दुबई,10 फरवरी (युआईटीवी)- अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी),पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के बीच हाल ही में एक रचनात्मक और सौहार्दपूर्ण बातचीत संपन्न हुई,जिसमें आईसीसी मेंस टी20 विश्व कप 2026 से जुड़े हालात और दक्षिण एशिया में क्रिकेट के व्यापक भविष्य पर गंभीर मंथन किया गया। इस बैठक को क्षेत्रीय क्रिकेट स्थिरता और दीर्घकालिक विकास के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है,क्योंकि इसमें न केवल मौजूदा विवादों का समाधान तलाशा गया,बल्कि आगे की दिशा को लेकर भी स्पष्ट संकेत दिए गए।
आईसीसी की ओर से इस बातचीत के बाद यह स्पष्ट किया गया कि क्रिकेट के सबसे वाइब्रेंट और तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक दक्षिण एशिया में खेल की ग्रोथ को आसान बनाना उसकी प्राथमिकता बनी रहेगी। इस क्षेत्र में 200 मिलियन से अधिक क्रिकेट प्रशंसक मौजूद हैं और आईसीसी का मानना है कि किसी एक आईसीसी इवेंट में किसी राष्ट्रीय टीम की अनुपस्थिति से देश में क्रिकेट पर लंबे समय तक नकारात्मक असर नहीं पड़ना चाहिए। परिषद ने इस बात पर जोर दिया कि उसकी नीतियां खेल के समग्र विकास,प्रतिस्पर्धात्मक संतुलन और प्रशंसकों की रुचि को बनाए रखने पर केंद्रित हैं।
बैठक के दौरान यह भी सहमति बनी कि मौजूदा मामले को लेकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पर किसी भी तरह की वित्तीय,खेल से जुड़ी या प्रशासनिक पेनाल्टी नहीं लगाई जाएगी। यह फैसला बीसीबी के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है,क्योंकि इससे न केवल बोर्ड की वित्तीय स्थिरता बनी रहेगी,बल्कि खिलाड़ियों और घरेलू क्रिकेट ढाँचे पर भी किसी तरह का दबाव नहीं पड़ेगा। आईसीसी ने साफ किया कि उसका दृष्टिकोण दंडात्मक कार्रवाई के बजाय सहयोग और समाधान पर आधारित है।
आईसीसी ने यह भी स्वीकार किया कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के पास यदि वह चाहे तो डिस्प्यूट रेजोल्यूशन कमेटी यानी डीआरसी से संपर्क करने का अधिकार है। यह अधिकार मौजूदा आईसीसी नियमों के तहत पूरी तरह सुरक्षित है और भविष्य में भी बना रहेगा। जानकारों के अनुसार,यह प्रावधान यह दिखाता है कि आईसीसी अपने सदस्य बोर्डों को संस्थागत और कानूनी ढाँचे के भीतर अपनी बात रखने और समाधान खोजने का पूरा अवसर देना चाहता है।
इस पूरे घटनाक्रम में आईसीसी ने अपने तटस्थता और निष्पक्षता के सिद्धांतों को दोहराया है। परिषद का कहना है कि उसका मकसद किसी भी सदस्य को सजा देना नहीं,बल्कि क्रिकेट के साझा हित में समस्याओं को सुलझाना और खेल के विकास को आगे बढ़ाना है। यही कारण है कि इस मामले में आसान मदद और सहयोग के रास्ते को चुना गया,ताकि क्रिकेट की निरंतरता और स्थिरता बनी रहे।
बैठक का एक अहम नतीजा यह भी रहा कि बांग्लादेश को भविष्य में एक बड़े आईसीसी इवेंट की मेजबानी का भरोसा दिया गया है। समझ के तहत यह तय हुआ है कि बांग्लादेश,आईसीसी मेंस क्रिकेट वर्ल्ड कप 2031 से पहले किसी एक आईसीसी इवेंट की मेजबानी करेगा। यह आयोजन आईसीसी के सामान्य होस्टिंग प्रोसेस,तय टाइमलाइन और ऑपरेशनल जरूरतों के अनुसार होगा। इस फैसले को बांग्लादेश की मेजबानी क्षमता और वहाँ मौजूद क्रिकेट ढाँचे पर आईसीसी के भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।
आईसीसी का मानना है कि इस तरह के होस्टिंग अवसर किसी भी सदस्य देश में क्रिकेट के विकास के लिए बेहद जरूरी होते हैं। बड़े टूर्नामेंट न केवल बुनियादी ढाँचे को मजबूत करते हैं,बल्कि स्थानीय प्रशंसकों,खिलाड़ियों और प्रशासनिक इकाइयों को भी अंतर्राष्ट्रीय अनुभव देते हैं। बांग्लादेश को भविष्य में मेजबानी का अवसर देने का फैसला इस बात का संकेत है कि आईसीसी देश को एक महत्वपूर्ण क्रिकेट राष्ट्र के रूप में देखता है और उसकी सदस्यता को मजबूत करना चाहता है।
आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजोग गुप्ता ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप में बांग्लादेश की अनुपस्थिति निश्चित रूप से खेदजनक है,लेकिन इससे बांग्लादेश के प्रति आईसीसी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि आईसीसी का ध्यान बीसीबी सहित सभी प्रमुख हितधारकों के साथ मिलकर काम करने पर बना हुआ है,ताकि देश में क्रिकेट का सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके और खिलाड़ियों तथा प्रशंसकों के लिए भविष्य के अवसरों को और मजबूत किया जा सके।
संजोग गुप्ता ने बांग्लादेश को एक प्राथमिक क्रिकेट पारिस्थितिकी तंत्र बताते हुए कहा कि यह देश अपने विकास, प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक एकीकरण में दीर्घकालिक निवेश का हकदार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बांग्लादेश क्रिकेट को किसी अल्पकालिक व्यवधान से परिभाषित नहीं किया जा सकता। आईसीसी का नजरिया यह है कि मजबूत घरेलू ढाँचा,प्रतिभाशाली खिलाड़ी और जुनूनी प्रशंसक आधार बांग्लादेश को भविष्य में भी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम बनाएँगे।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दक्षिण एशिया में क्रिकेट प्रशासन के लिए एक सकारात्मक उदाहरण पेश करता है। अक्सर विवादों और मतभेदों के कारण रिश्तों में तनाव देखने को मिलता है,लेकिन इस मामले में संवाद और सहयोग के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की गई। इससे न केवल बीसीबी को राहत मिली है,बल्कि पीसीबी और आईसीसी के साथ उसके रिश्तों में भी स्थिरता आई है।
दक्षिण एशिया क्रिकेट के व्यापक भविष्य के संदर्भ में यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है,क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक क्रिकेट की आर्थिक और प्रशंसक आधारित रीढ़ माना जाता है। भारत,पाकिस्तान,बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में क्रिकेट केवल एक खेल नहीं,बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। ऐसे में आईसीसी की यह कोशिश कि किसी एक देश की अनुपस्थिति से पूरे क्षेत्र में खेल की ग्रोथ प्रभावित न हो,लंबे समय में बेहद अहम साबित हो सकती है।
आईसीसी,पीसीबी और बीसीबी के बीच हुई यह रचनात्मक और सौहार्दपूर्ण बातचीत बांग्लादेश क्रिकेट के भविष्य को लेकर एक सकारात्मक संदेश देती है। न पेनाल्टी लगाने का फैसला,भविष्य में आईसीसी इवेंट की मेजबानी का भरोसा और दीर्घकालिक विकास पर जोर यह दिखाता है कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट प्रशासन फिलहाल टकराव के बजाय सहयोग और स्थिरता के रास्ते पर चलना चाहता है। यह दृष्टिकोण न केवल बांग्लादेश,बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में क्रिकेट के स्वस्थ और संतुलित विकास के लिए उम्मीद की एक मजबूत किरण के रूप में देखा जा रहा है।
