मारिया कोरिना मचाडो ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भेंट किया नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल (तस्वीर क्रेडिट@daiya_dwarka)

व्हाइट हाउस में ऐतिहासिक भेंट: मारिया कोरिना मचाडो ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भेंट किया नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल

वाशिंगटन,16 जनवरी (युआईटीवी)- वेनेजुएला की विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित मारिया कोरिना मचाडो ने वाशिंगटन में एक असाधारण और प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल भेंट करने का दावा किया है। मचाडो के अनुसार यह भेंट व्हाइट हाउस में बंद कमरे में हुई मुलाकात के दौरान की गई,जिसे उन्होंने वेनेजुएला और अमेरिका की आज़ादी की साझा ऐतिहासिक लड़ाई का प्रतीक बताया। इस घटना ने न केवल दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों पर नई बहस छेड़ दी है,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इसके प्रतीकात्मक और कानूनी पहलुओं पर चर्चा शुरू हो गई है।

व्हाइट हाउस में हुई इस मुलाकात के बाद वाशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मचाडो ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल सौंपा। उन्होंने बताया कि यह मुलाकात व्हाइट हाउस के प्राइवेट डाइनिंग रूम में लंच के दौरान हुई और यह ट्रंप तथा मचाडो के बीच पहली आमने-सामने की बैठक थी। मचाडो के मुताबिक यह कोई औपचारिक राजनयिक कार्यक्रम नहीं था,बल्कि एक निजी और गंभीर चर्चा थी,जिसमें वेनेजुएला की मौजूदा राजनीतिक स्थिति,लोकतंत्र की बहाली और स्वतंत्रता की लड़ाई जैसे मुद्दों पर बात हुई।

मचाडो ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए दो सौ वर्ष पुराने एक प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 19वीं सदी की शुरुआत में फ्रांसीसी जनरल मार्क्विस डी लाफिएट ने वेनेजुएला के महान स्वतंत्रता सेनानी सिमोन बोलिवर को जॉर्ज वाशिंगटन की तस्वीर वाला एक मेडल उपहार में दिया था। उस समय यह उपहार नई दुनिया में स्वतंत्रता और गणतंत्र की भावना के प्रसार का प्रतीक माना गया था। मचाडो ने कहा कि उसी ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज,दो सदियों बाद,बोलिवर की धरती के लोग वाशिंगटन के उत्तराधिकारी को एक पदक लौटा रहे हैं।

मचाडो ने भावुक लहजे में कहा, “इतिहास के दो सौ वर्षों बाद,बोलिवर के लोग अब वाशिंगटन के उत्तराधिकारी को यह पदक लौटा रहे हैं। इस बार यह नोबेल शांति पुरस्कार का पदक है,जो हमारी स्वतंत्रता और लोकतंत्र के लिए उनके विशेष योगदान को सम्मान देने का प्रतीक है।” उनके इस बयान को कई समर्थकों ने साहसिक और प्रतीकात्मक कदम बताया,जबकि आलोचकों ने इसे राजनीतिक नाटकीयता करार दिया।

मुलाकात से पहले व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस बैठक को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप इस मुलाकात को लेकर उत्साहित हैं और इसे एक रचनात्मक बातचीत के रूप में देख रहे हैं। लेविट ने मचाडो को वेनेजुएला के लोगों की ओर से बोलने वाली एक साहसी,स्पष्टवादी और प्रभावशाली आवाज बताया था। उनके अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप वेनेजुएला की जमीनी हकीकत,वहाँ की राजनीतिक उथल-पुथल और भविष्य की संभावनाओं को लेकर मचाडो का आकलन सुनना चाहते थे।

लेविट ने यह भी कहा कि अमेरिका का वेनेजुएला की अंतरिम नेतृत्व व्यवस्था के साथ लगातार संपर्क बना हुआ है और दोनों पक्षों के बीच सहयोग को लेकर सकारात्मक अनुभव रहे हैं। उन्होंने उदाहरण के तौर पर 500 मिलियन डॉलर की एक बड़ी एनर्जी डील का उल्लेख किया,जिसे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इसके अलावा,उन्होंने पाँच अमेरिकियों सहित कई राजनीतिक कैदियों की रिहाई को भी द्विपक्षीय संवाद की सफलता के रूप में रेखांकित किया।

हालाँकि,इस पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठ खड़ा हुआ है कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने औपचारिक रूप से नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल स्वीकार किया या नहीं। इस बारे में न तो व्हाइट हाउस की ओर से कोई स्पष्ट बयान जारी किया गया है और न ही राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वयं सार्वजनिक रूप से इस पर कुछ कहा है। यही कारण है कि इस भेंट को लेकर अटकलें और कानूनी बहस तेज हो गई है।

नॉर्वे के नोबेल संस्थान के नियमों के अनुसार,एक बार दिया गया नोबेल शांति पुरस्कार न तो किसी अन्य व्यक्ति को सौंपा जा सकता है,न साझा किया जा सकता है और न ही वापस लिया जा सकता है। इस नियम के चलते कई विशेषज्ञों का मानना है कि मचाडो द्वारा मेडल भेंट करना एक प्रतीकात्मक या भावनात्मक कदम हो सकता है,लेकिन इसका कोई औपचारिक या कानूनी प्रभाव नहीं है। फिर भी,अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में प्रतीकों की अपनी अहमियत होती है और यही वजह है कि यह कदम चर्चा का विषय बना हुआ है।

मचाडो का यह व्हाइट हाउस दौरा ऐसे समय पर हुआ है,जब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के बयान मिले-जुले रहे हैं। इस महीने की शुरुआत में ट्रंप ने कहा था कि मचाडो के लिए वेनेजुएला का नेतृत्व करना कठिन होगा,क्योंकि देश में उन्हें न तो पर्याप्त जनसमर्थन है और न ही व्यापक सम्मान। इस बयान को मचाडो के लिए एक झटका माना गया था,क्योंकि वह लंबे समय से खुद को लोकतांत्रिक बदलाव की सबसे मजबूत आवाज के रूप में पेश करती रही हैं।

इसके उलट,राष्ट्रपति ट्रंप ने वेनेजुएला की अंतरिम नेता डेल्सी रोड्रिग्ज की खुले तौर पर तारीफ की थी और उन्हें एक “शानदार व्यक्ति” बताया था। ट्रंप के इस रुख ने वेनेजुएला की विपक्षी राजनीति में नई बहस को जन्म दिया और यह सवाल खड़ा किया कि अमेरिका वास्तव में किस नेतृत्व को प्राथमिकता दे रहा है।

गौरतलब है कि मचाडो दिसंबर में करीब 11 महीनों तक छिपे रहने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आई थीं,जब उन्होंने नॉर्वे में नोबेल शांति पुरस्कार ग्रहण किया था। उस दौरान उन्होंने वेनेजुएला में लोकतंत्र,मानवाधिकार और स्वतंत्रता की बहाली के लिए अपने संघर्ष को जारी रखने का संकल्प दोहराया था। व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात और नोबेल मेडल भेंट करने का दावा उसी राजनीतिक और प्रतीकात्मक संघर्ष की एक नई कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

यह मुलाकात और उससे जुड़ा नोबेल शांति पुरस्कार का प्रतीकात्मक संदर्भ केवल दो नेताओं की व्यक्तिगत भेंट नहीं है,बल्कि यह वेनेजुएला की आंतरिक राजनीति,अमेरिका की विदेश नीति और वैश्विक लोकतांत्रिक विमर्श से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इस ऐतिहासिक भेंट का असर केवल प्रतीकों तक सीमित रहता है या वास्तव में वेनेजुएला की राजनीति और अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों में कोई ठोस बदलाव लाता है।