एचडीएफसी बैंक

एचडीएफसी बैंक का बड़ा फैसला: 1 अप्रैल से यूपीआई कैश निकासी भी गिनी जाएगी एटीएम की फ्री लिमिट में

नई दिल्ली,3 मार्च (युआईटीवी)- भारत के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक ने अपने ग्राहकों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है,जो सीधे तौर पर डिजिटल बैंकिंग और नकद निकासी की आदतों को प्रभावित करेगा। बैंक ने स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल से यूपीआई के जरिए एटीएम से की जाने वाली कार्डलेस कैश निकासी को अब अलग श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। इसे ग्राहकों की मासिक फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन लिमिट में ही शामिल किया जाएगा। यानी अब जो ग्राहक यूपीआई के माध्यम से बिना डेबिट कार्ड के कैश निकालेंगे,उनकी यह निकासी भी उसी फ्री लिमिट में गिनी जाएगी,जो डेबिट कार्ड से की जाने वाली सामान्य एटीएम निकासी के लिए तय है।

बैंक की ओर से खाताधारकों को भेजे गए आधिकारिक संदेश में कहा गया है कि कार्डलेस यूपीआई कैश निकासी सुविधा को अब डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन के साथ जोड़ा जा रहा है। यदि कोई ग्राहक निर्धारित मुफ्त सीमा से अधिक बार निकासी करता है,तो उससे सामान्य एटीएम शुल्क वसूला जाएगा। इस फैसले के पीछे बैंक का तर्क है कि वह अपने सभी बैंकिंग चैनलों में शुल्क संरचना को एक समान और पारदर्शी बनाना चाहता है,ताकि ग्राहकों को स्पष्ट रूप से पता रहे कि किस ट्रांजैक्शन पर शुल्क लागू होगा और किस पर नहीं।

यूपीआई आधारित एटीएम निकासी सुविधा को देशभर में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इस सुविधा के तहत ग्राहक बिना डेबिट कार्ड के भी एटीएम से नकद निकाल सकते हैं। प्रक्रिया बेहद सरल है। एटीएम स्क्रीन पर एक डायनेमिक क्यूआर कोड प्रदर्शित होता है,जिसे ग्राहक अपने यूपीआई ऐप से स्कैन करता है। इसके बाद वह अपने मोबाइल पर ट्रांजैक्शन की पुष्टि करता है और निर्धारित राशि एटीएम से प्राप्त कर लेता है। यह तरीका न केवल सुविधाजनक है,बल्कि कार्ड स्किमिंग जैसे फ्रॉड के जोखिम को भी कम करता है।

अब तक कई ग्राहकों को यह भ्रम था कि यूपीआई के जरिए की जाने वाली कैश निकासी अलग मानी जाती है और यह एटीएम की मासिक फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट से स्वतंत्र है,लेकिन नए नियम के लागू होने के बाद ऐसा नहीं होगा। उदाहरण के तौर पर,यदि किसी ग्राहक को हर महीने पाँच मुफ्त एटीएम ट्रांजैक्शन की सुविधा मिलती है और वह तीन बार डेबिट कार्ड से तथा दो बार यूपीआई के माध्यम से नकद निकालता है,तो उसकी फ्री लिमिट पूरी मानी जाएगी। इसके बाद की गई किसी भी निकासी पर निर्धारित शुल्क देना होगा।

फिलहाल बैंक के सामान्य बचत और सैलरी खातों के लिए उसके अपने एटीएम से हर महीने पाँच बार मुफ्त कैश निकासी की सुविधा उपलब्ध है। गैर-एचडीएफसी बैंक एटीएम से निकासी के लिए शीर्ष छह महानगरों में तीन मुफ्त ट्रांजैक्शन की अनुमति है,जबकि अन्य शहरों और टियर-2 स्थानों पर पाँच मुफ्त ट्रांजैक्शन की सुविधा दी जाती है। नई नीति के बाद इन सभी श्रेणियों में यूपीआई कैश निकासी भी शामिल कर दी जाएगी।

बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल और पारंपरिक बैंकिंग चैनलों के बीच अंतर को कम करने की दिशा में उठाया गया है। चूँकि,यूपीआई कैश निकासी भी अंततः एटीएम मशीन के जरिए ही की जाती है और इसमें बैंक का इंफ्रास्ट्रक्चर उपयोग होता है,इसलिए इसे समान शुल्क ढाँचे में लाना व्यावहारिक कदम माना जा रहा है। हालाँकि,कुछ ग्राहक इसे अतिरिक्त बोझ के रूप में देख सकते हैं,खासकर वे लोग जो कार्ड की बजाय मोबाइल आधारित निकासी को प्राथमिकता देते हैं।

इस बीच,बैंक के वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो चालू वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में उसने मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। बैंक का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 12.17 प्रतिशत बढ़ा है,जो उसके स्थिर परिचालन और ऋण वृद्धि को दर्शाता है। इसी अवधि में बैंक की शुद्ध ब्याज आय 6.4 प्रतिशत बढ़कर 32,615 करोड़ रुपये रही। यह आँकड़ें बताते हैं कि बदलते डिजिटल परिदृश्य के बीच भी बैंक अपनी आय और लाभप्रदता को संतुलित रखने में सफल रहा है।

शेयर बाजार में भी बैंक की गतिविधियाँ चर्चा में रहीं। सोमवार को एनएसई पर बैंक का शेयर 0.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 882.10 रुपये पर बंद हुआ। हालाँकि,मंगलवार को होली के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार बंद रहा,जिससे आगे की कारोबारी प्रतिक्रिया का आकलन नहीं हो सका।

1 अप्रैल से लागू होने वाला यह नियम लाखों खाताधारकों के लिए महत्वपूर्ण है। ग्राहकों को अब अपनी मासिक एटीएम ट्रांजैक्शन की संख्या पर अधिक ध्यान देना होगा,चाहे वे डेबिट कार्ड का उपयोग करें या यूपीआई आधारित कार्डलेस सुविधा का। बैंक का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य शुल्क प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाना है,ताकि सभी प्रकार की नकद निकासी एक समान नियमों के अंतर्गत आएँ। ऐसे में ग्राहकों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे अपने खाते की शर्तों और फ्री लिमिट को समझकर ही नकद निकासी की योजना बनाएँ,ताकि अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सके।