एयर इंडिया

हेली गुब्बी ज्वालामुखी विस्फोट के बाद एयर इंडिया ने कई घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें रद्द कीं,यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता

नई दिल्ली,25 नवंबर (युआईटीवी)- हेली गुब्बी ज्वालामुखी के अचानक हुए शक्तिशाली विस्फोट के बाद एयर इंडिया ने एहतियातन अपनी कई महत्वपूर्ण घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी हैं। ज्वालामुखी विस्फोट का प्रभाव आसमान में फैली राख और बदलते मौसम तंत्र में स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है,जिसके चलते उड़ान मार्गों पर दृश्यता और इंजन सुरक्षा को लेकर गंभीर जोखिम पैदा हो गए। ऐसी परिस्थितियों में यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एयर इंडिया ने यह बड़ा निर्णय लिया है। कंपनी ने कहा है कि जैसे ही स्थिति सामान्य होती है और विशेषज्ञ सुरक्षा जाँच की मंजूरी मिलती है,उड़ानों का संचालन पुनः शुरू कर दिया जाएगा।

एयर इंडिया की ओर से आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक एडवाइजरी जारी कर बताया गया कि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। कंपनी ने लिखा कि विस्फोट के प्रभाव वाले भौगोलिक क्षेत्र के ऊपर से कुछ विमानों ने पहले ही उड़ान भरी थी और इसलिए उनकी विस्तृत सुरक्षा जाँच की जा रही है। यह जाँच प्रक्रिया पूरी होने तक उड़ान संचालन को सीमित रखना ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प था। एयर इंडिया ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद जताते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि हर संभव सहायता समय रहते उपलब्ध कराई जा रही है।

25 नवंबर को रद्द की गई उड़ानों में एआई 2822 (चेन्नई से मुंबई),एआई 2466 (हैदराबाद से दिल्ली),एआई 2444/2445 (मुंबई–हैदराबाद–मुंबई) और एआई 2471/2472 (मुंबई–कोलकाता–मुंबई) शामिल हैं। इसके अलावा 24 नवंबर को भी कई अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को रद्द करना पड़ा,जिनमें न्यूर्क से दिल्ली आने वाली एआई 106,न्यूयॉर्क से दिल्ली आने वाली एआई 102 तथा दुबई,दोहा,दम्माम और चेन्नई से जुड़ी कई सेवाएँ शामिल थीं। अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों की अधिक संख्या प्रभावित होने का कारण यह बताया गया कि विस्फोट से बने बादल और राख ने लंबी दूरी वाले मार्गों पर अधिक प्रभाव डाला है,जिसके चलते विमानों को सुरक्षित ऊँचाई और वैकल्पिक मार्ग खोजने में कठिनाई उत्पन्न हुई।

कंपनी ने कहा कि उनकी ग्राउंड टीम लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है और प्रभावित यात्रियों से सीधा संपर्क बनाए हुए है। एयर इंडिया ने बताया कि जिन यात्रियों की उड़ानें रद्द हुई हैं,उन्हें न केवल यात्रा स्थिति से संबंधित हर अपडेट तत्काल दिया जा रहा है,बल्कि जरूरत पड़ने पर होटल ठहराव और वैकल्पिक बुकिंग की व्यवस्था भी की जा रही है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरी स्थिति अप्रत्याशित थी और विस्फोट जैसी घटनाओं पर किसी भी एयरलाइन का नियंत्रण नहीं होता,इसलिए सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन ही सर्वोपरि है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई यात्रियों ने उड़ान रद्द होने को लेकर अपनी चिंता और निराशा व्यक्त की। अनेक यात्रियों को समय पर गंतव्य तक न पहुँच पाने की चिंता थी,वहीं कुछ ने अचानक हुए इस बदलाव के कारण व्यावसायिक और व्यक्तिगत योजनाओं के प्रभावित होने का भी उल्लेख किया। हालाँकि,ज्यादातर यात्रियों ने एयर इंडिया के फैसले को उचित और जिम्मेदार करार दिया। यात्रियों ने कहा कि सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता और एयरलाइन का यह निर्णय पूरी तरह परिस्थितियों के अनुसार है। कुछ यात्रियों ने ग्राउंड स्टाफ की तत्परता और सूचनाओं के नियमित अपडेट देने की जिम्मेदारी की भी सराहना की।

विशेषज्ञों का मानना है कि ज्वालामुखी विस्फोट से उत्पन्न राख विमान इंजनों के लिए अत्यंत खतरनाक होती है। यह इंजनों के भीतर घुसकर उन्हें नुकसान पहुँचा सकती है और उड़ान के दौरान गंभीर तकनीकी खराबियाँ पैदा कर सकती है। इसके अलावा,राख की परतें दृश्यता को कम करती हैं,जिससे पायलटों को नेविगेशन में दिक्कत आती है। पिछले वर्षों में भी ऐसी प्राकृतिक घटनाओं के कारण वैश्विक स्तर पर कई एयरलाइनों को उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं और इस बार भी वही सावधानी बरती जा रही है।

एयर इंडिया ने कहा है कि जैसे ही वातावरण साफ होता है और सुरक्षा विशेषज्ञ अनुमति देते हैं,उड़ानों को धीरे-धीरे पुनः संचालित किया जाएगा। कंपनी ने यात्रियों को भरोसा दिलाया है कि सभी प्रभावित यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानों और नई बुकिंग की जानकारी जल्द-से-जल्द उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल एयरलाइन ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा से पहले आधिकारिक वेबसाइट,ऐप या कस्टमर केयर से उड़ान की स्थिति अवश्य जांच लें ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके।

हेली गुब्बी ज्वालामुखी विस्फोट ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि प्राकृतिक आपदाओं का असर आधुनिक तकनीक और उन्नत विमानन प्रणाली पर भी गहराई से पड़ सकता है। ऐसी स्थितियों में एयरलाइनों के लिए यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए त्वरित निर्णय लेना ही सबसे सही कदम होता है। एयर इंडिया का यह कदम इसी दिशा में एक जिम्मेदार और आवश्यक कदम माना जा रहा है।