ढाका,30 नवंबर (युआईटीवी)- बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों पर हुए हमलों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ खड़ी कर दी हैं। यह घटना चटगांव में हुई,जहाँ विरोध प्रदर्शन और हिंसा के दौरान भीड़ ने तीन हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया। शुक्रवार को दोपहर लगभग 2:30 बजे,हरीश चंद्र मुनसेफ लेन इलाके में संतनेश्वर मातृ मंदिर,शोनी मंदिर और शांतनेश्वरी कालीबाड़ी मंदिर पर हमले हुए।
रिपोर्टों के अनुसार,सैकड़ों की संख्या में एकत्र भीड़ ने मंदिरों पर ईंट-पत्थर फेंके और तोड़फोड़ की। शोनी मंदिर और अन्य दो मंदिरों के द्वारों को नुकसान पहुँचाया गया। मंदिर प्रबंधन ने टूटे हुए द्वारों और अन्य संरचनात्मक नुकसान की पुष्टि की है। कोतवाली पुलिस स्टेशन के प्रमुख अब्दुल करीम ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह जानबूझकर किया गया कृत्य था,जिसका उद्देश्य धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुँचाना था।
चटगांव में बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने के आरोप में एक पुजारी,चिन्मय कृष्ण दास,को गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में तनाव पैदा हो गया और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। यह हिंसा उसी तनाव का परिणाम मानी जा रही है। संतानेश्वर मातृ मंदिर प्रबंधन समिति के स्थायी सदस्य तपन दास ने कहा कि हमलावर हिंदू-विरोधी और इस्कॉन-विरोधी नारे लगा रहे थे।
हमले के दौरान मंदिर प्रबंधन ने हमलावरों के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत से बचने का फैसला किया। स्थिति को बिगड़ता देख तुरंत सेना को बुलाया गया। सेना ने घटनास्थल पर पहुँचकर स्थिति को नियंत्रण में लिया और व्यवस्था बहाल करने में मदद की। हालाँकि,तब तक मंदिरों को काफी नुकसान पहुँच चुका था।
बांग्लादेश की कार्यवाहक सरकार पर पहले से ही धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने के आरोप लगते रहे हैं। इस घटना ने हिंदू,ईसाई और बौद्ध समुदायों के प्रति बढ़ती असहिष्णुता और उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय प्रशासन ने इस हमले की पुष्टि की है और जाँच का आश्वासन दिया है,लेकिन धार्मिक स्थलों पर हो रहे इस तरह के हमलों से धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों में असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है। इस घटना ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भी आकर्षित किया है,जो अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर बांग्लादेश सरकार पर दबाव डाल सकता है।
यह घटना बांग्लादेश में धार्मिक सहिष्णुता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर चिंता का विषय बन गई है। मंदिरों पर हमले से न केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों का विश्वास कमजोर हुआ है,बल्कि यह बांग्लादेश की सामाजिक संरचना पर भी सवाल उठाता है। सरकार को तुरंत प्रभावी कदम उठाकर इन समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और दोषियों को सख्त सजा देनी चाहिए। ऐसे हमले रोकने के लिए प्रशासन और कानून-व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है।
