पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान

इमरान खान की आँखों की रोशनी पर गंभीर सवाल,सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल टीम गठित करने और बच्चों से बात की अनुमति देने का दिया आदेश

इस्लामाबाद,13 फरवरी (युआईटीवी)- पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान को लेकर सुर्खियों में है। इस बार मामला राजनीतिक नहीं,बल्कि उनकी सेहत से जुड़ा है। हाल ही में अदालत के आदेश पर उनसे मुलाकात कर लौटे उनके वकील ने सुप्रीम कोर्ट में जो रिपोर्ट पेश की, उसने न केवल कानूनी हलकों बल्कि पूरे देश में चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इमरान खान की दाहिनी आँख की रोशनी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है और उसमें अब केवल 15 फीसदी दृष्टि बची है। इन दावों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल संज्ञान लेते हुए उनकी आँखों की जाँच के लिए एक विशेष मेडिकल टीम गठित करने का आदेश दिया है।

वकील सलमान सफदर ने कोर्ट के निर्देश पर अदियाला जेल में इमरान खान से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद उन्होंने सात पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा कराई। रिपोर्ट में पूर्व प्रधानमंत्री की शारीरिक और मानसिक स्थिति के साथ-साथ जेल में उनकी परिस्थितियों को लेकर गंभीर चिंताएँ जताई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार,अक्टूबर 2025 तक इमरान खान की आँखों की रोशनी सामान्य 6/6 थी,लेकिन इसके बाद उन्हें अपनी दाहिनी आँख में धुंधलापन महसूस होने लगा। उन्होंने इस संबंध में जेल प्रशासन को कई बार अवगत कराया,लेकिन कथित तौर पर तीन महीने तक उन्हें कोई ठोस चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि बाद में पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस) के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. आरिफ ने उनकी जाँच की। हालाँकि,तब तक उनकी आँख में खून के थक्के जमने के कारण काफी नुकसान हो चुका था। इस स्थिति के चलते उनकी दृष्टि तेजी से प्रभावित हुई और अब दाहिनी आँख में केवल 15 प्रतिशत रोशनी बची होने का दावा किया गया है। वकील सफदर ने अदालत को बताया कि हालिया मुलाकात के दौरान इमरान खान की आँख से लगातार पानी आ रहा था,जिससे यह संकेत मिलता है कि समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है।

रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि इमरान खान की तुरंत उनके निजी चिकित्सकों—डॉ. फैसल सुल्तान और डॉ. आसिम यूसुफ से जाँच कराई जाए। हालाँकि,यह भी कहा गया है कि कोई भी योग्य नेत्र विशेषज्ञ,जिसे इमरान खान स्वीकार करें,उनकी जाँच कर सकता है। साथ ही जेल प्रशासन को निर्देश देने की माँग की गई है कि वे आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ तत्काल उपलब्ध कराएँ,ताकि उनकी दृष्टि को और नुकसान से बचाया जा सके।

मेडिकल चिंताओं के अलावा रिपोर्ट में जेल में उनकी कैद की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। मीडिया आउटलेट ‘हम’ के मुताबिक,दस्तावेजों में आरोप लगाया गया है कि इमरान खान को दो साल से अधिक समय से एकांत कारावास में रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार,लंबे समय तक अकेलेपन ने उनकी मानसिक स्थिति पर नकारात्मक असर डाला है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने गर्मी,मच्छरों और अपर्याप्त सुविधाओं के कारण नींद में बाधा की शिकायत की है। साथ ही,सेल में रेफ्रिजरेटर की अनुपस्थिति के चलते भोजन खराब हो जाने और फूड पॉइजनिंग की शिकायत भी दर्ज कराई गई है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पिछले पाँच महीनों से उन्हें अपने वकीलों से नियमित रूप से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। परिवार के सदस्यों से मुलाकात पर भी कथित रूप से प्रतिबंध लगाया गया है। यहाँ तक कि उनके निजी डॉक्टरों को भी जेल में उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी गई। जेल में टेलीविजन की सुविधा न होने का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि उन्हें पढ़ने के लिए किताबें उपलब्ध कराई जाएँ,ताकि मानसिक सक्रियता बनी रहे। इसके अतिरिक्त,अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है कि उनके खिलाफ चल रहे मामलों में निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए और उन्हें अपने बेटों से टेलीफोन पर संपर्क की अनुमति दी जाए।

इन सभी पहलुओं पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। अदालत ने निर्देश दिया कि इमरान खान की आँखों की जाँच के लिए एक स्वतंत्र मेडिकल टीम का गठन किया जाए। यह टीम उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करेगी और आवश्यक उपचार संबंधी सिफारिशें देगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि उन्हें अपने बच्चों से बात करने की अनुमति दी जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि आँखों की जाँच और टेलीफोन कॉल की व्यवस्था 16 फरवरी,सोमवार से पहले सुनिश्चित की जाए।

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश ऐसे समय आया है,जब पाकिस्तान की राजनीति पहले से ही उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। इमरान खान की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ चल रहे मामलों ने देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण को और तेज किया है। उनके समर्थक लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बनाया जा रहा है,जबकि सरकार और विपक्षी दलों का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है। अब उनकी सेहत से जुड़ी खबरों ने इस बहस को एक नई दिशा दे दी है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि अदालत मानवाधिकार और बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं के मुद्दे पर गंभीर है। किसी भी कैदी को,चाहे वह पूर्व प्रधानमंत्री ही क्यों न हो,उचित स्वास्थ्य सुविधा मिलना उसका संवैधानिक अधिकार है। यदि रिपोर्ट में किए गए दावे सही पाए जाते हैं,तो यह जेल प्रशासन के लिए भी गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

आने वाले दिनों में मेडिकल टीम की रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि इमरान खान की आँखों की स्थिति कितनी गंभीर है और क्या कथित लापरवाही के कारण उनकी दृष्टि को स्थायी नुकसान पहुँचा है। साथ ही,अदालत के निर्देशों के पालन की निगरानी भी की जाएगी। फिलहाल पाकिस्तान और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी हैं,क्योंकि यह मामला केवल एक व्यक्ति की सेहत का नहीं,बल्कि न्यायिक पारदर्शिता,मानवाधिकार और राजनीतिक माहौल का भी प्रतीक बन चुका है।