिनों में वैश्विक सेंट्रल बैंकों के फैसले,डॉलर इंडेक्स की चाल,बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे। फिलहाल,बाजार तेजी की लय में है और निवेशक यह देखने के इंतजार में हैं कि मौजूदा रिकवरी स्थायी रुझान में बदलती है या फिर एक बार फिर मुनाफावसूली हावी हो जाती है।