इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी (तस्वीर क्रेडिट@PopBase)

ग्रीनलैंड विवाद पर ट्रंप को यूरोप से चुनौती, इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने ग्रीनलैंड टैरिफ की धमकी को बताया बड़ी गलती

सोल,19 जनवरी (युआईटीवी)- ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते तनाव के बीच इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकी को खुलकर गलत बताया है। रविवार को दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल की यात्रा के दौरान मेलोनी ने साफ शब्दों में कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में नए प्रतिबंध और टैरिफ लगाना एक गंभीर भूल होगी। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि कुछ ही घंटे पहले उनकी राष्ट्रपति ट्रंप से सीधी बातचीत हुई है,जिसमें उन्होंने अपनी असहमति स्पष्ट रूप से उनके सामने रखी।

प्रधानमंत्री मेलोनी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनका मानना है कि टैरिफ जैसी कार्रवाइयाँ न तो यूरोप के हित में हैं और न ही अमेरिका के। उन्होंने कहा, “मैंने डोनाल्ड ट्रंप से बात की और उन्हें बताया कि मैं इस मुद्दे पर क्या सोचती हूँ। आज के दौर में नए प्रतिबंध लगाना एक गलती होगी।” मेलोनी का यह बयान ऐसे समय आया है,जब ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की आक्रामक नीति के कारण ट्रांसअटलांटिक संबंधों में खटास बढ़ती जा रही है।

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ग्रीनलैंड को लेकर समर्थन जताने वाले यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इस फैसले का नाटो में शामिल कई देश खुलकर विरोध कर रहे हैं। यूरोपीय नेताओं का कहना है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है और उस पर किसी भी तरह का दबाव अंतर्राष्ट्रीय नियमों और संप्रभुता के सिद्धांतों के खिलाफ है। ट्रंप की धमकी को यूरोप में राजनीतिक दबाव और आर्थिक ब्लैकमेल के रूप में देखा जा रहा है।

इससे पहले नीदरलैंड के विदेश मंत्री डेविड वैन वील ने भी ट्रंप की योजनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने आठ यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की अमेरिकी योजना को “ब्लैकमेल” करार दिया था। वैन वील का कहना था कि व्यापारिक प्रतिबंधों का इस्तेमाल किसी क्षेत्रीय या रणनीतिक मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए करना बेहद खतरनाक मिसाल कायम कर सकता है। उनके इस बयान के बाद यूरोपीय कूटनीतिक हलकों में ट्रंप के फैसले के खिलाफ एकजुटता और मजबूत होती दिखी।

यूरोपीय यूनियन ने भी इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई है। यूरोपीय आयोग का कहना है कि अमेरिका का यह कदम यूरोप और अमेरिका के बीच दशकों पुराने भरोसे और साझेदारी को कमजोर करने की धमकी देता है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने चेतावनी दी है कि ट्रंप द्वारा घोषित 10 प्रतिशत टैरिफ एक खतरनाक गिरावट की शुरुआत कर सकते हैं,जिसका असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक रिश्तों पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ेगी और दोनों पक्षों को नुकसान होगा।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि एक फरवरी से ग्रीनलैंड में सैनिक भेजने वाले देशों के सभी सामानों पर टैरिफ लागू होंगे। उन्होंने आगे चेतावनी दी कि अगर जून तक ग्रीनलैंड को “खरीदने” को लेकर कोई समझौता नहीं होता है,तो यह टैरिफ बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाएगा। ट्रंप के इस बयान ने यूरोप में आक्रोश और चिंता दोनों को जन्म दिया है,क्योंकि इसे आर्थिक दबाव के जरिए राजनीतिक लक्ष्य हासिल करने की कोशिश माना जा रहा है।

ग्रीनलैंड लंबे समय से रणनीतिक रूप से बेहद अहम क्षेत्र माना जाता है। आर्कटिक क्षेत्र में इसकी स्थिति,प्राकृतिक संसाधनों की संभावनाएँ और सैन्य महत्व इसे वैश्विक शक्तियों के लिए आकर्षक बनाते हैं। ट्रंप पहले भी ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जता चुके हैं,लेकिन डेनमार्क और ग्रीनलैंड प्रशासन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया था। अब टैरिफ की धमकी के जरिए दबाव बनाने की कोशिश ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है।

इसी बीच यूरोपीय नेता इस सप्ताह स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में हिस्सा लेने वाले हैं। उम्मीद है कि डोनाल्ड ट्रंप भी इस वैश्विक मंच पर मौजूद रहेंगे। नाटो सदस्य देशों का कहना है कि वे इस मौके का इस्तेमाल अमेरिका के सामने अपनी बात मजबूती से रखने के लिए करेंगे। यूरोपीय नेताओं की योजना है कि वे ट्रंप को यह समझाने की कोशिश करें कि टैरिफ और दबाव की राजनीति से किसी को फायदा नहीं होगा।

तनाव को देखते हुए यूरोपीय यूनियन ने रविवार को अपने सभी राजदूतों की एक आपातकालीन बैठक भी बुलाई। यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के राजदूत इस इमरजेंसी मीटिंग में शामिल हुए। साइप्रस,जो इस समय छह महीने के लिए ईयू की रोटेटिंग प्रेसिडेंसी सँभाल रहा है,ने शनिवार को इस बैठक की घोषणा की थी। बैठक में अमेरिका की संभावित टैरिफ नीति और उसके जवाब में यूरोप की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की नीति ने यूरोप और अमेरिका के रिश्तों में नई दरार पैदा कर दी है। इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी जैसे नेताओं की खुली असहमति यह संकेत देती है कि यूरोप इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दावोस में होने वाली बातचीत इस तनाव को कम करती है या फिर ट्रांसअटलांटिक संबंध एक नए संकट की ओर बढ़ते हैं।