राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

वेनेजुएला पर जमीनी हमले के संकेत देकर ट्रंप ने बढ़ाया तनाव,ड्रग तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी

वॉशिंगटन,3 दिसंबर (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से लैटिन अमेरिका में भू-राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। व्हाइट हाउस कैबिनेट मीटिंग के दौरान ट्रंप ने संकेत दिया कि वेनेजुएला के ड्रग तस्करों को रोकने के लिए अमेरिका जल्द ही जमीनी हमले शुरू कर सकता है। उनके इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और भी बढ़ गया है,क्योंकि हाल के महीनों में अमेरिका ने पहले ही कैरेबियन और पूर्वी प्रशांत सागर में अपनी सैन्य उपस्थिति को काफी मजबूत किया है। ट्रंप के इस ऐलान को वेनेजुएला और कई अमेरिकी सांसदों ने गंभीरता से लिया है और इसे संभावित युद्ध का संकेत माना जा रहा है।

कैबिनेट मीटिंग के दौरान ट्रंप ने कहा कि ड्रग तस्करी के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए जमीन पर लड़ाई की शुरुआत आवश्यक हो गई है। उन्होंने दावा किया कि समुद्री रास्ते से होने वाली लगभग 85 प्रतिशत तस्करी को अमेरिकी बलों ने रोक दिया है और अब उनका फोकस जमीन के रास्ते हो रही तस्करी पर होगा। ट्रंप ने कहा कि “हम जानते हैं कि ड्रग तस्कर कौन से रास्ते अपनाते हैं और उन्हें रोकने के लिए जमीनी हमला बेहद आसान है।” ट्रंप के इस बयान ने कैरेबियन क्षेत्र में चल रही अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को एक नया आयाम दे दिया है।

गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने थैंक्सगिविंग भाषण में अमेरिकी सैन्य इकाई एयर फोर्स 7वें बॉम्ब विंग की भी खुलकर सराहना की थी। यह इकाई बम बरसाने वाले विमानों के संचालन के लिए जानी जाती है और ट्रंप का कहना था कि इस इकाई ने वेनेजुएला के ड्रग तस्करों के खिलाफ समुद्री रास्तों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि ड्रग तस्करी के खिलाफ अभियान अमेरिका के लिए प्राथमिकता है और अब वेनेजुएला के भीतर संचालित हो रहे ड्रग नेटवर्क को खत्म करना अनिवार्य हो गया है।

सिन्हुआ न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक,2 सितंबर से पेंटागन कैरेबियन और पूर्वी प्रशांत महासागर में ड्रग तस्करी से जुड़े जहाजों पर कम-से-कम 21 हमले कर चुका है। इन हमलों में करीब 83 लोगों की मौत हुई है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इन अभियानों से ड्रग तस्करों के नेटवर्क को भारी नुकसान पहुँचा है और हजारों टन अवैध ड्रग्स को जब्त किया गया है। हालाँकि,इन हमलों में मारे गए लोगों को लेकर कई मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है और कहा है कि इनमें से सभी के ड्रग तस्कर होने की पुष्टि नहीं हुई है।

अमेरिका ने केवल समुद्री और हवाई अभियानों तक ही अपना दायरा सीमित नहीं रखा है,बल्कि पिछले कुछ महीनों में उसने कैरेबियन सागर में अपनी सैन्य मौजूदगी को भी काफी बढ़ाया है। वॉशिंगटन ने लगभग एक दर्जन वॉरशिप,जिनमें यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड जैसा विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर भी शामिल है,को तैनात किया है। इसके अलावा करीब 15,000 अमेरिकी सैनिक भी इस क्षेत्र में भेजे गए हैं। कई रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले तीन दशकों में कैरेबियन में इतनी बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती नहीं देखी गई।

इस बढ़ती सैन्य मौजूदगी को लेकर कई अमेरिकी सांसदों और राजनीतिक विश्लेषकों ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या वास्तव में अमेरिका का मकसद सिर्फ ड्रग तस्करी रोकना है या फिर इसके पीछे कोई और राजनीतिक उद्देश्य छिपा है? कुछ आलोचकों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला की सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है,ताकि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाया जा सके। यह विवाद तब और गहरा हो गया,जब कई सांसदों ने यह भी पूछा कि कैरेबियन सागर में अमेरिकी सैन्य हमले कितने कानूनी हैं और क्या यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं है?

दूसरी ओर,वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने ड्रग तस्करी के व्यवसाय से किसी भी तरह के संबंध से साफ इनकार किया है। मादुरो ने ट्रंप पर आरोप लगाया कि वे सैन्य हमलों की आड़ में वेनेजुएला में शासन परिवर्तन की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका देश अमेरिका की किसी भी सैन्य आक्रामकता का जवाब देने के लिए तैयार है और वेनेजुएला की सेना पूरी मजबूती से अपने देश की रक्षा करेगी।

मादुरो सरकार का कहना है कि अमेरिका वेनेजुएला के प्राकृतिक संसाधनों और उसके भू-राजनीतिक महत्व पर नियंत्रण चाहता है,इसलिए बार-बार ड्रग तस्करी का मुद्दा उठाकर वह अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर वेनेजुएला को बदनाम कर रहा है। वेनेजुएला ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से भी इस मामले में दखल की माँग की है और कहा है कि बिना किसी ठोस सबूत के किसी राष्ट्र पर हमले की धमकी देना अंतर्राष्ट्रीय शांति के लिए खतरा है।

क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। अगर अमेरिका सच में जमीनी हमले की शुरुआत करता है,तो यह न केवल वेनेजुएला,बल्कि पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा सकता है। कई देशों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी बाहरी सैन्य हस्तक्षेप का समर्थन नहीं करेंगे।

डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान ने अमेरिका और वेनेजुएला के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों को और भी जटिल बना दिया है। अब वैश्विक समुदाय की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह केवल राजनीतिक बयानबाजी है या वाकई में कैरेबियन क्षेत्र में एक नया संघर्ष शुरू होने वाला है।