यूरोपीय संघ अमेरिका पर 93 अरब यूरो तक शुल्क लगाने पर कर रहा विचार (तस्वीर क्रेडिट@NumbersMatterHQ)

ग्रीनलैंड विवाद पर बढ़ा ट्रांसअटलांटिक तनाव,यूरोपीय संघ अमेरिका पर 93 अरब यूरो तक शुल्क लगाने पर कर रहा विचार

ब्रुसेल्स,19 जनवरी (युआईटीवी)- यूरोप और अमेरिका के बीच एक बार फिर व्यापार और कूटनीति के मोर्चे पर तनाव गहराता नजर आ रहा है। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाने की धमकी के बाद अब यूरोपीय संघ (ईयू) ने भी सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,यूरोपीय संघ अमेरिका के खिलाफ 93 अरब यूरो तक का शुल्क लगाने या अमेरिकी कंपनियों को अपने बाजार में काम करने से रोकने जैसे कठोर कदमों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यह जानकारी प्रतिष्ठित अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में सामने आई है,जिसने वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस पूरे मामले से जुड़े यूरोपीय अधिकारी ऐसे जवाबी कदमों की तैयारी कर रहे हैं,ताकि अगले सप्ताह होने वाली अहम अंतर्राष्ट्रीय बैठकों से पहले यूरोपीय नेताओं के पास मजबूत रणनीतिक स्थिति हो। ये बैठकें स्विट्जरलैंड के डावोस शहर में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान आयोजित होंगी,जहाँ यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं की अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में व्यापार, टैरिफ,ग्रीनलैंड और ट्रांसअटलांटिक संबंधों जैसे संवेदनशील मुद्दे केंद्र में रहेंगे।

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार,यूरोपीय संघ ने अमेरिका के खिलाफ संभावित टैरिफ की एक विस्तृत सूची पिछले साल ही तैयार कर ली थी। हालाँकि,उस समय ईयू ने व्यापार युद्ध से बचने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की उम्मीद में इस सूची को छह फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया था,लेकिन अब ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते तनाव ने हालात बदल दिए हैं। रविवार को यूरोपीय देशों के प्रतिनिधियों ने इस सूची को फिर से लागू करने और जवाबी कार्रवाई को तेज करने पर गंभीर चर्चा की।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक,इस दौरान एक ऐसे विशेष कानून के इस्तेमाल पर भी विचार किया गया,जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियों की यूरोपीय बाजार तक पहुँच सीमित की जा सकती है। अगर यह कदम उठाया जाता है,तो इसका असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि टेक्नोलॉजी,ऊर्जा,रक्षा और वित्तीय सेवाओं जैसे अहम क्षेत्रों में काम कर रही अमेरिकी कंपनियों पर भी पड़ सकता है। यूरोपीय संघ के भीतर यह बहस तेज हो गई है कि अमेरिका की आक्रामक व्यापार नीति का जवाब केवल शुल्क लगाकर दिया जाए या फिर उससे भी आगे बढ़कर बाजार पहुँच पर रोक जैसी कड़ी कार्रवाई की जाए।

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है,जब अमेरिका द्वारा प्रस्तावित टैरिफ से सीधे तौर पर प्रभावित आठ देशों ने एकजुटता का प्रदर्शन किया है। डेनमार्क,फिनलैंड,फ्रांस,जर्मनी,नीदरलैंड्स,नॉर्वे,स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम ने संयुक्त बयान जारी कर डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ पूरी एकजुटता जताई है। इन देशों का कहना है कि ग्रीनलैंड से जुड़ा कोई भी फैसला अंतर्राष्ट्रीय कानून,क्षेत्रीय संप्रभुता और आपसी सहमति के आधार पर ही होना चाहिए,न कि दबाव या टैरिफ की धमकियों के जरिए।

इस विवाद की जड़ में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है,जो उन्होंने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया था। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका एक फरवरी से इन आठ देशों से आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाएगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर ग्रीनलैंड की “पूरी तरह खरीद” को लेकर कोई समझौता नहीं होता है,तो एक जून से यह शुल्क बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा और यह तब तक लागू रहेगा,जब तक अमेरिका अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर लेता। ट्रंप के इस बयान को यूरोप में न केवल आर्थिक दबाव के रूप में देखा जा रहा है,बल्कि इसे राजनीतिक और रणनीतिक धमकी के तौर पर भी लिया जा रहा है।

ग्रीनलैंड,जो डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है,रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। यहाँ मौजूद प्राकृतिक संसाधन,आर्कटिक क्षेत्र में इसकी स्थिति और सैन्य दृष्टिकोण से इसका महत्व लंबे समय से वैश्विक शक्तियों के आकर्षण का केंद्र रहा है। अमेरिका पहले भी ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जता चुका है,लेकिन डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने इसे साफ तौर पर खारिज किया है। अब टैरिफ की धमकी के जरिए दबाव बनाने की कोशिश ने यूरोप में नाराजगी को और बढ़ा दिया है।

इस बीच,डोनाल्ड ट्रंप बुधवार और गुरुवार को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में हिस्सा लेने वाले हैं। इस दौरान उनकी यूरोपीय नेताओं के साथ निजी बातचीत होने की पूरी संभावना है। इन बैठकों में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी शामिल होंगी। माना जा रहा है कि वॉन डेर लेयेन ट्रंप के सामने यूरोपीय संघ का संयुक्त और सख्त रुख रखेंगी। इसके अलावा ट्रंप यूक्रेन का समर्थन करने वाले पश्चिमी देशों की एक बैठक में भी हिस्सा ले सकते हैं,जहाँ सुरक्षा और भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यूरोपीय संघ वास्तव में अमेरिका पर 93 अरब यूरो तक का शुल्क लगाने या अमेरिकी कंपनियों की बाजार पहुँच सीमित करने का फैसला करता है,तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा पड़ेगा। इससे न केवल ट्रांसअटलांटिक व्यापार प्रभावित होगा,बल्कि वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता भी बढ़ सकती है। फिलहाल सबकी निगाहें डावोस में होने वाली बैठकों पर टिकी हैं, जहाँ यह तय होगा कि यह तनाव बातचीत से सुलझेगा या फिर दुनिया एक नए व्यापार युद्ध की ओर बढ़ती नजर आएगी।