धर्मेंद्र (तस्वीर क्रेडिट@dreamgirlhema)

हिंदी सिनेमा के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र का 89 वर्ष की उम्र में निधन,फिल्म जगत में शोक की लहर

नई दिल्ली,24 नवंबर (युआईटीवी)- हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और लाखों दिलों की धड़कन रहे धर्मेंद्र का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे धर्मेंद्र ने अपनी अंतिम सांस ली,जिसके बाद पूरे बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई है। वे पिछले कुछ महीनों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे और सांस लेने में कठिनाई के कारण उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था,जहाँ डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी देखभाल कर रही थी। उम्र संबंधी जटिलताओं और श्वसन संबंधी समस्याओं के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार कमजोर होता जा रहा था।

कुछ दिनों तक अस्पताल में इलाज के बाद उनकी हालत में मामूली सुधार हुआ,जिसके बाद परिवार ने उन्हें घर ले जाने का निर्णय लिया,ताकि वे अपने प्रियजनों के बीच रह सकें। उनके घर पर मेडिकल इमरजेंसी के सभी इंतजाम किए गए थे,जिसमें डॉक्टरों की विशेष टीम और एम्बुलेंस लगातार तैनात रहती थी। परिवार के सदस्यों ने हर संभव प्रयास करते हुए उनकी देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ी,लेकिन तमाम कोशिशों और निरंतर मेडिकल सपोर्ट के बावजूद उनका स्वास्थ्य धीरे-धीरे बिगड़ता गया और अंततः उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

धर्मेंद्र के स्वास्थ्य को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में भी लगातार चिंता की लहर बनी हुई थी। सलमान खान,शाहरुख खान और गोविंदा जैसे कई बड़े कलाकार अस्पताल और उनके घर जाकर उनका हालचाल लेते रहे। उनके चाहने वाले सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार उनके स्वास्थ्य के लिए दुआएं माँगते रहे। जैसे ही उनके निधन की खबर सामने आई,चारों ओर दुख की भावना फैल गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर श्रद्धांजलियों का सैलाब उमड़ पड़ा और सभी ने इस महान कलाकार के जाने को एक युग का अंत बताया।

धर्मेंद्र का करियर भारतीय सिनेमा के इतिहास का एक चमकता अध्याय रहा है। लगभग छह दशकों तक उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज किया। 1960 में रिलीज हुई फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाले धर्मेंद्र ने बहुत जल्दी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया। उनकी सहज अभिनय शैली,दमदार डायलॉग डिलीवरी और शानदार स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें जल्द ही स्टारडम की ऊँचाइयों तक पहुँचा दिया।

1960 और 70 के दशक में उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दीं, जिनमें ‘शोला और शबनम’, ‘अनपढ़’, ‘बंदिनी’, ‘पूजा के फूल’, ‘हकीकत’, ‘फूल और पत्थर’, ‘अनुपमा’ और ‘खामोशी’ जैसी फिल्में शामिल हैं। 1966 में आई ‘फूल और पत्थर’ ने उन्हें भारतीय सिनेमा का ‘ही-मैन’ बना दिया और इसके बाद उन्हें एक्शन फिल्मों का प्रतीक माना जाने लगा। 1972 की रोमांटिक फिल्म ‘तुम हसीन मैं जवां’ और 1975 में आई ‘शोले’ ने उनके करियर को नए मुकाम पर पहुँचा दिया। ‘शोले’ में वीरू के किरदार में उनकी जोड़ी अमिताभ बच्चन,हेमा मालिनी और बाकी कलाकारों के साथ आज भी अमर मानी जाती है।

धर्मेंद्र सिर्फ एक्शन हीरो ही नहीं थे,बल्कि वे भावनात्मक और रोमांटिक भूमिकाओं में भी समान रूप से मजबूत रहे। उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें सभी पीढ़ियों के दर्शकों का पसंदीदा बना दिया। कला,शैली और अभिनय के हर रूप में वे दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने में कामयाब रहे। चाहे ‘यादों की बारात’ का रोमांटिक अंदाज़ हो या ‘सीता और गीता’ में मज़ाकिया रूप,उनका हर किरदार दर्शकों के दिलों में आज भी बसा हुआ है।

उनके योगदान को सम्मानित करते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2012 में पद्म भूषण सम्मान से नवाज़ा। इसके अलावा फिल्मफेयर और अन्य कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से भी उन्हें सम्मानित किया गया। आलोचकों से लेकर दर्शकों तक,सभी ने उनके अभिनय की सराहना की और उन्हें बॉलीवुड के स्वर्णिम काल का महत्वपूर्ण स्तंभ माना।

धर्मेंद्र के निधन से न केवल फिल्म इंडस्ट्री बल्कि उनके चाहने वाले करोड़ों प्रशंसक गहरे सदमे में हैं। उनका जाना हिंदी सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वे सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे,बल्कि एक ऐसी संस्था थे जिनसे कई पीढ़ियों ने अभिनय, समर्पण और सादगी सीखी। उनके जीवन का हर पड़ाव संघर्ष,मेहनत और सफलता की कहानी समेटे हुए था।

धर्मेंद्र की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। पर्दे पर उनका जोश,उनकी मुस्कान,उनकी आवाज़ और उनका व्यक्तित्व सिनेमा प्रेमियों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगा। उन्होंने जिस तरह अपने अभिनय से लोगों को जोड़ा,वह आने वाले समय में भी उनकी याद दिलाता रहेगा।

उनके निधन से बॉलीवुड का एक चमकता सितारा हमेशा के लिए खो गया है,लेकिन उनकी यादें,उनकी फिल्में और उनका अमिट योगदान भारतीय सिनेमा के इतिहास में सदैव अमर रहेगा।