अहमदाबाद,9 जनवरी (युआईटीवी)- भारत के समुद्री और ऊर्जा क्षेत्र के इतिहास में गुरुवार का दिन एक मील का पत्थर साबित हुआ,जब अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) ने देश के पहले पूरी तरह से भरे हुए वैरी लार्ज क्रूड कैरियर (वीएलसीसी) कच्चे तेल पोत का सफलतापूर्वक स्वागत किया। 3.3 लाख घन मीटर की विशाल माल ढुलाई क्षमता वाला यह पोत ‘माउंट न्यू रेनॉउन’ जैसे ही मुंद्रा बंदरगाह पर डॉक हुआ,वैसे ही भारत ने वैश्विक समुद्री मानचित्र पर अपनी तकनीकी और परिचालन क्षमता का सशक्त प्रदर्शन कर दिया।
अदाणी समूह की ओर से जारी बयान के अनुसार,इस ऐतिहासिक डॉकिंग के साथ मुंद्रा भारत का पहला ऐसा बंदरगाह बन गया है,जो बर्थ पर पूरी तरह से लदे वीएलसीसी जहाजों को सँभालने में सक्षम है। अब तक भारत में इतने बड़े कच्चे तेल वाहक जहाजों को सीधे जेटी पर खड़ा करना संभव नहीं था,क्योंकि इनके लिए असाधारण ड्राफ्ट,भारी विस्थापन और अत्याधुनिक बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि पारंपरिक रूप से ऐसे जहाजों के लिए अपतटीय सिंगल पॉइंट मूरिंग (एसपीएम) या लाइटरिंग ऑपरेशन का सहारा लिया जाता रहा है।
कंपनी ने बताया कि माउंट न्यू रेनॉउन का संचालन आसान नहीं था। तेज समुद्री धाराएँ, तेज हवाएँ और ऊँची लहरें जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद पोत को सुरक्षित रूप से डॉक किया गया। यह उपलब्धि एपीएसईजेड की समुद्री टीम,पोर्ट प्रबंधन और पायलट्स की विशेषज्ञता,बेहतर समन्वय और उत्कृष्ट परिचालन क्षमता को दर्शाती है। इस सफल ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया कि भारतीय बंदरगाह अब विश्वस्तरीय तकनीक और कौशल के साथ सबसे जटिल समुद्री अभियानों को अंजाम देने में सक्षम हैं।
मुंद्रा बंदरगाह की यह क्षमता केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है,बल्कि इसका सीधा संबंध भारत की ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। मुंद्रा का वीएलसीसी जेटी 489 किलोमीटर लंबी कच्चे तेल की पाइपलाइन के माध्यम से बाड़मेर स्थित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी से सीधे जुड़ा है। यह रिफाइनरी भारत की सबसे रणनीतिक रिफाइनिंग संपत्तियों में से एक मानी जाती है। इस निर्बाध कनेक्टिविटी से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात अधिक कुशल,तेज और सुरक्षित हो सकेगा।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस सीधी जेटी बर्थिंग सुविधा से भारत को कई स्तरों पर लाभ होगा। सबसे पहले,इससे कच्चे तेल की हैंडलिंग लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी,क्योंकि एसपीएम या लाइटरिंग जैसे जटिल और महँगे ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। दूसरा,बड़े जहाजों से सीधे जेटी पर तेल उतारने से समय की बचत होगी,जिससे आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगी। तीसरा,यह सुविधा भारत को वैश्विक तेल बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगी।
अदाणी समूह ने अपने बयान में यह भी रेखांकित किया कि पूरी तरह से भरे वीएलसीसी जहाजों के लिए सीधे जेटी बर्थिंग की सुविधा दुनिया के केवल चुनिंदा बंदरगाहों पर ही उपलब्ध है। इन जहाजों की गहराई,आकार और भार को सँभालने के लिए अत्याधुनिक डिजाइन,मजबूत जेटी संरचना और उच्च स्तरीय नेविगेशन सिस्टम की आवश्यकता होती है। मुंद्रा बंदरगाह का इस विशिष्ट वैश्विक क्लब में शामिल होना भारत के लिए गर्व का विषय है।
इस उपलब्धि के साथ मुंद्रा बंदरगाह अब चुनिंदा वैश्विक कच्चे तेल संचालन केंद्रों की श्रेणी में आ गया है। इससे न केवल भारत की समुद्री ताकत को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिलेगी,बल्कि वैश्विक ऊर्जा और शिपिंग कंपनियों के लिए भी भारत एक अधिक आकर्षक गंतव्य बनकर उभरेगा। यह कदम ऐसे समय में आया है,जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कच्चे तेल के आयात पर काफी हद तक निर्भर है और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।
मुंद्रा की उन्नत पोत संचालन क्षमता का एक बड़ा लाभ यह भी है कि अब अपतटीय एसपीएम और लाइटरिंग संचालन पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी। पारंपरिक रूप से इन प्रक्रियाओं में मौसम,समुद्री हालात और तकनीकी जोखिम अधिक होते हैं। सीधे जेटी पर संचालन से न केवल सुरक्षा बढ़ेगी,बल्कि पर्यावरणीय जोखिम भी कम होंगे,क्योंकि तेल रिसाव जैसी आशंकाएँ घटेंगी।
अदाणी समूह ने यह भी जानकारी दी कि मुंद्रा पोर्ट ने 2024-25 में एक ही वर्ष में 200 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) से अधिक कार्गो हैंडल कर इतिहास रच दिया है। इसके साथ ही यह भारत का पहला बंदरगाह बन गया है,जिसने इस स्तर की माल ढुलाई एक साल में हासिल की हो। यह आँकड़ा मुंद्रा की विशाल क्षमता,अत्याधुनिक बुनियादी ढाँचे और कुशल प्रबंधन को दर्शाता है।
माउंट न्यू रेनॉउन का मुंद्रा में सफल डॉकिंग केवल एक पोत का आगमन नहीं,बल्कि भारत की समुद्री,ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स क्षमता में एक नए युग की शुरुआत है। यह उपलब्धि भारत को आत्मनिर्भर,सुरक्षित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में देखी जा रही है।
