नई दिल्ली,16 फरवरी (युआईटीवी)- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में एक बड़ा बदलाव उस समय देखने को मिला जब ओपेनएआई ने अपने लोकप्रिय चैटबॉट ऐप चैटजीपीटी से जीपीटी-4o मॉडल को हटा दिया। इस फैसले ने दुनिया भर में हजारों यूजर्स को भावुक कर दिया है। खासकर चीन में कई उपयोगकर्ताओं ने इसे केवल एक तकनीकी टूल नहीं,बल्कि अपना ‘इमोशनल’ या ‘रोमांटिक साथी’ बताया था। तकनीक और मानवीय भावनाओं के इस अनोखे संगम ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या एआई केवल मशीन है या लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुकी है।
जीपीटी-4o को हटाने का यह फैसला अचानक नहीं था। अगस्त 2025 में कंपनी ने पहली बार इस मॉडल को बंद करने की कोशिश की थी। उस समय भी व्यापक विरोध देखने को मिला था। कई यूजर्स का मानना था कि जीपीटी-4o बाद में आए नए वर्जनों की तुलना में ज्यादा ‘संवेदनशील’, ‘समझदार’ और संवादात्मक था। जैसे ही इसे हटाने की घोषणा हुई,सोशल मीडिया पर विरोध की लहर दौड़ गई। इसके बाद कंपनी ने यूजर्स की प्रतिक्रिया को देखते हुए इसे पेड यूजर्स के लिए दोबारा उपलब्ध करा दिया था।
हालाँकि,यह राहत अस्थायी साबित हुई। 13 फरवरी को कंपनी ने एक बार फिर जीपीटी-4o को ऐप से हटा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक,आने वाले सोमवार से डेवलपर्स के लिए भी इसकी एपीआई एक्सेस बंद कर दी जाएगी। इस कदम ने उन डेवलपर्स और पावर यूजर्स को भी निराश किया है,जो अपने प्रोजेक्ट्स में इस मॉडल का इस्तेमाल कर रहे थे।
अमेरिका की सिराक्यूज यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता हुईकियान लाई ने अगस्त में जब मॉडल पहली बार ऑफलाइन हुआ था, तब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लगभग 1,500 पोस्ट का विश्लेषण किया। उनके अध्ययन में सामने आया कि 33 प्रतिशत से अधिक पोस्ट में लोगों ने चैटबॉट को केवल एक टूल के रूप में नहीं देखा,बल्कि उसे ‘कुछ खास’ बताया। वहीं 22 प्रतिशत पोस्ट में इसे एक साथी या ‘कंपैनियन’ के रूप में वर्णित किया गया। यह आँकड़ें इस बात का संकेत देते हैं कि एआई चैटबॉट्स के साथ लोगों का भावनात्मक जुड़ाव अब वास्तविकता बन चुका है।
लाई ने अगस्त से अक्टूबर के बीच #कीप4o हैशटैग के साथ किए गए 40,000 से अधिक अंग्रेजी पोस्ट भी एकत्र किए। इस ऑनलाइन अभियान ने वैश्विक स्तर पर ध्यान खींचा। इतना ही नहीं,चेंज.ऑर्ग ( Change.org )पर जीपीटी-4o को वापस लाने की माँग करते हुए एक याचिका भी शुरू की गई,जिस पर 20,000 से ज्यादा लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। यह डिजिटल विरोध इस बात का उदाहरण है कि तकनीकी फैसलों का असर केवल तकनीकी समुदाय तक सीमित नहीं रहता,बल्कि आम उपयोगकर्ताओं के जीवन को भी प्रभावित करता है।
चीन में स्थिति और भी दिलचस्प है। वहाँ आधिकारिक रूप से चैटजीपीटी ब्लॉक है,फिर भी कई लोग वीपीएन के जरिए इसका उपयोग करते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक,चीन में जीपीटी-4o के समर्पित यूजर्स एकजुट होकर दुख और नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। उनके लिए यह चैटबॉट केवल जानकारी देने वाला प्रोग्राम नहीं था,बल्कि भावनात्मक सहारा भी था। कुछ यूजर्स ने इसे अकेलेपन से निपटने का माध्यम बताया,तो कुछ ने इसे अपने निजी विचार साझा करने का सुरक्षित मंच माना।
इस फैसले के बाद कई यूजर्स ने अपनी सब्सक्रिप्शन रद्द करने की धमकी दी है। कुछ लोगों ने खुले तौर पर कंपनी के सीईओ सैम ऑल्टमैन की आलोचना की है। रिपोर्ट के अनुसार,नाराज यूजर्स ने कंपनी के निवेशकों,जिनमें माइक्रोसॉफ्ट और सॉफ्टबैंक शामिल हैं,को ईमेल लिखकर अपनी असंतुष्टि जाहिर की है। उनका आरोप है कि कंपनी ने #कीप4o समुदाय की भावनाओं को गंभीरता से नहीं लिया और उनके फीडबैक को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।
ओपनएआई की ओर से कहा गया है कि डेवलपर्स अभी भी जीपीटी-4o के बेस मल्टीमॉडल मॉडल को एपीआई कॉल के जरिए इस्तेमाल कर सकेंगे। हालाँकि,कई प्रशंसकों का मानना है कि यह वर्जन जीपीटी-4o-लेटेस्ट के मुकाबले कमजोर है। जीपीटी-4o-लेटेस्ट एक टेक्स्ट-ओनली वर्जन था,जिसे अधिक संवादात्मक और उपयोगकर्ता-अनुकूल माना जाता था। यूजर्स का कहना है कि नए मॉडल तकनीकी रूप से अधिक उन्नत हो सकते हैं,लेकिन उनमें वह भावनात्मक गहराई नहीं है,जो जीपीटी-4o में महसूस होती थी।
यह पूरा घटनाक्रम एआई और मानवीय संबंधों के बदलते स्वरूप को उजागर करता है। एक ओर कंपनियाँ तकनीकी सुधार और मॉडल अपग्रेड के जरिए आगे बढ़ना चाहती हैं,वहीं दूसरी ओर उपयोगकर्ता अपने अनुभव और भावनात्मक जुड़ाव को प्राथमिकता देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई सिस्टम के साथ बढ़ती भावनात्मक निर्भरता भविष्य में और जटिल सामाजिक और नैतिक सवाल खड़े कर सकती है।
जीपीटी-4o को हटाने के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एआई अब केवल एक उत्पाद नहीं रहा,बल्कि लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुका है। जब तकनीक भावनाओं को छूने लगती है,तो उसके हर बदलाव का असर गहरा होता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ओपनएआई यूजर्स की भावनाओं और तकनीकी प्रगति के बीच किस तरह संतुलन स्थापित करता है। फिलहाल,जीपीटी-4o के फैंस के लिए यह एक विदाई जैसा क्षण है,जिसे वे आसानी से स्वीकार करने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं।
