न्यूजीलैंड ने भारत में पहली बार जीती वनडे सीरीज (तस्वीर क्रेडिट@jyotsana51400)

इंदौर में इतिहास रच गया: न्यूजीलैंड ने भारत में पहली बार जीती वनडे सीरीज,विराट का शतक भी न दिला सका जीत

इंदौर,19 जनवरी (युआईटीवी)- इंदौर के होल्कर स्टेडियम में खेले गए तीसरे और निर्णायक वनडे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। माइकल ब्रेसवेल की कप्तानी में उतरी कीवी टीम ने भारत को 41 रन से हराकर न सिर्फ यह मुकाबला जीता,बल्कि भारत में पहली बार वनडे सीरीज पर भी कब्जा कर लिया। तीन मैचों की इस सीरीज में न्यूजीलैंड ने 2-1 से जीत दर्ज की। खास बात यह रही कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि न्यूजीलैंड ने केन विलियमसन,मैट हेनरी और मिशेल सेंटनर जैसे सीनियर और अनुभवी खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में हासिल की,जिसने इस जीत को और भी खास बना दिया।

सीरीज के निर्णायक मुकाबले में भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। शुरुआती ओवरों में भारतीय गेंदबाजों ने अनुशासित लाइन-लेंथ रखी,लेकिन इसके बाद डेरिल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स ने मैच की तस्वीर ही बदल दी। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए 219 रन की शानदार साझेदारी कर भारत को बैकफुट पर धकेल दिया। मिचेल ने बेहद धैर्य और समझदारी से पारी खेलते हुए 131 गेंदों में 137 रन बनाए,जिसमें 15 चौके और 3 छक्के शामिल थे। वहीं ग्लेन फिलिप्स ने आक्रामक अंदाज में 88 गेंदों पर 106 रन ठोके,जिसमें 9 चौके और 3 छक्के शामिल रहे।

न्यूजीलैंड की पारी को सँभालने में विल यंग का योगदान भी अहम रहा,जिन्होंने 30 रन बनाए,जबकि कप्तान माइकल ब्रेसवेल ने अंत तक टिके रहते हुए नाबाद 28 रन जोड़े। भारतीय गेंदबाजों की बात करें तो अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा ने 3-3 विकेट झटके,लेकिन हर्षित काफी महँगे साबित हुए और उन्होंने 10 ओवर में 84 रन लुटा दिए। अर्शदीप ने भी 63 रन खर्च किए। मोहम्मद सिराज को एक विकेट मिला,जबकि कुलदीप यादव ने भी एक सफलता हासिल की,हालाँकि वह भी अपेक्षाकृत महँगे रहे। न्यूजीलैंड ने निर्धारित 50 ओवर में 8 विकेट पर 337 रन बनाए,जिससे भारत के सामने 338 रन का बड़ा लक्ष्य खड़ा हो गया।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। कप्तान शुभमन गिल 23 रन बनाकर पवेलियन लौट गए,जबकि रोहित शर्मा भी सिर्फ 11 रन ही बना सके। शुरुआती झटकों के बाद एक बार फिर विराट कोहली ने भारतीय पारी को सँभालने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। कोहली ने संयम और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाते हुए 108 गेंदों पर 124 रन की बेहतरीन पारी खेली। इस पारी में उन्होंने 10 चौके और 3 छक्के लगाए। यह विराट कोहली के वनडे करियर का 54वां शतक रहा,जो उन्होंने अपनी 91वीं गेंद पर पूरा किया।

कोहली को नितीश कुमार रेड्डी का अच्छा साथ मिला। दोनों ने पाँचवें विकेट के लिए 88 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की,जिससे भारत की उम्मीदें फिर से जिंदा हो गईं। इसके बाद कोहली ने हर्षित राणा के साथ सातवें विकेट के लिए 99 रन जोड़कर मैच को रोमांचक मोड़ पर पहुँचा दिया। एक समय ऐसा लगने लगा था कि भारत इस मुश्किल लक्ष्य को हासिल कर सकता है और मैच न्यूजीलैंड की पकड़ से निकलता जा रहा है,लेकिन जैसे ही विराट कोहली नौवें विकेट के रूप में आउट हुए,भारत की जीत की उम्मीदें भी उनके साथ ही टूट गईं।

कोहली के आउट होने के बाद भारतीय पारी बिखर गई और पूरी टीम 46 ओवर में 296 रन पर सिमट गई। न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने दबाव के क्षणों में शानदार प्रदर्शन किया और भारत को लक्ष्य से 41 रन दूर रोक दिया। इस जीत के साथ ही न्यूजीलैंड ने सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली और भारतीय सरजमीं पर वनडे सीरीज जीतने वाली पहली कीवी टीम बन गई।

मैच के बाद न्यूजीलैंड के खेमे में जश्न का माहौल था। कप्तान माइकल ब्रेसवेल ने टीम के सामूहिक प्रदर्शन की जमकर तारीफ की और कहा कि युवा खिलाड़ियों ने दबाव में शानदार परिपक्वता दिखाई। डेरिल मिचेल को उनकी शतकीय पारी और मैच जिताऊ प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। मिचेल ने कहा कि भारतीय परिस्थितियों में खेलना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है और इस तरह की सीरीज जीत टीम के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है।

वहीं भारतीय टीम के लिए यह हार कई सवाल छोड़ गई। विराट कोहली के शतक के बावजूद टीम लक्ष्य तक नहीं पहुँच सकी,जो यह दर्शाता है कि शीर्ष क्रम और गेंदबाजी विभाग में अभी भी सुधार की जरूरत है। इंदौर की इस हार के साथ भारत ने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया,जबकि न्यूजीलैंड ने भारतीय क्रिकेट इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया।